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जानिये दिल्ली का इतिहास...कितने शहरों से मिलकर बनी है नई दिल्ली

भारत की राजधानी दिल्ली सिर्फ देश की राजधानी ही नही बल्कि अपनी अपनी खूबसूरती के कारण भी लोगो के दिल में बसी हुई है। लेकिन क्या आप दिल्ली के पुराने शहरों से वाकिफ है नहीं तो हमारे लेख के जाने

By Goldi

भारत की राजधानी दिल्ली सिर्फ देश की राजधानी ही नही बल्कि अपनी अपनी खूबसूरती के कारण भी लोगो के दिल में बसी हुई है। तभी तो इसे भारत का दिल कहा जाता है। यह शहर सिर्फ केवल देश की राजधानी ही नहीं बल्कि राजनीतिक गतिविधियों की भी राजधानी है, जो इसे एक रमणीय स्थान बनाते हैं और पर्यटन पारखियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। साथ ही इस शहर की खूबसूरती के कारण भी लोगो के दिल में बसी हुई है। तभी तो इसे भारत का दिल कहा जाता है।

दिल्ली भारतीय इतिहास की गवाह रही है, जिसने वैभव और आपदाएं देखी हैं और जिसमें अनेक संस्कृतियों को समाहित कर सकने की क्षमता है, फिर भी यह शहर अडिग है। यह वह हीरा है जिसके कई फलक है, कुछ चमकीले है और कुछ समय के साथ मैले पड़ चुके हैं, जो प्राचीन समय से भारतीय जीवनशैली और विचारों को प्रदर्शित करते आ रहे हैं।

दिल्ली का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें एक उल्लेखनीय निरंतरता है और किसी अन्य शहर की तुलना में अधिक समय तक भारत की राजधानी बने रहने की अनोखी विशिष्टता है। एक प्राचीन किवदंती है कि "जिसने दिल्ली पर शासन
किया, उसने भारत पर शासन किया"।

दिल्ली की स्थापना का संदर्भ महाभारत में मिलता है। दिल्ली को हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र ने पांडवों कोआसपास के क्षेत्र में अपना साम्राज्य स्थापित करने के निर्देश दिए। दिल्ली का यह हिस्सा खांडवप्रस्थ के नाम से जाना गया।

पांडव राजकुमार, युधिष्ठिर ने खांडववन नामक जंगल क्षेत्र को साफ करके दिल्ली में इन्द्रप्रस्थ नामक शहर की स्थापना की। वास्तव में यह इतना आकर्षक शहर था कि कौरव पांडवों के शत्रु बन गए। उसी काल से दिल्ली ने अनेक साम्राज्यों
एवं सम्राटों का उत्थान एवं पतन देखा। इसकी लोकेशन से प्राचीन काल से ही अनेक राजा इसका ओर आकर्षित हुए क्योंकि इस शहर का सामरिक और वाणिज्यिक महत्व था। सिर्फ इंद्रप्रस्थ ही बल्कि दिल्ली और सात शहरों का शहरो है...

स्लाइड्स पर डालिए एक नजर

लाल कोट अथवा किला राय पिथौरा

लाल कोट अथवा किला राय पिथौरा

किला राय पिथौरा का निर्माण पृथ्वीराज चौहान ने कराया था, वह मुस्लिम अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध हिन्दू प्रतिरोध की कथाओं के प्रसिद्ध नायक थे। पृथ्वीराज के पूर्वजों ने तोमर राजपूतों से दिल्ली को छीना था, जो दिल्ली के संस्थापक माने जाते थे। एक तोमर राजा, अनंगपाल ने दिल्ली में संभवत पहला नियमित रक्षा संबंधी कार्य किया था, जिसे लाल कोट कहा गया - जिस पर पृथ्वीराज ने कब्जा किया उसका अपने शहर किला राय पिथौरा तक विस्तार किया। इस किले की प्राचीरों के खंडहर अभी भी कुतुब मीनार के आसपास के क्षेत्र में आंशिक रूप से देखे जा सकते हैं। तोमर और चौहान वंश के काल में दिल्ली में मंदिरों का निर्माण हुआ। यह माना जाता है कि कुववत-उल-इस्लाम मस्जिद और कुतुब मीनार के
परिसर में सत्ताइस हिन्दू मंदिरों के अवशेष मौजूद हैं। महरौली स्थित लौह स्तम्भ जंग लगे बिना विभिन्न संघर्षों का मूक गवाह रहा है और राजपूत वंश के गौरव और समृद्धि को कहानी बयान करता है।PC: Anupamg

महरौली

महरौली

महरौली कभी हिंदुयों की जागीर हुआ करती थी..लेकिन पृथ्वी राज चौहान की मुगलों से हार हो जाने के बाद महरौली क्षेत्र अतिक्रमणकारियों की गद्दी बना रहा, जो कभी पूर्ववर्ती हिन्दुओं की राजधानी रहा था। महरौली के पहाड़ी परिदृश्य में अर्द्धवृत्ताकार दीवार, वेधशाला की मीनारें, अनेक मकबरे और अन्य ऊंचे भवन मौजूद हैं। ये दर्शाते हैं कि सल्तनत काल में महरौली सर्वाधिक सुंदर और संपन्न राजधानी वाला शहर रहा था। नई दिल्ली का निर्माण होने तक इसे अक्सर पुरानीदिल्ली कहा जाता रहा था, इसके बाद शाहजहानाबाद को पुरानी दिल्ली कहा गया।
PC: Ramesh lalwani

सीरी

सीरी

सीरी जिसे अब हौज खास के रूप ,से जाना जाता है..इसका निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने किया था, उसने सन 1303 ई. में अपनी राजधानी सीरी में स्थापित की। उसने कमल के फूल की तरह अश्वपद जैसे एक अर्द्धवृत्ताकार तोरण का निर्माण भी कराया। यह द्वार अलाई दरवाज़े के नाम से प्रसिद्ध है और इस्लामिक स्थापत्य कला में इसका मुख्य स्थान है।
PC: Prateek Rungta

तुगलकाबाद

तुगलकाबाद

1320 मेंमुलतान के सैन्य गवर्नर के विरोझ के बावजूद ग्यासुद्दीन तुगलक शाह-I दिल्ली का सुल्तान बन गया था। तुगलकों ने अपना स्वयं का नगर बसाया जिसे तुगलकाबाद के नाम से जाना जाता है। तुगलकाबाद दिल्ली के अतीत के संघर्ष और उस युग के आतंक तथा साहस के याद की एक निशानी है। तुगलक काल में अनेक भवनों का निर्माण हुआ। तुगलकों ने अपनी स्वंय की वास्तुकला का विकास किया। जिसके प्रतिनिधि उदाहरण तुगलकाबाद किले, बड़ी मंज़िल अथवा कालू सराय और बेगमपुर गांव के बीच बिजय मंडल, खिड़की मस्जिद, मालवीय नगर-कालकाजी रोड पर चिराग गांव में चिराग़-ए-दिल्ली की दरगाह के रूप में देखे जा सकते हैं।
PC: Merethrond

फिरोजाबाद

फिरोजाबाद

वर्तमान में फिरोज़ाबाद को फिरोज शाह कोटला का निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने कराया था।फिरोज शाह ने कलां मस्जिद, चौंसठ खंबा, बेगमपुर मस्जिद और उसके समीप बिजय मंडल तथा बारा खंबा तुगलक के काल में निर्मित अन्य महत्वपूर्ण भवन हैं। उसने रिज के जंगलों में अनेक सरायों का निर्माण भी करवाया। इन सरायों में भूली भटियारी का महल, पीर गरीब और मालचा महल अभी भी मौजूद हैं।
PC: Mohitnarayanan

शेरगढ़

शेरगढ़

शेर शाह ने दिल्ली के एक अन्य शहर को बसाया। यह शहर जिसे शेरगढ़ के नाम से जाना जाता है, दीनपनाह के खंडहरों पर बसाया गया था, जिसे हुमायूं द्वारा बसाया गया था।शेरगढ़ के अवशेष आज के पुराने किले के रूप में देखे जा सकते हैं।PC: Manfred Sommer

शाहजहानाबाद

शाहजहानाबाद

शाहजहानाबाद को शाहजहां ने बसाया था,हालांकि अब इसे पुरानी दिल्ली के नाम से जाना जाता है। यह चारदीवारी वाला शहर था, और इसके कुछ दरवाज़े और दीवार के कुछ हिस्से अभी भी मौजूद हैं। शाहजहां के समय का लाल जैन मंदिर, अप्पा गंगाधर मंदिर (गौरी शंकर मंदिर), मराठी प्रभुत्ववाला आर्य समाज मंदिर (दीवान हाल), बेपटिस्ट चर्च, गुरुद्वारा सीसगंज, सुनहरी मस्जिद और वेस्ट एंड टर्मिनस, फतेहपुरी मस्जिद आज भी मौजूद है। दस द्वार शहर को आसपास के क्षेत्र से जोड़ते थे। दिल्ली गेट के अलावा लाल किले में प्रवेश के लिए लाहौर गेट मुख्य प्रवेश द्वार था। कश्मीरी गेट, कलकत्ता गेट, मोरी गेट, काबुल गेट, फराश खाना गेट, अजमेरी गेट और तुर्कमान गेट शहर को मुख्य मार्गों से जोड़ते थे।
PC: Aleksandr Zykov

नई दिल्ली

नई दिल्ली

नई दिल्ली की नींव वर्ष 1911 15 दिसम्बर को में दिल्ली दरबार के दौरानभारत के सम्राट, जॉर्ज पंचम ने रखी। ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड इर्विन द्वारा 13 फ़रवरी 1931 को नई दिल्ली का उद्घाटन हुआ। भारत में ब्रिटिश शासकों की राजधानी रहा नई दिल्ली शहर, विभिन्न शासकों द्वारा निरमित शहरों की श्रंखला का आठवां शहर था। अगस्त, 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् राष्ट्रीय सरकार ने किसी अन्य शहर का निर्माण नहीं किया। नई दिल्ली के अनेक किस्से रहे हैंऔर इसका तेजी से परिवर्तन हुआ है। नई दिल्ली के कारण ही अधिकांश पर्यटकों पर शहर की पहली छाप पड़ती है। नई दिल्ली का अधिकांश निर्माण कार्य 1920-1930 के बीच हा था।स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात्, दिल्ली नए भारत की राजधानी बनी। स्वतंत्रता के बाद से ही इसका महत्व कई गुना बढ़ा है और दिल्ली अब देश की राजनैतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक राजधानी बन चुकी है।PC: flickr.com

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