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खजुराहो, जहां कामदेव भी आकर कह दें, वाह ये तो कमाल हो गया!

Posted By: Staff

चाहे प्राचीन भारतीय इतिहास की किताबें हों या वात्स्यायन का कामसूत्र आपने खजुराहो का नाम कहीं न कहीं ज़रूर सुना होगा और फिर जैसे ही आप इस नाम की कल्पना करते होंगे तो जो सबसे पहली चीज आपके दिमाग में आती होगी वो या तो यहां के मंदिर होंगे या फिर लव मेकिंग और इरोटिका में लिप्त मूर्तियां।

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अगर आप इन मूर्तियों को देखें तो आपको लगेगा कि प्राचीनकाल से ही हमारे देश में "काम" को एक विशेष महत्त्व दिया गया है। खजुराहो, मध्‍यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित एक सुरम्‍य स्‍थल है जो विंध्‍य पर्वत श्रृंखला की पृष्‍ठभूमि में स्थित है। खुजराहो का नाम दुनिया के नक्‍शे पर विश्‍व धरोहर के रूप में जाना जाता है।जहां बलुआ पत्‍थरों पर खुदाई करकेइन बेशकीमती मूर्तियों को तैयार किया गया था, आज भी यह मूर्तियां सारी दुनिया में विख्‍यात है। अनूठी और जूनून से भरी ये मूर्तियां देखने में वाकई बड़ी खास लगती है।

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चित्रगुप्त मंदिर

चित्रगुप्त मंदिर

सूर्यदेव को समर्पित चित्रगुप्त मंदिर एक बहुत पुराना तीर्थस्थल है। यह मंदिर 11वीं सदी में बनाया गया था। सात घोड़ों वाले रथ पर खड़े हुए सूर्यदेव की शानदार मूर्ति इस मंदिर का मुख्य आकर्षण है। इस मंदिर की दीवारों पर बारीक नक्काशी की गई है। इस मंदिर के अन्य आकर्षण हैं- पत्थर की नक्काशियों में सुरसुंदरियों की पूरी आकृतियाँ, ग्यारह सिर वाला भगवान विष्णु का स्वरूप तथा कामुक प्रेम दर्शाते प्रेमी जोड़े। इस मंदिर के प्रवेशद्वार सूर्यदेव की छोटी मूर्तियों से सजे हुए हैं। यहाँ आने वाले यात्री अकसर मंदिर की खूबसूरती देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

देवी जगदंबा मंदिर

देवी जगदंबा मंदिर

देवी जगदंबा मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। मंतिदर का गर्भगृह ब्रह्मांड की देवी जगदंबा को समर्पित है। मंदिर की दीवारों पर कुशलता से सुंदर चित्र खुदे हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर मूलरूप से भगवान विष्णु को और बाद में देवी पार्वती और उसके बाद देवी काली को समर्पित किया गया था। यह मंदिर तीन भाग वाले डिज़ाइन को शानदार तरीके से प्रस्तुत करता है। इसका डिज़ाइन चित्रगुप्त मंदिर के जैसा है। इस मंदिर की विशेषता हे कि यह एक पवित्र स्थान पर है जहाँ चलने के लिए कोई जगह नहीं है।मंदिर में आने वाले यात्री इसकी दीवारों पर बनी सुंदर नक्काशियाँ देखते ही रह जाते हैं। नक्काशियों में इस्तेमाल किया गया हर पत्थर एक कहानी कहता है। खजुराहो की यात्रा इस मंदिर में आए बिना पूरी नहीं हो सकती।

 जावड़ी मंदिर

जावड़ी मंदिर

जावड़ी मंदिर खजुराहो पर्यटन की एक अनूठी प्रस्तुति है। यह ब्रह्म मंदिर के पास स्थित है और खजुराहो मंदिरों के पूर्वी समूह के अंतर्गत आता है। बाकी मंदिरों की तुलना में यह मंदिर आकार में छोटा है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर 1075 और 1100 के बीच बनाया गया था। इस मंदिर की ख़ासियत है कि यह प्राचीन खजुराहो की वास्तुकला शैली को दर्शाता है। यह मंदिर 11.88मी. लंबा और 6.4मी. चैड़ा है। इसकी अन्य विशेषता इसकी बाहरी दीवारों की सजावट है। इन दीवारों पर बनी अद्भुत नक्काशियों में अनेक विवरण हैं। खजुराहो वास्तुकला देखने के लिए यह एक उचित जगह है।

दूल्हादेव मंदिर

दूल्हादेव मंदिर

दूल्हादेव मंदिर खजुराहो के मंदिरों के दक्षिणी समूह से संबंधित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर 1130 में चंदेलों ने बनवाया था और आज भी यह अपनी समृद्ध कला और वास्तुकला को दर्शाता है। इस मंदिर में पाँच छोटे कमरें और एक बंद हाल है। दूल्हादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती की कई मूर्तियों से इस मंदिर को सजाया गया है। मूर्तियों की प्रशंसनीय फिनिशिंग उस सूय के शिल्प कौशल को दिखाती है। इस मंदिर के भीतर एक सुंदर शिवलिंग है। मंदिर के भीतरी हिस्सों में दीवारों और छत पर भारी और बारीक नक्काशी है।

लक्ष्मण मंदिर

लक्ष्मण मंदिर

लक्ष्मण मंदिर भगवान विष्णु के सम्मान में बना एक मंदिर है। पत्थर से बनी यह एक शानदार संरचना है। पश्चिमी समूह से संबंधित यह सबसे प्राचीन मंदिर है। यह 930-950 ई. में बनाया गया था। यह उन मंदिरों में से एक है जो समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और जिनकी वास्तुकला संरक्षित है। इस मंदिर में 600 से अधिक हिंदू देवताओं की मूर्तियाँ हैं। इस मंदिर के मंच पर हाथी और घोड़ों जैसी कई चीज़ों के सुंदर चित्र हैं। मंदिर के चारों कोनों पर चार छोटे मंदिर बने हैं। प्रत्येक मंदिर के बार्डर पर नक्काशी की गई है।

लक्ष्मी मंदिर

लक्ष्मी मंदिर

धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी को समर्पित लक्ष्मी मंदिर खजुराहो का एक छोटा सा मंदिर है। यह मंदिर पश्चिमी समूह के मंदिरों के अंतर्गत आता है। इसका निर्माण 900-925 के आसपास केया गया था। इस मंदिर को सजाने के लिए मध्यम आकार की मूर्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ पर स्थित मूर्ति पीले बलुआ पत्थर से बनी है। मूर्ति की चमक इसे अधिक आकर्षक बनाती है। इस मंदिर को देवी देवताओं की 674 आकृतियों से सजाया गया है। बाहरी और अंदर की दीवारों पर बारीक नक्काशी उस समय के कारीगरों की प्रतिभा को दर्शाती है जिन्होंने सीमित संसाधनों के साथ इस तरह का शानदार काम किया।

 कंडारिया महादेव मंदिर

कंडारिया महादेव मंदिर

कंडारिया महादेव मंदिर खजुराहो में पश्चिमी समूह के मंदिरों में सबसे बड़ा मंदिर है। सामान्य मंच पर बना यह पहला मंदिर था। यह तीर्थस्थान 1025-1050 के आसपास चंदेला शासकों ने भगवान शिव की पूजा करने के लिए बनवाया था। इसके गर्भगृह के बीच एक शिवलिंग स्थित है। यह मंदिर पाँच भागों वाली वास्तुकला शैली में डिज़ाइन किया गया है जिसमें गर्भगृह, अर्धमंडप, प्रदक्षिणा और महामंडप हैं। इस मंदिर में 100फीट से अधिक ऊँची एक टावर है। इस मंदिर का मुख्य भाग बहुत सारी मूर्तियों से सजा है जिनमें सुंदर नक्काशी और डिज़ाइन बने हैं।

विश्वनाथ मंदिर, खजुराहो

विश्वनाथ मंदिर, खजुराहो

विश्वनाथ मंदिर हिंदू देवता, भगवान शिव को समर्पित है। मुग्ध कर देने वाला संगमरमर का शिवलिंग मुख्य देवता के रूप् में पूजा जाता है। धांगा देव द्वारा बनवाया गया यह मंदिर पश्चिमी समूह के मंदिरों के अंतर्गत आता है। यह मंदिर पंचायतन आकार में बना है जिसमें चारों कोनों पर चार मंदिर बीच में स्थित मुख्य मंदिर को घेरे हुए हैं। मंदिर में चट्टानों से बनी 600 से अधिक मूर्तियाँ हैं। यहाँ भगवान ब्रह्मा की एक प्रभावशाली मूर्ति भी है। रक्षक के रूप में उरी सीढि़यों पर सिंह और दक्षिणी सीढि़यों पर हाथी की मूर्तियाँ होने से ब्रह्मा की मूर्ति भव्य दिखाई देती है।

आदिनाथ मंदिर

आदिनाथ मंदिर

आदिनाथ मंदिर खजुराहो में जैन मंदिर से संबंधित एक विशेष मंदिर है। यह पाश्र्वनाथ मंदिर के उ में स्थित है। 11वीं सदी में चंदेल शासकों ने यह मंदिर बनाकर जैन संत आदिनाथ को समर्पित किया था। इस मंदिर का निर्माण सप्त-रथ पर आधारित है। इस मंदिर को एक मीनार वाले शिकारे से सजाया गया है जिससे इसकी सुंदरता बढ़ जाती है। राज दरबार के संगीतकारों की मुद्राओं की सुंदर नक्काशी मंदिर की दीवारों पर देखी जा सकती है। इसकी दीवारों पर आदिनाथ के दरबार में एक प्रसिद्ध नर्तकी नीलांजना की नृत्य शैली को बहुत बारीकी से दिखाया गया है।

बीजामंडल मंदिर

बीजामंडल मंदिर

बीजामंडल मंदिर खजुराहो में विदिशा में स्थित है। मंदिर के सबसे ऊपर लगा हुआ एक सफेद पत्थर इसकी विशेषता है। मंदिर की शानदार वास्तुकला एक इंडानेशियाई या दक्षिण-पूर्व एशियाई शैली को प्रदर्शित करती है। इस मंदिर में हर रात एक पवित्र दीपक जलाने की परंपरा है। मंदिर के पास रहने वाले ग्रामीण यहाँ हर रात एक तेल का दीपक जलाते हैं। ऐसा कई सालों से हो रहा है। यह मंदिर मूल रूप से हिंदू देवी देवताओं, भगवान शिव और देवी पार्वती का सम्मान और पूजा करने के लिए बनाया गया था। आपको बता दें कि वास्तविक मंदिर अब खंडहर बन चुका है जिसके अवशेष आप यहां देख सकते हैं।

 चैसठ योगिनी मंदिर

चैसठ योगिनी मंदिर

चैसठ योगिनी मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। 875-900 ई. के आसपास बना यह मंदिर खजुराहो के मंदिरों के पश्चिमी समूह में आता है। यह मंदिर 64 योगिनी को समर्पित है जो देवी माँ के रूप है। यह मंदिर कई तरह से अद्वितीय है। स्थानीय ग्रेनाइट से बना यह एकमात्र मंदिर है। इस मंदिर का डिज़ाइन साधारण और बिना किसी सजावट के है। इसकी दीवारों पर खजुराहो के मंदिरों की तरह नक्काशी की कमी है। इस मंदिर में 67 तीर्थ हैं जिनमें से 64 प्रत्येक योगिनी के निवास स्थान के रूप में उपयोग किया जाते हैं। एक बड़ा मंदिर महिषासुर मर्दिनी के रूप में देवी दुर्गा को समर्पित है। बाकी मंदिर मैत्रिका ब्राह्मणी और महेश्वरी के लिए है।

शांतिनाथ मंदिर

शांतिनाथ मंदिर

शांतिनाथ मंदिर, खजुराहो मंदिरों के पूर्वी समूह से संबंधित एक प्रसिद्ध जैन मंदिर है। हालांकि यह खजुराहो के दूसरे सदियों पुराने मंदिरों के जैसा ही है लेकिन यह नवनिर्मित मंदिर है। यह मंदिर प्रसिद्ध जैन संत आदिनाथ को समर्पित है। जैन धर्म को मानने वालों के लिए यह मंदिर एक प्रमुख तीर्थस्थल है। इस मंदिर के मुख्य देवता की ऊँचाई साढ़े चार मी. है जो खड़ी पोजि़शन में है। यह मूर्ति 1028 ई. में बनाई गई थी। आसन पर विराजमान एक बैल की नक्काशी यात्रियों का स्वागत करती है। इस मंदिर में जैन तीर्थंकरों की अनेक मूर्तियाँ हैं।

पाश्र्वनाथ मंदिर

पाश्र्वनाथ मंदिर

पाश्र्वनाथ मंदिर खजुराहो में स्थित मंदिरों के पूर्वी समूह के अंतर्गत एक शानदार संरचना है। यह मंदिर जैन तीर्थंकर को समर्पित है। इसे वर्तमान समय में भारत का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है। यह मंदिर 954 ई. के आसपास बनवाया गया था। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ के सम्मान में बनाया गया था। इसे मूर्तियों और शिलालेखों से सजाया गया है। इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। यहाँ पाश्र्वनाथ की एक मूर्ति रखी है। इस मंदिर की अनोखी बात यह है कि पुरुषों और महिलाओं की कामुक मूर्तियाँ न होने पर भी यह बहुत प्रसिद्ध है।

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