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भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर जहां लगता है चूहों का दरबार

Written By: Nripendra

राजस्थान के बीकानेर में एक ऐसा हिन्दू मंदिर है, जिसे 'चूहों का मंदिर' कहा जाता है। हैरानी की बात यह है कि यहां 20,000 चूहे रहते हैं, जिनका झूठा किया हुआ प्रसाद भक्तों को दिया जाता है। इस बात से यह तो साफ हो जाता है कि जहां आस्था का निवास हो वो जगह अपने आप पवित्र हो उठती है।

भले ही यहां आने वाले श्रद्धालु अपने घरों में चूहों को बर्दाश्त न करते हों, पर इस मंदिर में प्रवेश के बाद उन्हें चूहों के बीच ही रहना पड़ता है। यह मंदिर बीकानेर से 30 किमी की दूरी पर 'देशनोक' में स्थित है। आइए जानते हैं, और क्या-क्या चीजें इस मंदिर को सबसे अगल बनाती हैं।

माता करणी को समर्पित

माता करणी को समर्पित

PC- User:Rakesh bhat29

बीकानेर का यह मंदिर मुख्यत: माता करणी देवी को समर्पित है, जिन्हें माता 'जगदम्बा' का अवतार माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जहां यह मंदिर है वहां लगभग साढ़े छह सौ वर्ष पहले माता करणी गुफा में रहकर अपने इष्ट देव की पूजा करती थीं। यह प्राचीन गुफा आज भी यहां स्थित है। कहा जाता है, मां की इच्छा से ही इस गुफा में माता करणी की मूर्ति स्थापित की गई थी। कुछ लोगों का मानना है कि आज का बीकानेर व जोधपुर मां के आशीर्वाद से ही अपने अस्तित्व में आए।

 मंदिर की संरचना

मंदिर की संरचना

PC - Pablo Nicolás Taibi Cicare

माता का मंदिर संगमरमर से बना हुआ है, जिसके मुख्य दरवाजें को पार करते ही यहां के चूहों की धमाचौकड़ी शूरू हो जाती है। संगमरमर के बने होने के कारण यह मंदिर काफी सुंदर व भव्य नजर आता है। मंदिर की दीवारों पर की गई आकर्षक नक्काशी इसे खास बनाती हैं। दीवारों, दरवाजों व खिड़कियों पर की गई बारीक कारगीरी किसी का भी ध्यान खींच सकती हैं। आप यहां धार्मिक गतिविधियों के अलावा यहां की वास्तुकला को देख सकते हैं। इस मंदिर का दरवाजा चांदी का और छत सोने से बनाई गई हैं।

चूहों की धमाचौकड़ी

चूहों की धमाचौकड़ी

PC -Fulvio Spada

मंदिर परिसर में चूहों की सेना देख कई बार भक्त घबरा भी जाते हैं। चूहों की संख्या का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर के मुख्य दरवाजे से लेकर माता की मूर्ति तक आपको पैर घसीटते हुए जाना होगा। श्रद्धालु इसी तरह माता करणी के दर्शन करते हैं। यहां ज्यादातर आपको काले चूहे ही नजर आएंगें, हां अगर आपको कोई सफेद चूहा दिखता है तो उसे पुण्य माना जाता है। मान्यता है कि अगर आप सफेद चूहे को देखकर कोई मनोकामना करते हैं तो वह जरूर पूरी होती है। यहां चूहों के प्रसाद के लिए चांदी की बड़ा परात भी रखी गई है।

मंदिर का निर्माण

मंदिर का निर्माण

PC- Schwiki

करणी देवी मंदिर का निर्माण 20वी शताब्दी में बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। माता करणी बीकानेर राजघराने की कुलदेवी हैं। कहा जाता है कि माता करणी का जन्म एक चारण परिवार में हुआ था। कहा जाता है, शादी के एक समय बाद उनका सांसारिक जीवन से मन ऊब गया जिसके बाद उन्होंने अपना सारा जीवन भक्ति और सामाजिक सेवा में लगा दिया। जानकारों का मानना है कि माता करणी 151 साल तक जीवित रहीं, और ज्योतिर्लिंग में परिवर्तित हो गईं।

और क्या देखें - जूनागढ़ का किला

और क्या देखें - जूनागढ़ का किला

PC- jokertrekker

मंदिर के दर्शन के बाद अगर आप चाहें तो बीकानेर स्थित दार्शनिक स्थानों की सैर कर सकते हैं। आप यहां स्थित जूनागढ़ किला देख सकते हैं। यह किला पहले चिंतामणि नाम से जाना जाता था, जिसका 20वीं शताब्दी में नाम बदलकर जूनागढ़ रख दिया गया। यह राज्य का वो किला है जिसका निर्माण समतल क्षेत्र में करवाया गया था जबकि राजस्थान के अधिकांश किले पहाड़ी चोटी पर बनाए गए हैं। यह किला कई बार बाहरी शक्तियों का आक्रमण झेल चुका है। इस किले का निर्माण राजा राय सिंह के शासन काल के दौरान करवाया गया था।

लालगढ़ पैलेस

लालगढ़ पैलेस

PC- Madelon van de Water Noledam

आप चाहें तो बीकानेर स्थित लालगढ़ पैलेस की सैर का आनंद ले सकते हैं। इस महल का निर्माण महाराजा गंगा सिंह ने 1902-26 बीच करवाया था। यह महल लाल पत्थर पर बनवाया गया है, जिसकी वास्तुकला किसी का भी मन मोह सकती है। इस महल के विशाल आकार से इसकी भव्यता साफ पता चलती है। इस महल में 100 से भी ज्यादा कमरों का निर्माण करवाया गया था। महल के आसपास खूबसूरत उद्यान हैं जिनके रंग-बिरंगे फूल इस महल की खूबसूरती पर चार चांद लगाते हैं। महल के अंदर एक पुस्तकालय भी मौजूद है। इसके अलावा आप यहां गजनेर पैलेस, जैन मंदिर, राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र आदि देख सकते हैं।

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

PC- dalbera

बीकानेर आप तीनों मार्गों से पहुंच सकते हैं। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा जोधपुर स्थित है। रेल मार्ग के लिए आप बीकानेर और लालगढ़ रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। आप चाहें तो सड़क मार्ग से भी यहां तक का सफर तय कर सकते हैं। बीकानेर सड़क मार्गों द्वारा राजस्थान के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।