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बैंगलोर से सिर्फ 5 घंटे की दूरी पर सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप में मिलीए शानदार Gental Giants से

हाथियों को कहा जाता है Gental Giants। जी हां, ऐसा पशु जिसे अगर छेड़ा ना जाए तो उससे ज्यादा पालतु और कोई नहीं हो सकता और अगर छेड़ दिया जाए तो उससे ज्यादा तबाही और कोई नहीं मचा सकता। सभी प्रकार के पशुओं में हाथियों के प्रति लोगों का एक अलग ही आकर्षण होता है। इन Gental Giants के साथ समय बिताना, उन्हें नहाते हुए देखना, नहलाना और अपने हाथों से खाना खिला पाना, सोचकर ही काफी रोमांचक लग रहा है।

अगर आप बैंगलोर, मैंगलोर या आसपास के क्षेत्र में रहते हैं तो सिर्फ 5 घंटे में पहुंच सकते हैं सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप जहां आप घंटों इन Gental Giants के साथ समय बिता सकते हैं और बेबी एलीफेंट्स के साथ खेल सकते हैं।

क्यों बनाया गया एलिफेंट कैंप

लोगों में अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में सोचने और उस तरफ ध्यान देने की जरूरत सिर्फ इंसानों की ही होती है। लेकिन वास्तव में हाथी भी ऐसे जानवर हैं जिनके मानसिक स्वास्थ्य की तरफ ध्यान देने की काफी ज्यादा जरूरत होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक सरकार के वन विभाग ने शिमोगा मुख्यालय से सिर्फ 14 किमी की दूरी पर सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप शिमोगा-तीर्थल्ली रोड पर बनाया जो एक फॉरेस्ट कैंप है।

 fees to visit sakrebyle elephant camp

तुंग नदी के किनारे पर बने इस कैंप में उन हाथियों को लाया जाता है जो पौष्टिक तत्वों के अभाव और व्यवहारिक तौर पर किसी प्रकार से परेशान हैं। यहां हाथियों के व्यवहारों पर नजदीक से निगरानी की जाती है। इस एलिफेंट कैंप में सिर्फ वाइल्ड लाइफ प्रेमी ही नहीं बल्कि वैसे लोग भी आते हैं जो हाथियों और उनके व्यवहारों के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं, उनपर शोध या अध्ययन कर रहे हैं।

कैसे काम करता हैं एलिफेंट कैंप

सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप में हाथियों के अंदर उनके वास्तविक परिवेश में जीवन जीने की कला को बरकरार रखते हुए उन्हें यहां रखा जाता है। इस इको-टूरिज्म सेंटर में हाथियों को उनकी आवश्यकतानुसार सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान करने की भरपूर कोशिश की जाती है। सुबह के समय हाथियों को कुछ घंटों के लिए इस एलिफेंट कैंप में लाया जाता है, जिसके बाद शेतीहल्ली के जंगलों में छोड़ दिया जाता है ताकि वे जंगलों में रहने वाले हाथियों के साथ घुलमिल कर रह सकें।

बताया जाता है कि वर्तमान में इस एलिफेंट कैंप में 21 हाथियां हैं। इस कैंप में हाथियों को ना सिर्फ नजदीक से देखा जा सकता है बल्कि उन्हें नहलाया और खाना भी खिलाया जा सकता है। जी हां, यहां आप हाथियों को नहला भी सकते हैं। सभी हाथी अपने-अपने महावतों के साथ ही होते हैं जो उनकी देखभाल करते हैं।

एलिफेंट कैंप का मुख्य आकर्षण

वर्तमान समय में सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप का मुख्य आकर्षण मि. ध्रुव है, जो यहां अपनी मां के साथ आता है और पूरे कैंप में धमाचौकड़ी मचाता रहता है। इस एलिफेंट कैंप में आप हाथियों के साथ आने वाले उनके बच्चों के साथ खेल भी सकते हैं। हाथियों को इस कैंप में हर रोज सुबह 8.30 बजे लाया जाता है जो यहां दिन में 11.30 बजे यानी अगले 3 घंटों तक रहते हैं। इन 3 घंटों में हाथियों का ध्यान रखना, उन्हें आवश्यक दवाईयां देने का काम किया जाता है। यहीं वह समय होता है जब आम लोगों को इन हाथियों के साथ घुलने-मिलने का मौका दिया जाता है।

Baby elephant

ध्यान दें : यहां आने वाले हाथी जंगली होते हैं। उन्हें किसी खास कारणों और प्रशिक्षण देने के लिए ही यहां लाया जाता है। इसलिए हाथियों के करीब जाते हुए, खास तौर पर उनके बच्चों के साथ खेलते समय और पानी में उन्हें नहलाते हुए विशेष सावधानी व सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। महावतों के निर्देशों का जरूर पालन करें।

हाथियों को खाना खिलाना और उनकी सवारी

हाथियों के सुबह का ब्रेकफास्ट और खाना कैंप में ही तैयार किया जाता है। महावत और उनके सहायक मिलकर हाथियों को खाना खिलाते हैं। इस समय यहां घूमने आने वाले लोगों को हाथियों के आसपास रहने की अनुमति दी जाती है। इसके बाद दोपहर का खाना हाथी जंगलों में ही खाते हैं जहां उनके दूसरे दोस्त भी रहते हैं। बाकी समय का खाना हाथियों को कैंप में कर्मचारी ही देते हैं।

Elephant sanctuary

हाथियों के कैंप में आए और उनकी सवारी नहीं की तो ऐसा कैसे हो सकता है। अगर आप सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप आते हैं तो आपको हाथियों की सवारी करने का भी मौका मिलता है। 10 मिनट की इस सवारी के लिए वयस्कों के लिए ₹75 और बच्चों के लिए ₹40 का शुल्क लगता है। किस हाथी की सवारी करवायी जाएगी इसका चुनाव महावत और उनके सहायक ही हाथियों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के आधार पर करते हैं।

समय और प्रवेश शुल्क

सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप का प्रवेश शुल्क सिर्फ ₹30 है। अगर आप हाथियों को नहलाने में अपना हाथ आजमाना चाहते हैं तो उसके लिए प्रति व्यक्ति ₹100 देने होंगे। इस एलिफेंट कैंप में हाथियों को 3 घंटों के लिए लाया जाता है। इसलिए यहां आपको हाथी सुबह 8.30 बजे से 11.30 बजे तक ही दिखेंगे।

कैसे पहुंचे सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप

सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप शिमोगा जिला मुख्यालय से सिर्फ 14 किमी की दूरी पर है। शिमोगा से यहां तक पहुंचने में महज 25 से 30 मिनट का समय लगता है। शिमोगा जिले में कोई एयरपोर्ट नहीं है। यहां से नजदीकी एयरपोर्ट मैंगलोर है जो यहां से करीब 165 किमी की दूरी पर है। सड़क मार्ग से आने पर बैंगलोर यहां से 285 किमी की दूरी पर है। मैंगलोर और बैंगलोर दोनों जगहों से ही आपको टैक्सी व कैब आसानी से मिल जाएंगे। बैंगलोर से सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप पहुंचने में आपको साढ़े 5 से 6 घंटों का समय लग सकता है।

FAQs
सक्रेबाइल एलीफेंट कैंप कहां है?

सक्रेबाइल एलीफेंट कैंप कर्नाटक के शिमोगा जिले में है। यह बैंगलोर और मैंगलोर के काफी पास मौजूद है।

क्या एलिफेंट कैंप में हाथियों के करीब जाने का मौका मिलता है?

सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप में हाथियों को उनकी बेहतर देखभाल के लिए लाया जाता है। यहां कुछ देर हाथियों को रखकर वापस जंगल में छोड़ दिया जाता है। इस दौरान उनके साथ महावत होते हैं। अगर हाथियों की मानसिक स्थिति ठीक रही तो ना सिर्फ उनके करीब या उन्हें छुकर प्यार करने बल्कि इस कैंप में उन्हें नहलाने, खाना खाते हुए देखने और धमाचौकड़ी मचा रहे उनके बच्चों के साथ खेलने का भी मौका मिलता है।

सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप पहुंचने में कितना समय लगता है?

सक्रेबाइल एलिफेंट कैंप शिमोगा जिला मुख्यालय से सिर्फ 14 किमी की दूरी पर है। शिमोगा से यहां तक पहुंचने में महज 25 से 30 मिनट का समय लगता है। बैंगलोर यहां से 285 किमी की दूरी पर है।

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