बिहार अपने इतिहास और सुन्दरता के लिए जाना जाता है। इतिहास से जुड़े कई अवशेष आज भी बिहार में मौजूद हैं। ऐसा ही एक अवशेष बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले के केसरिया में मौजूद है, जहां दुनिया के सबसे ऊंचे बौद्ध स्तूप को देखने के लिए देश ही नहीं विदेश से भी पर्यटक आते हैं।

दुनिया का सबसे ऊंचा बौद्ध स्तूप
केसरिया का बौद्ध स्तूप दुनिया का सबसे ऊंचा बौद्ध स्तूप है। इंडोनेशिया स्थित प्रसिद्ध बोरोबदुर (जावा) बौद्ध स्तूप की ऊंचाई 103 फीट है जबकि केसरिया बौद्ध स्तूप की ऊंचाई 104 फीट बतायी जाती है। हालांकि केसरिया बौद्ध स्तूप के बारे में कहा जाता है कि यह जितना जमीन के ऊपर है, उतना ही जमीन के नीचे छिपा हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है खुदाई कर जितना बाहर निकाला जा रहा था, उतना ही यह जमीन के अंदर धंसता जा रहा था। इस वजह से 104 फीट बाहर निकालने के बाद खुदाई को बंद कर देना पड़ा। माना जाता है कि महापरिनिर्वाण से ठीक पहले वैशाली से कुशीनगर जाते समय गौतम बुद्ध केसरिया में एक रात के लिए रुके थे। उनकी याद में ही सम्राट अशोक ने इस स्तूप का निर्माण करवाया था।

केसरिया बौद्ध स्तूप का इतिहास
केसरिया और आसपास के स्थानीय इलाकों के लोग शुरुआत में इसे कोई प्राचीन शिव मंदिर या स्थानीय राजा भेम का टीला मानते थे, जो जंगल से घिरा हुआ था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने करीब 1998 में इस स्तूप को खोजा और खोदकर बाहर निकाला। 6 मंजीला इस स्तूप के हर मंजील पर गौतम बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में मुर्तियां लगी हुई हैं।
लंबे समय तक जमीन के नीचे दबे रहने के कारण इन मूर्तियों को नुकसान भी पहुंची है। बताया जाता है कि यह स्तूप चक्रवर्ती सम्राट अशोक, जिन्होंने सबसे पहले बौद्ध धर्म को अपनाया और उसका प्रचार-प्रसार किया, द्वारा बनवाया गया था। स्तूप के पास से खुदाई में अशोक स्तंभ भी मिले हैं।

देश-विदेश से आते हैं पर्यटक
इस बौद्ध स्तूप देखने के लिए केसरिया में देश ही नहीं विदेशों से भी बौद्ध भिक्षु और पर्यटक आते हैं। साथ ही केसरिया का केसरनाथ शिव मंदिर भी स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। बौद्ध स्तूप से 1 किमी पहले मौजूद इस मंदिर में वैदिककालिन स्फटिक का शिवलिंग स्थापित है। इस मंदिर का उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग की यात्रा वृतांत में भी मिलता है।
माना जाता है कि राजा भेम के शासनकाल में यह भूतेश्वर महादेव का मंदिर हुआ करता था, जो कालांतर में किसी कारणवश ध्वस्त हो गया था। 1970 में जब यहां नहर की खुदाई हो रही थी, उस समय इस मंदिर के भग्नावशेष मिले। खुदाई के दौरान फावड़े की चोट के बावजूद इस शिवलिंग को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। स्थानीय लोगों की इस मंदिर पर अपार श्रद्धा है।
कैसे पहुंचे केसरिया
केसरिया सड़क मार्ग से बिहार के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। केसरिया के बौद्ध स्तूप से मुजफ्फरपुर 75 किमी, सोनपुर 80 और राजधानी पटना 110 किमी की दूरी पर है। केसरिया का सबसे नजदिकी रेलवे स्टेशन चकिया है, जो केसरिया शहर से 12-15 किमी की दूरी पर स्थित है। राजधानी पटना से चकिया रेलवे और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।
चकिया से केसरिया के लिए किराए पर गाड़ियां आसानी से उपलब्ध है। चूंकि केसरिया बौद्ध स्तूप खुले में है, इसलिए हमारी सलाह है कि तेज धूप के समय दिन में यहां ना जाएं। अगर धूप में जाने की योजना है तो छाता, पीने का पानी और सनग्लासेस साथ में लेकर जरूर जाएं।



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