कर्नाटक में तेलंगाना की सीमा से सटे रायचूर जिले में कृष्णा नदी से हाल ही में भगवान विष्णु की प्राचिन मूर्ति और शिवलिंग बरामद की गयी है। भगवान विष्णु की मूर्ति अयोध्या में स्थापित रामलला की प्रतिमा जैसी बतायी जा रही है। दावा किया जा रहा है कि दोनों मूर्तियों के हाव-भाव में काफी समानता है। जानकारी के अनुसार कर्नाटक के राजचूर जिले में शक्तिनगर के पास कृष्णा नदी पर पुल बनाया जा रहा है।
पुल बनाते समय ही नदी की तलहटी से दोनों मूर्तियों को बरामद किया गया है। दोनों प्रतिमाएं ही सैंकड़ों साल पुरानी बतायी जा रही हैं।
क्या हो सकती है मूर्ति की कहानी?

रायचूर विश्वविद्यालय के व्याख्याता डॉ. पद्मजा देसाई ने भगवान विष्णु की मूर्ति के बारे में अनुमान लगाते हुए कहा, "यह मूर्ति किसी समय किसी मंदिर के गर्भगृह में स्थापित रही होगी। संभव है कि मंदिर को नुकसान पहुंचाने के साथ ही इस मूर्ति को शिवलिंग समेत नदी में फेंक दिया गया होगा।" वहीं एक अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि इस्लामिक लुटेरों से बचाने के लिए संभव है कि दोनों मूर्तियों को नदी की तलहटी में छिपा दिया गया हो।
रामलला से क्या है समानता?
पुरातत्विदों का मानना है कि दोनों मूर्तियां 11वीं से 12वीं सदी के आसपास की रही होंगी। कर्नाटक के रायचूर जिले में मिली भगवान विष्णु और अयोध्या में हाल ही स्थापित रामलला की मूर्तियों के बीच काफी ज्यादा समानता होने का दावा किया जा रहा है। दोनों मूर्तियों के मध्य में देव की मूर्ति स्थित है और चारों तरफ से दशावतार की मूर्तियां तराशी गयी हैं।
दोनों मूर्तियां ही खड़ी मुद्रा में है और दोनों मूर्तियों के चेहरे के हाव-भाव में भी काफी ज्यादा समानता होने का दावा किया जा रहा है। फिलहाल कृष्णा नदी की तलहटी से बरामद भगवान विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिया गया है जो मूर्ति की सटिक आयु का पता लगाएंगे व अन्य जानकारियों को जुटाएंगे।

बता दें, रामलला की मूर्ति को तराशने का काम कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया था। उन्हें इस मूर्ति को तैयार करने में करीब 7 महीनों का समय लग गया था। योगीराज का कहना था कि उनके मन में रामलला की जैसी छवि आती रही, वह उसी प्रकार से रामलला की मूर्ति तैयार करते रहें। रामलला से मिलती-जुलती सैंकड़ों साल पुरानी मूर्ति का कर्नाटक में नदी की तलहटी से मिलने को लोग चमत्कार के तौर पर ही देख रहे हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, कृष्णा नदी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। इसे गंगा और यमुना नदियों के समान भारत की पवित्र नदियों में से एक माना जाता है और इसका नाम भगवान कृष्ण के नाम पर रखा गया है।



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