आप सभी ने राम सेतु के बारे में सुना ही होगा। रामायण महाकाव्य की मानें तो राम सेतु की भगवान श्रीराम और उनकी वानर सेना ने माता सीता को वापस लाने के लिए बनाया था, जिसके बाद ही लंका पर चढ़ाई की जा सकी थी। इस राम सेतु के बारे में कई तथ्य कहे जाते हैं, किसी का मानना है कि राम सेतु काल्पनिक है तो कोई इसके होने का प्रमाण भी देता है। ऐसे में आज हम बात करेंगे राम सेतु के वैज्ञानिक व धार्मिक तथ्यों के बारे में, जो हमें विश्वास दिलाता है कि वहां श्रीराम द्वारा निर्मित राम सेतु आज भी है।

बाल्मिकी रामायण में भी राम सेतु का जिक्र
भारत में इस पुल के राम सेतु के नाम से तो विश्व में इसे एडम्स ब्रिज के नाम से जाना जाता है, जिसकी लम्बाई करीब 30 मील या 48 किमी. है। कहा जाता है कि वानर सेना नल और नील नाम के दो वानर थे, जिनके वरदान था कि उनके द्वारा पानी में पत्थर फेंकने से तैरेगा। इसीलिए इस पुल को नल और नील द्वारा बनाया गया था। बाल्मिकी रामायण में भी इसका जिक्र है। इसी रास्ते से भगवान राम ने रावण की लंका में प्रवेश किया था, जिसे वर्तमान समय में श्रीलंका नाम से जाना जाता है।

14वीं शाताब्दी के पहले तक इस पुल का इस्तेमाल किया जाता रहा है
वैज्ञानिक तथ्य मानें तो इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के इस विषय में कहा है कि जब कोरल और सिलिका पत्थर गरम होता है तो उसमें हवा कैद हो जाती है, जिससे वो काफी हल्का हो जाता है और तैरने लगता है। राम सेतु को बनाने में भी ऐसे ही पत्थरों का सहारा लिया गया था, जिससे ये पत्थर पानी में तैर रहे थे। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि 14वीं शाताब्दी के पहले तक यह पुल सही सलामत था और इन दोनों देशों के लोग यातायात के माध्यम से इसी रास्ते से आया-जाया करते थे।

मानव निर्मित है राम सेतु
अमेरिका के वैज्ञानिकों ने भी इस बात का दावा किया था कि राम सेतु प्राकृतिक नहीं है बल्कि यह मानव निर्मित है, जो करीब 7000 साल पुराना है। नासा ने गूगल सैटेलाइट की मदद से राम सेतु की एक पिक्चर निकाली थी, जिसमें राम सेतु को साफ-साफ देखा जा सकता है। वैसे देखा जाए तो राम सेतु को लेकर काफी बार विवाद भी खड़ा हो चुका है, इसको लेकर यूपीए सरकार ने ये दावा किया था कि इस स्थान पर भगवान राम के द्वारा राम सेतु बनाने का कोई प्रमाण नहीं है। लेकिन बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस पर सुप्रीम कोर्ट पीआईएल लगा दी थी और इस पुल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए भी याचिका दायर कर चुके हैं जो अभी तक सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है।

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