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इस बार औली ही क्यूं... पास में ही स्थित जोशीमठ के भी लगा लीजिए चक्कर

कुछ दिनों में हम सभी नए साल में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में आपमें से कईयों ने घूमने का भी प्लान बना ही लिया होगा। और साल के अंत तक आप अपनी सैर पर भी निकल जाएंगे, लेकिन कहां... वही मनाली-शिमला या फिर मसूरी-औली..। अरे भाई रुकिए जरा... इतना क्यूं सोच रहे हैं.. अगर आपने टिकट नहीं बनवाया है या फिर औली के लिए टिकट बुक कर ली है। तो यह डेस्टिनेशन आपके लिए ही है।

दरअसल, औली से महज 15 किमी. की दूरी पर स्थित जोशीमठ है, जो हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध ज्योतिष मठ है। उत्तराखंड के वादियों के बीच मौजूद ये पवित्र स्थान नया साल सेलिब्रेट करने के लिए एकदम परफैक्ट स्थान है। दिल्ली से यह स्थान महज 490 किमी. की दूरी पर स्थित है, जो अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है।

joshimath

जोशीमठ की स्थापना किसने की थी?

तकरीबन 8वीं शाताब्दी में जब आदिगुरु शंकराचार्य को ज्ञान की प्राप्ति हुई तो उन्होंने देश के चारों कोनों में चार मठ स्थापित किए। इसमें से पहला मठ जोशीमठ था। वहीं, बाकी के तीन मठ - शारदा मठ (गुजरात), श्रृंगेरी मठ (चिकमगलुर) व गोवर्धन मठ (पुरी) है। इन सभी की स्थापना तकरीबन 1300 साल पहले की गई थी।

जोशीमठ का पहला शंकराचार्य कौन था?

आदिगुरु शंकराचार्य ने यहीं पर एक शहतूत के पेड़ के नीचे घोर तप साधना की, जिससे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और 'शंकर भाष्य' की रचना की, जो सनातन धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है। जोशीमठ के निर्माण के बाद उन्होंने अपने शिष्य त्रोटकाचार्य को यहां की गद्दी सौंप दी और वह पहले शंकराचार्य बने।

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सर्दी में बद्रीनाथ का आसन जोशीमठ में ही रखकर पूजा जाता है...

सभी जानते हैं कि बद्रीनाथ के कपाट सिर्फ 6 महीनों के लिए खुलते हैं और फिर सर्दी के मौसम में बंद कर दिए जाते हैं। तो क्या 6 महीने तक प्रभु की पूजा नहीं होती। ऐसा बिल्कुल नहीं है। मंदिर के कपाट बंद करने से पहले बाबा बद्रीनाथ को सिंहासन सहित जोशीमठ लाया जाता है, जहां उनकी नित पूजा की जाती है।

आदिगुरु शंकराचार्य का मंदिर जोशीमठ

यहां आदिगुरु शंकराचार्य का मंदिर स्थित है। इसके अलावा यहां पर प्रसिद्ध नरसिंह मंदिर भी है, जिसको लेकर कहा जाता है कि यह मूर्ति प्रतिदिन सिकुड़ती जा रही है और एक दिन यह मूर्ति पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और पृथ्वी के लिए काफी संकट पैदा होगी और बद्रीनाथ जाने वाला रास्ता भी बंद हो जाएगा।

कत्यूरी वंश की राजधानी थी जोशीमठ

8वीं शाताब्दी से लेकर 11वीं शाताब्दी तक कुमाऊं और गढ़वाल पर कत्यूरी वंश के शासन था और जोशीमठ काफी समय उनकी राजधानी भी बनी रही। यहां आसपास में औली का फेमस स्कीइंग रिसॉर्ट है।

जोशीमठ कैसे पहुंचें?

यह हरिद्वार से करीब 250 किमी. और देहरादून से करीब 280 किमी. की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए आपको या तो हरिद्वार आना होगा या देहरादून..। अगर आप फ्लाइट से जोशीमठ पहुंचने की सोच रहे हैं तो यहां का नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून में है और अगर आप यहां ट्रेन से पहुंचने की सोच रहे हैं तो इसके लिए आप देहरादून या हरिद्वार दोनों के लिए टिकट ले सकते हैं। इसके लिए दिल्ली से हरिद्वार के लिए सीधी बसें भी मिलती है।

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