गरुड़, पौराणिक ज़माने में मानवों जैसे दिखने वाले पक्षी का हिंदू धर्म में एक अहम स्थान है। त्रिदेवों(ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के बीच में, गरुड़ को एक पर्वत या फिर विष्णु के वाहन के रूप में सम्मान मिलता है, पर फिर भी भारत में गरुड़ को समर्पित मंदिर बहुत ही दुर्लभ हैं।

गरुड़ देवता की पीतल की प्रतिमा
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मज़ेदार बात यह है कि कर्नाटका में ऐसा अद्वितीय मंदिर स्थापित है जो गरुड़ को समर्पित है। यह कोलार के कोलादेवी गाँव का गरुड़ स्वामी मंदिर है।
इस मंदिर से जुड़ी कुछ कथाएँ प्रचलित हैं:
पहली कथा है, द्वापर युग के समय अर्जुन एक बार शिकार करने के लिए जंगल में गये, उनकी ताकतवर तीर की वजह से पूरा जंगल आग की लपटों में समा गया जिसकी वजह से जंगल के लगभग सारे साँप मार गये। उन्ही में से मरते हुए एक साँप ने उन्हे श्राप दिया जिस वजह से उन्हें सर्प दोष लगा। उस श्राप से छुटकारा पाने के लिए, विद्वानों ने अर्जुन को गरुड़ देवता की पूजा करने को कहा। इस वजह से ऐसा माना जाता है की अर्जुन ने ही कोलादेवी के गरुड़ मंदिर में गरुड़ देवता की स्थापना की।

जटायु को मारता रावण
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एक और इससे जुड़ी कथा हमें रामायण के समय में ले जाती है। जब रावण सीता का हरण कर, उन्हे अपने पुष्पक़विमान में ले जा रहा था तब वह जटायु, एक गरुड़ ही था जो उन्हें बचाने के लिए गया। पर दुर्भाग्यवश जटायु रावण के हाथों मारा गया। ऐसा माना जाता है कि यही वह जगह है जहाँ जटायु मरने के बाद आकर गिरा, इसलिए इसका नाम कोलादेव पड़ा। कन्नड़ भाषा में कोलू का मतलब होता है मारना। भगवान विष्णु गरुड़ के इस प्रयास से बहुत खुश हुए और उसे आशीर्वाद दिया, जिसके बाद गरुड़ दोबारा से इस जगह पर गरुड़ देवता के रूप में आए।
हम इस मंदिर में ही अंजनेया स्वामी(अंजनी पुत्र हनुमान) मंदिर को भी देख सकते हैं। दूसरी ख़ासियत गरुड़ की यह भी है की उनके एक कंधे पर भगवान विष्णु विराजमान हैं तो दूसरे कंधे में देवी लक्ष्मी। भक्तों का मानना है की गरुड़ की पूजा करते हुए उन्हें भगवान विष्णु जी का भी आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है।

यह कहना ग़लत नहीं होगा की गरुड़ स्वामी मंदिर, भारत के अद्वितीय मंदिरों में से एक है। तो कर्नाटका की यात्रा के दौरान इस मंदिर की यात्रा करना बिल्कुल भी ना भूलें।
कोलार के कोलादेवी गाँव कैसे पहुँचें?
बेंगलूरु से कोलार 75 किलोमीटर की दूरी पर है और कोलादेवी मुलाबगिलु से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर।
सड़क यात्रा द्वारा: बेंगलूरु से गरुड़ स्वामी मंदिर पहुँचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग NH4 से होकर कोलार को पार करना होगा। कुछ देर बाद बाएँ विचलन की ओर मुदियानुरु को पार कर कोलादेवी के लिए आगे जाएँगे।
रेल यात्रा द्वारा: बहुत सारी रेलगाड़ियाँ बेंगलुरू से कोलार का लिए चलती हैं।
क्लिक: कोलार कैसे पहुँचें?
आप कोलार के इन जगहों पर भी घूम सकते हैं:
अंतरा गंगे, कोलारम्मा मंदिर, कोटिलिंगेश्वर मंदिर, मार्कण्डेय पहाड़, अंतरा गंगे की गुफ़ाएँ, सोमेश्वरा मंदिर कोलार के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक हैं।



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