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बुंदेलखंड का ऐतिहासिक शहर खजुराहो : Sensual मूर्तियों के अलावा और भी बहुत कुछ देखने को है यहां

मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर, खजुराहो। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने खजुराहो का नाम न सुना हो। खजुराहो UNESCO की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है और एक बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। खजुराहो बुंदेलखंड का हिस्सा है। लेकिन खजुराहो की लोकप्रियता एक खास कला की वजह से ही है। खजुराहो प्रमुख रूप से कामुक भाव-भंगिमाओं और मुद्राओं वाली मूर्तियों की वजह से सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।

काफी लोगों का मानना है कि खजुराहो में देखने के लिए सिर्फ सेक्सुअल भाव-भंगिमाओं वाली मूर्तियां ही है, जो वास्तव में सच नहीं है।

khajuraho temple

कई ट्रैवलर्स से बात करने पर हमें पता चला कि खजुराहो के मंदिरों में जितनी भी मूर्तियां हैं, उनमें से मात्र 10% मूर्तियां ही सेक्सुअल भाव-भंगिमाओं वाली हैं। बाकी की 90% मूर्तियां देवी-देवताओं, कलाकारी और अन्य शिल्पकारियों को समर्पित हैं। तो अगर आप अब तक सिर्फ इन सेक्सुअल मूर्तियों की वजह से असहज महसूस करते हुए खजुराहो नहीं जाने के बारे में सोच रहे थे तो अब वक्त आ गया है कि अपनी सोच को बदले और इस शानदार ऐतिहासिक जगह पर घूमने जाने का प्लान बना लें। खजुराहो कैसे पहुंचे और वहां क्या-क्या देख सकते हैं, इस बारे में हम आगे विस्तृत जानकारी दे रहे हैं।

1000 साल से भी पुराने हैं ये मंदिर

खजुराहो मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले के पन्ना और छतरपुर शहर के बीच मौजूद है। किसी समय खजुराहो में खजूर के ढेर सारे पेड़ हुआ करते थे, जिनकी वजह से ही इस शहर का नाम खजुराहो पड़ा। खजुराहो चंदेलों की राजधानी हुआ करती थी और उन्हीं राजाओं ने यहां इन मंदिरों का निर्माण करवाया। इतिहासकारों का मानना है कि जिस समय खजुराहो में मंदिरों का निर्माण हुआ था, तब अभिव्यक्ति का एकमात्र साधन शिल्पकारी ही हुआ करती थी।

इस वजह से खजुराहो के मंदिरों पर इन मूर्तियों को उकेरा गया है। कहा जाता है कि खजुराहो के मंदिर 1000 साल से भी अधिक पुराने हैं। वर्ष 1838 में कैप्टन टी.एस. बर्ट, जो एक ब्रिटिश अधिकारी थे, गलती से अज्ञात मार्ग पर चले गये थे। तब उन्होंने ही यहां छिपे मंदिरों से दुनिया का परिचय करवाया था।

khajuraho madya pradesh

नागर शैली में बने हैं मंदिर

खजुराहो के सभी मंदिर नागर शैली में बने हुए हैं। मिली जानकारी के अनुसार खजुराहो में 12वीं शताब्दी तक लगभग 85 मंदिर थे, लेकिन 13वीं शताब्दी में इनमें से काफी मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था। वर्तमान में खजुराहो में मात्र 22 मंदिर ही बचे हुए हैं। खजुराहो के मंदिरों में यौन गतिविधियों को दर्शाती मूर्तियों के अलावा आम जीवन, कुम्हारों, संगीतकारों, किसानों व महिलाओं की मूर्तियों को भी तराशा गया है। आपको जानकार हैरानी होगी, कि खजुराहो सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि बौद्ध और जैन मंदिरों का भी समूह है।

lakshmana temple khajuraho

खजुराहो में क्या-क्या देखें

खजुराहो एक ऐसा शहर है, जिसके हर कोने में ऐतिहासिकता की झलक मिलती है। अगर आप खजुराहो के प्रमुख मंदिरों में घूमना चाहते हैं तो घंटाई, आदिनाथ, मातंगेश्वर, वामन, कंद्रिय महादेव, ब्रह्मा, जगदंबी आदि मंदिरों में जा सकते हैं। इसके अलावा शाम को इन्हीं मंदिरों में लाइट एंड साउंड शो का भी आयोजन होता है, जिसे मिस करना बहुत बड़ी गलती होगी। खुजराहो में मौजूद राज्य संग्रहालय में चंदेल वंश के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल कर सकते हैं।

इसके अलावा यहां की आदिवासी संस्कृतियों के बारे में भी यहां आपको विस्तृत जानकारी मिलेगी। खजुराहो से मात्र 80 किमी दूर अजयगढ़ किला है, जिसपर चंदेल राजाओं का अधिकार रहा है। आप चाहे तो 688 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद इस किले पर भी घूम आ सकते हैं। खजुराहो में ही लक्ष्मण मंदिर है, जिसका निर्माण हजारों साल पहले किया गया था। इस मंदिर की कलात्मकता भी देखने लायक है।

jain temple khajuraho

आसपास के मार्केट, जहां कर सकेंगे शॉपिंग

गोल मार्केट : यह शहर का मुख्य मार्केट है, जो सेवाग्राम के पास स्थित है।
राज नगर मार्केट : यह मार्केट हर मंगलवार को लगता है। यहां से आप चांदी और पीतल के सामान खरीद सकते हैं।
शिल्पग्राम : यह सरकार द्वारा बसाया गया मार्केट है जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश के स्थानीय कलाकृतियों और कलाकारों को प्रोत्साहित करना है। यहां आप हाथ से बने पेंटिंग, पारंपरिक कलाकृतियां, मिट्टी से बने सामान, पत्थरों को तराशकर बनायी गयी चीजें, बलुआ पत्थर से बनी वस्तुओं के अलावा हैंडलुम कपड़े इत्यादि खरीद सकते हैं।

खजुराहो में रहने खाने का कितना खर्च?

दिल्ली से खजुराहो पहुंचने में फ्लाइट की टिकट पर 4000 से 7000 रुपए, बस से जाने पर 1100 रुपए और ट्रेन में शयनयान का किराया लगभग 370 रुपए है। इस शहर में कई सस्ते व मशहूर दोनों तरह के होटल मिल जाएंगे। इन होटलों में कमरा प्रति रात 1000 रुपए से 5000 रुपए तक में उपलब्ध होता है। यहां खाने-पीने पर आपको ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। 200 रुपए में आपको किसी भी ढाबा स्टाइल होटल में अच्छा खाना मिल जाएगा।

कैसे पहुंचे खजुराहो?

खजुराहो एयरपोर्ट के लिए आपको दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, वाराणसी आदि से सीधी उड़ान मिल जाएंगी। खजुराहो शहर से एयरपोर्ट मात्र 6 किमी की दूरी पर है। वहीं दिल्ली से खजुराहो के लिए सीधी ट्रेन भी मिल जाएगी। इसके अलावा महोबा रेलवे स्टेशन भी खजुराहो से लगभग 63 किमी की दूरी पर है। दिल्ली से कई निजी कंपनियों की बसें भी चलती हैं, जिनसे आप आसानी से खजुराहो पहुंच सकते हैं।

FAQs
खजुराहो घूमने का सबसे अच्छा समय क्या है?

खजुराहो घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और आप आसानी से घूम सकते हैं।

खजुराहो के मंदिरों का निर्माण कब हुआ था?

खजुराहो के मंदिरों का निर्माण चंदेल राजाओं ने 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच करवाया था। ये मंदिर लगभग 1000 साल पुराने हैं।

खजुराहो क्यों प्रसिद्ध है?

खजुराहो मुख्य रूप से सेक्सुअल भाव-भंगिमाओं वाली मूर्तियों के लिए जाना जाता है। इन मूर्तियों में धार्मिक विषयों के साथ-साथ कामुक भाव-भंगिमाएं भी दर्शाई गई हैं। हालांकि यह बात सही है कि यहां की कुछ मूर्तियां कामुक हैं, लेकिन अधिकांश मूर्तियां देवी-देवताओं और अन्य कलाकृतियों को समर्पित हैं।

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