बड़ा चार धाम में से एक ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में फिलहाल जगन्नाथ देव बीमार हैं। जी हां, स्नान यात्रा के दिन 108 घड़ों के पवित्र जल से स्नान करने के बाद जगन्नाथ देव, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा समेत बीमार पड़ चुके हैं। मान्यताओं के अनुसार तीनों भाई बहनों को बुखार हुआ है जिसका डॉक्टरों द्वारा इलाज भी करवाया जाता है। पुरी की मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ 14 दिनों तक बीमार रहते हैं।
उनके ठीक होने के बाद ही रथ यात्रा निकाली जाती है। लेकिन इस साल स्नान यात्रा के नियमों में कुछ बदलाव हुए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, इस साल भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को नवयौवन वेश में दर्शन भी नहीं देने वाले हैं। पर ऐसा क्यों होगा? और क्या होता है नवयौवन वेश?

आइए जानते हैं -
रथ यात्रा के दिन हो वाला है दुर्लभ संयोग
इस साल रथ यात्रा 7 जुलाई को आयोजित होने वाली है, जिसकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गयी है। रथ यात्रा के दिन एक दुर्लभ संयोग होने वाला है। इस साल रथ यात्रा, 'नवयौवन दर्शन' और नेत्र उत्सव एक ही दिन पड़ने वाले हैं। जी हां, इस साल एक ही दिन में ये तीनों उत्सव मनाए जाएंगे। इससे पहले ऐसा 1971 और 1909 में हुआ था। इस वजह से उम्मीद की जा रही है कि श्रीमंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने वाली है।
क्यों नहीं होगा नवयौवन वेश के दर्शन
तीन भाई-बहनों की इस चहेती जोड़ी के नवयौवन वेष के दर्शन, इस साल भक्त नहीं कर पाएंगे। दरअसर, इस साल मंदिर की पंजिका में हुए बदलावों की वजह से जगन्नाथ देव का अपने भाई-बहनों समेत बीमार रहने और 'अनसर' (जिस कमरे में बीमार होने पर रखा जाता है) में रहने के दिनों की संख्या भी 1 दिन घट गयी है। पहले अनसर का समयकाल 14 दिनों का होता था लेकिन इस साल यह 13 दिनों का होगा। इस वजह से नवयौवन वेश दर्शन, रथ यात्रा और नेत्र उत्सव एक ही दिन होंगे।

नवयौवन वेष दर्शन के दिन लंबे समय तक बीमार रहे जगन्नाथ देव स्नान करने के बाद नये परिधानों में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। लंबे समय तक बीमार रहे अपने लाडले जगन्नाथ देव को नये परिधान धारण किये हुए देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ भी श्रीमंदिर परिसर में उमड़ पड़ती है। इसी कारण इस साल श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने नवयौवन वेश दर्शन नहीं करवाने का फैसला लिया है।
कब मिलेंगे दर्शन
इस साल जगन्नाथ मंदिर में न तो नवयौवन वेश दर्शन होगा और न ही पहंडी टिकट दर्शन होगा। इस बात की पुष्टि Odishatv.in को दिये एक बयान में करते हुए मंदिर प्रबंधन कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि भक्तों को श्रीमंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसलिए उन्हें नवयौवन वेश के दर्शन भी नहीं होंगे। मंदिर के गर्भगृह से बाहर आकर सिंह द्वार से बाहर निकलने के बाद ही भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकेंगे। उसी समय भक्तों को नवयौवन वेश के दर्शन हो जाएंगे।

क्या होगा पूरा शिड्यूल
भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के रथों - नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन को खींचने की प्रक्रिया 7 जुलाई को शाम 5 बजे शुरू होगी।
- इसी दिन आधी रात के बाद 2 बजे मंगल आरती होगी जिसके बाद अहले सुबह 4 बजे 'नेत्र उत्सव बंधपन' होगा।
- सुबह 7.30 बजे सो दोपहर 12 बजे तक देवताओं को यात्रा के लिए तैयार करने के लिए दैतपति 'छेनापत्ति लगी सेवा' करेंगे।
- सुबह ठीक 11 बजे रथों को सवारी के लिए तैयार कर लिया जाएगा।
- दोपहर 1.10 से 2.30 बजे के बीच सभी देवताओं की मूर्तियों को अपने-अपने रथों पर सवार कर दिया जाएगा।
- शाम 4 बजे पुरी के महाराज, दिव्यसिंह देव 'छेरा पहांरा' की रस्म पूरी करेंगे जिसमें सोने के झाडू से वह भगवान जगन्नाथ देव का रास्ता बुहार देंगे।
- इसके बाद शाम 5 बजे से रथ यात्रा शुरू होगी।



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