कैलाश मानसरोवर की यात्रा भला कौन नहीं करना चाहता। हो भी क्यूं ना, यहां देवादिदेव महादेव जी का निवास स्थान जो है। बीते 2 साल तक कोरोना महामारी के चलते सभी धार्मिक स्थलों पर भक्तों के जाने के लिए पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन इस बार बाबा के कपाट खोल दिए गए हैं। ऐसे में अब भक्त दर्शन करने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इस बीच आपके मन में एक जिज्ञासा होगी कि आखिर मानसरोवर की यात्रा कैसे करें? कहां से शुरू करें? इसके लिए कहां जाएं? इस आर्टिकल के जरिए हम आपके सारे प्रश्नों का उत्तर देने जा रहे हैं।
कैलाश मानसरोवर पहुंचने वाले मार्ग
विदेश मंत्रालय की ओर से कैलाश मानसरोवर की यात्रा का आयोजन किया जाता है। इसके लिए तीन अलग-अलग राजमार्ग- लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड), नाथू ला दर्रा (सिक्किम) और काठमांडू है। इन तीनों ही रास्तों को काफी जोखिम भरा माना जाता है। इसमें करीब 25 दिन का समय लगता है।

लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड)
लिपुलेख दर्रा से कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने पर श्रद्धालुओं को काफी बर्फीली मौसम का सामना करना पड़ता है। इस रास्ते से लगभग 90 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी पड़ती है। यह रास्ता बेहद कठिन है।
नाथू ला दर्रा (सिक्किम)
कैलाश मानसरोवर पहुंचने के लिए दूसरा मार्ग नाथू ला दर्रा है, जो कि सिक्किम में है। यह रास्ता यह रास्ता लिपुलेख दर्रा से थोड़ा सरल है, लेकिन काफी महंगा है।
काठमांडू (नेपाल)
काठमांडू से कैलाश मानसरोवर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को अधिकतर चीनी भूमि पर यात्रा करना पड़ता है। यानी कि करीब 70 से 80 प्रतिशत यात्रा चीन की भूमि से होकर गुजरता है। श्रद्धालुओं को इस रास्ते पर कम पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
काठमांडू से कैलाश मानसरोवर की यात्रा हवाई सफर के द्वारा भी तय किया जा सकता है। हालांकि, इसमें काफी ज्यादा खर्च होता है लेकिन काफी कम समय में इस रास्ते से कैलाश मानसरोवर की यात्रा की जा सकती है।



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