भारत अपनी संस्कृति और आध्यात्म के लिए जाना जाता है। यहां के लोग समृद्ध परम्परा का निर्वहन करते हैं। इसका मुख्य कारण है कि भारत में धार्मिक स्थलों का अधिक होना। यहां आपको कई ऐसे मंदिर मिलेंगे, जिनके चमत्कार से दूर-दूर के श्रद्धालु अंचभित हो उठते हैं और मंदिर दरबार में पहुंच जाते हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में एक ऐसा ही मंदिर है, जिसके चमत्कार से तो दुनिया वाकिफ है ही, इसके अलावा नासा के वैज्ञानिक भी आश्चर्य में हैं।
माता कसार देवी मंदिर
यह मंदिर दुनिया के तीन ऐसे पर्यटन स्थलों में से एक है, जहां कुदरत अपना एक अलग रंग दिखाती है। यहां, कुदरती दर्शन के साथ-साथ यहां पर्यटकों को मानसिक शांति की भी अनुभूति होती है। कुदरती करिश्मा के बीच बसा यह मंदिर माता कसार देवी को समर्पित है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यह मंदिर अद्वितीय और चुंबकीय शक्ति का केंद्र है। नासा के वैज्ञानिकों ने इस दैवीय स्थान को 'वैन एलन बेल्ट' की श्रेणी में रखा है। उनका मानना है कि इस स्थान में एक विशाल भू-चुंबकीय क्षेत्र है। वहीं, बाकी के दो - पेरू (माचू पिचू) और ग्रेट ब्रिटेन (स्टोन हेंज) में है।

करीब 2000 साल पुराना है मंदिर
इस मंदिर की संरचना की तारीखें दूसरी शाताब्दी की है। यह मंदिर बहुत ज्यादा बड़ा तो नहीं है लेकिन हां, यहां पहुंचने के बाद आपको जो शांति मिलेगी, वो भूलने योग्य नहीं है। अल्मोड़ा के शानदार नजारों का दीदार करते हुए आप जब मंदिर तक पहुंचेंगे तो पार्किंग के पास से माता के मंदिर की चढ़ाई शुरू होती है। यह बहुत अधिक तो नहीं है लेकिन हां चढ़ाई के दौरान आपको एक अलग ही सुकून मिलेगा। देवदार के पेड़ों की छाया व ताजी हवाएं मानिए आपके साथ आंख मिचोली का खेल खेल रही हो।
शब्दों में परिभाषित नहीं किया जा सकता यह स्थान
यकीन मानिए इस कुदरती स्थान के बारे में लिखने में भी शब्द कम पड़ जाते हैं, हाथ रुकने से लगते हैं कि आखिर ऐसा क्या लिख दिया जाए तो इसे पूरी तरह व्याख्यित कर सके। यह मंदिर लोगों के बीच तब अधिक प्रसिद्ध हुआ, जब (साल 1890) यहां विवेकानंद आए। इस स्थान के कई विद्वानों को अपनी ओर आकर्षित किया। यहां क्रैंक्स रिज पहाड़ी स्थित है, जो देखने में बेहद आकर्षक लगती है। कहा जाता है कि कभी यह लेखकों, कवियों और कलाकारों का केंद्र हुआ करता था।

कसार देवी मंदिर के आसपास घूमने वाली जगहें
1. क्रैंक्स रिज - (कसर देवी में)
2. चितई गोलू देवता मंदिर (लगभग 9 किमी)
3. बिनसर वन्यजीव अभयारण्य (लगभग 15 किमी)
4. जागेश्वर मंदिर - (लगभग 36 किमी)
5. बैजनाथ मंदिर - (लगभग 70 किमी)
6. कटारमल मंदिर - (लगभग 90 किमी)
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