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जानिए... गुजरात की धरती पर अपनी नवाबी छटा के लिए प्रसिद्ध जूनागढ़ का इतिहास और भारत में विलय की कहानी

गुजरात के जूनागढ़ का इतिहास और विलय कहानी से संबंधित जानकारी इस लेख में दी गई है, जो आपकी जूनागढ़ की यात्रा को और भी रोमांचक बना सकती है। आजादी के पहले जूनागढ़ भारत के प्रसिद्ध रियासतों में से एक की थी।

भारत के हर शहर का अपना इतिहास है और हर शहर की अपनी एक कहानी है। अब आप भी अगर उस कहानी को जानना चाहते हैं तो उस शहर का दौरा तो करना ही पड़ेगा। कुछ ऐसा ही है गुजरात की धरती पर बसा बेशकीमती नगीना जूनागढ़। जूनागढ़ गुजरात का एक ऐसा स्थान है, जहां जाने के बाद आपको राजस्थान की याद भी आ सकती हैं। घुमक्कड़ों के लिए ये स्थान बेहद कमाल का है, जो अपनी नवाबी के अलावा प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। ऐसे में अगर आप भी इस शहर की खूबसूरती और नवाबी ठाठ को करीब से देखना व महसूस करना चाहते हैं तो आपको एक बार यहां की सैर जरूर करनी चाहिए।

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जूनागढ़ में घूमने वाले जगहों के बारे में बात की जाए तो यहां आपको कई सैकड़ों हिंदू मंदिर व जैन मंदिर देखने को मिलेंगे। जूनागढ़ का मतलब होता है 'पुराना किला'। गिरनार पहाड़ी पर बसे इस शहर का नाम जूनागढ़ किले के नाम पर पड़ा। जूनागढ़ पर चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक ने भी अपना शासन किया, जिसका इतिहास भारत के विभाजन तक बड़ा ही गहरा रहा है। जूनागढ़ अपनी वास्तुकला के लिए चिन्हित किया जाता है। यहां खूबसूरत मंदिर व किलों के अलावा आपको गुफाएं (100-700 ईस्वी के दौरान बनी) भी देखने को मिलेंगी, जो अपनी-अपनी कहानियां बयां करती हैं।

जूनागढ़ में घूमने वाली जगहें - गिरनार हिल्स, दत्त हिल्स, गिर नेशनल पार्क, अपरकोट किला (319 ईसा पूर्व में चन्द्रगुप्त मौर्य द्वारा निर्मित), महाबत मकबरा, कालिका मंदिर, भवनाथ मंदिर व अड़ी-कड़ी कुआं।

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जूनागढ़ का इतिहास

आजादी के पहले तक यह शहर एक रियासत हुआ करती थी। हैदराबाद के बाद अगर भारत का सबसे खासा प्रसिद्धी किसी रियासत ने पाई तो वो जूनागढड ही है। इसका इतिहास हजारों साल पुराना है। यह शहर अपनी हड़प्पाकालीन स्थलों की खुदाई के लिए भी जाना जाता है। जूनागढ़ पर कभी मगध साम्राज्य का भी अधिपत्व रहा। इतना ही नहीं यह शहर चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक (260-238 ई.पू.), रुद्रदामन (130-150 ईस्वी) व स्कंदगुप्त (455-467 ईस्वी) के भी अधीन रह चुका है। यहां खुदाई में सम्राट अशोक के शासनकाल में जारी किए गए राजकीय आदेश और नियम खुदे हुए 14 शिलालेख भी प्राप्त हुए हैं।

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जूनागढ़ का भारत में विलय

कुछ शाताब्दी पहले जूनागढ़ पर राजपूतों ने अपना कब्जा जमा लिया और फिर कई वर्षों तक यह चूड़ासम राजपूतों की राजधानी रही। इसके बाद 1472 ईस्वी में जूनागढ़ पर महमूद बेगढ़ा ने कब्जा जमाकर जूनागढ़ का नाम मुस्तफाबाद रख दिया था। जूनागढ़ के अंतिम नवाब महाबत खान थे, जो जनता के विरूद्ध जाकर जूनागढ़ को पाकिस्तान में विलय करना चाहते थे। लेकिन तत्कालीन गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल ने अपनी सूझबूझ से जूनागढ़ को भारत में विलय कराया और महाबत खान को पाकिस्तान भेजने पर मजबूर कर दिया।

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और फिर जनमत संग्रह के आधार पर जूनागढ़ का भारत में विलय कराया गया, जिसमें जूनागढ़ 99 फीसदी जनता ने भारत में रहने की इच्छा जताई थी। इसके पहले भी जूनागढ़ की आवाम चाहती थी कि उनका विलय भारत में ही हो लेकिन महाबत खान इसके विपरीत जाकर जूनागढ़ को पाकिस्तान में मिलाना चाहता था।

जूनागढ़ से सम्बन्धित हमने सारी जानकारी आपके सामने रखी है, अगर कोई जानकारी हमसे छुट गई हो या हम न लिख पाए हो तो आप हमें अपने शहर के बारे में बता सकते हैं। हमसे जुड़ने के लिए आप हमारे Facebook और Instagram पेज से भी जुड़ सकते हैं...

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