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पॉन्डिचेरी स्थित कराईकल में मंदिरों के अलावा क्या क्या देखें टूरिस्ट और ट्रैवलर

Written By: Staff

शायद भारत में जगह जगह खूबसूरत मंदिरों की अधिकता और आस्था, विश्वास ही वो कारण हैं जिसके चलते भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है। तो इसी क्रम में आज अपने इस लेख में हम आपको एक ऐसे डेस्टीनेशन से अवगत कराने जा रहे हैं जो जहां एक तरफ एक बेहद खूबसूरत शहर होने के चलते प्रकृति के दीवानों को आकर्षित करता है तो वहीँ दूसरी तरफ कई प्राचीन मंदिरों की अधिकता के चलते ये शहर धर्म की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है। जी हां हम बात कर रहे हैं कराईकल की। कराईकल, प्रसिद्ध मंदिरों का शहर है जो अपने भगवान शनिश्‍वेरा मंदिर के कारण लोकप्रिय है, यह शहर पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए एक आर्दश पर्यटन स्‍थल है।

Read in English: Travel to the Scenic Town of Karaikal, Pondicherry

इस शहर के रेतीले तट, शहर में फ्रेंच की संस्‍कृति और वास्‍तुकला, खूबसूरत मंदिर और बंदरगाह, इस स्‍थल को सभी के लिए यादगार बना देते हैं। कराईकल एक महत्‍वपूर्ण बंदरगाह शहर है जो संघ शासित क्षेत्र पांडिचेरी में बंगाल की खाड़ी के कोरामंडल तट पर स्थित है। यह पांडिचेरी के दक्षिण से 132 किमी. और चेन्‍नई के दक्षिण से लगभग 300 किलोमीटर और त्रिची के पूर्व से लगभग 150 किमी. दूरी पर बसा हुआ है। कराईकल को पांडिचेरी संघ राज्‍य क्षेत्र में डेल्‍टा के मध्‍य दूसरे स्‍थान पर रखा गया है।

अब बात यदि कराईकल के अंदर पर्यटन की हो तो आपको बताते चलें कि मंदिरों के अलावा यहां ऐसा बहुत कुछ है जिस कारण देश दुनिया के पर्यटक इस खूबसूरत शहर की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। तो अब देर किस बात की आइये इस लेख के जरिये जानें कि अपनी कराईकल यात्रा पर ऐसा क्या है जो आपको अवश्य देखना चाहिए।

कराईकल अम्‍माईयार मंदिर
कराईकल अम्‍माईयार मंदिर एक श्राइन है जहां एक प्रसिद्ध भक्ति संत कराईकल अम्‍माईयार की पूजा की जाती है। यह संत, 63 नायाम्‍यार के बीच इकलौती महिला संत थी। इस छोटे लेकिन सुंदर मंदिर को 1929 में मलाईपेरूमल ने बनवाया था। इस मंदिर में देवी के रूप में प्रसिद्ध देवियों की मूर्ति भी स्‍थापित है। यहां के स्‍थानीय लोग इस मंदिर में संत की पूजा उनकी अलौलिक शक्तियों के लिए करते हैं। दिग्‍गजों का कहना है कि जब इन संत के पति ने इनको छोड़ दिया था और दूसरी स्‍त्री से शादी कर ली थी, तो उन्‍होने भगवान शिव की आराधना की थी और उन्‍हे उस औरत को बर्बाद करने के लिए कहा। इसके बाद वह अलंगाडु के जंगलों में निवास करने लगी थी। उनकी भक्ति से प्रसन्‍न होकर भगवान शिव ने उन्‍हे माता अम्‍माईयार नाम दिया और घोषणा की जब भी वह तांडव का प्रर्दशन करेंगे तो वह ( अम्‍माईयार ) उनके लिए गाएगी। प्रत्‍येक वर्ष, कराईकल में मंगानी त्‍यौहार का आयोजन किया जाता है, इस त्‍यौहार को तमिल महीने के अनुसार आनी महीने में पूर्णिमा के दिन जून - जुलाई के दौरान आयोजित किया जाता है। इन दिनों में लोग मंदिरों में पूजा करते हैं और प्रार्थना करते हैं।

मंदिरों के अलावा और क्या है कराईकल में

Photo Courtesy: Jonas Buchholz

मेला कासकुडे

मेला कासकुडे, कराईकल के सबसे लोकप्रिय गांवों में से एक है और यह कराईकल शहर से 7 किमी. की दूरी पर कराईकल - नेडुनगडु सड़क मार्ग पर स्थित है। यह गांव यहां स्थित वारदराजा पेरूमल मंदिर के कारण विख्‍यात है जिसे 12 वीं शताब्‍दी में बनाया गया था। राज्‍य के अधिकारियों के द्वारा संरक्षित इस प्राचीन स्‍मारक में पत्‍थर की नक्‍काशी मंदिर के भीतर और बाहर दोनों तरफ बनी हुई है जो वास्‍तव में आकर्षक है। जब आप गांव के दौर पर आएं तो श्री नागानाथ स्‍वामी मंदिर जरूर जाएं। मेला कासकुडे एक मुख्‍य पर्यटक आकर्षण है, खासकर थिरूवाथीरई, वेकुंडा ईकादसी, मासी मंगम त्‍यौहार और चित्राई पूर्णिमा जैसे उत्‍सव आयोजन के दौरान यहां आने वाले पर्यटकों की संख्‍या में भारी इजाफा होता है। यह स्‍थल, अपने धार्मिक और स्‍थापत्‍य महत्‍व के कारण तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के मध्‍य खासा लोकप्रिय है।

कराईकल रेतीले समुद्री तट

कराईकल रेतीले समुद्र तट, दक्षिण तमिलनाडु में पाएं जाने वाले समुद्र तटों में से सबसे सुंदर तट है। यहां पर्यटक भ्रमण करने आते हैं, इस तट पर आने से पानी के प्रेमियों को एकाग्रता और शांति मिलती है। यहां पर बहने वाली अरासलर नदी के किनारे 2 किमी. की दूरी तक चौड़ी सड़क बनाई गई है जिससे भ्रमण करने वालों को सुविधा रहती है। यह जगह, वॉटर स्‍पोर्ट्स यानि पानी में खेले जाने वाले खेलों के कारण अधिक जानी जाती है। पर्यटक यहां आकर अरासलर नदी में नौका विहार का आनंद उठा सकते हैं, अरासलर नदी का पानी, बंगाल की खाड़ी का बैकवॉटर है। यहां पर बने हुए बोट क्‍लब, पर्यटकों को पैडलर, मोटर बोट और रोईंग बोट प्रदान करते हैं। वैसे बच्‍चों के लिए इस तट पर एक सुंदर सा पार्क भी बना हुआ है, इसके अलावा तट पर कुछ रेस्‍टोरेंट और टेनिस कोर्ट भी बने हुए हैं। पर्यटकों को तट पर भ्रमण करने के समय को सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वह वहां सूर्योदय के समय जाना चाहेंगे या सूर्यास्‍त के दौरान, क्‍योकि दिन के इसी समय में तट पर सबसे अच्‍छा लगता है।

मंदिरों के अलावा और क्या है कराईकल में

Photo Courtesy: Jassimjazz

श्री कैलासनाथर मंदिर

श्री कैलासनाथर मंदिर, संभवत: सबसे पुराने और अस्तित्‍व में रहने वाले मंदिरों में से एक है। माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 2000 साल पुराना है लेकिन यह भी कहा जाता है कि इस मंदिर को पल्‍लव शासन के दौरान पुर्ननिर्मित करवाया गया था। यह मंदिर कराईकल में अम्‍मीयार मंदिर के सामने ही स्थित है। फ्रेंच शासन के दौरान इस मंदिर को कई भागों में पुनर्निर्मित करवाया गया था। यह मंदिर भगवान कैलासनाथर और देवी सौंदर्यम्‍बल को समर्पित मंदिर है। इस मंदिर का सबसे आकर्षक हिस्‍सा इसके चार बड़े दरवाजे हैं। सुब्रमण्‍यनियार मंदिर का प्रवेश द्वार, पश्चिम दिशा के दरवाजे की ओर स्थित है।

कैसे जाएं कराईकल

फ्लाइट द्वारा : कराईकल का सबसे नजदीक घरेलू हवाई अड्डा, त्रिची हवाई अड्डा है। त्रिची एयरपोर्ट, चेन्‍नई से जुड़ा हुआ है। चेन्‍नई, कराईकल का निकटतम अंर्तराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा है। कराईकल और चेन्‍नई हवाई अड्डे के बीच कुल 300 किमी. की दूरी है। चेन्‍नई से कराईकल के लिए बसें और टैक्‍सी, आसानी से उपलब्‍ध हैं। चेन्‍नई से कराईकल तक पहुंचने में कुल 7 से 9 घंटे का समय लग जाता है।

रेल द्वारा : कराईकल में कोई रेलवे स्‍टेशन नहीं है। कराईकल का निकटतम रेलवे स्‍टेशन नागौर है। नागौर रेलवे स्‍टेशन, कराईकल से 10 किमी. की दूरी पर स्थित है। नागौर, देश के अन्‍य शहरों जैसे तमिलनाडु, पांडिचेरी और केरल से भली - भांति रेल के द्वारा जुडा हुआ है।

सड़क मार्ग द्वारा : यहाँ आने के लिए तमिलनाडु और पांडिचेरी से कई साड़ी सरकारी बसों के अलावा निजी बसें भी उपलब्ध हैं। बैंगलोर, कोयंबटूर जैसे विभिन्न शहरों से यहाँ बड़ी ही आसानी से पहुंचा जा सकता है। स्थानीय परिवहन में टैक्सियों के अलावा आप ऑटो रिक्शे से भी शहर के सुन्दर नज़ारे ले सकते हैं।

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