जब भी किसी मंदिर के बारे में बात होती है तो उसके इतिहास और उसके निर्माण की शैली के बारे में बात की जाती है। दक्षिण भारत में जहां अधिकांश मंदिर द्रविड़ शैली में निर्मित बतायी जाती है तो वहीं उत्तर भारत में नागर शैली में मंदिरों का निर्माण होता है। लेकिन क्या कभी आपने किसी ऐसे भारतीय मंदिर के बारे में सुना है, जिसकी निर्माण शैली यूरोपिय है?
जी हां, उत्तर कोलकाता में स्थित पारसनाथ जैन मंदिर एक ऐसा स्थान है जिसे यूरोपिय वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना कहा जा सकता है। बता दें, ब्रिटिश काल में कोलकाता (तत्कालिन कलकत्ता) देश की राजधानी हुआ करती थी। इस वजह से इस शहर पर यूरोपिय संस्कृति का काफी अधिक प्रभाव था।

कोलकाता के पारसनाथ जैन मंदिर का निर्माण वर्ष 1867 में राय बद्रीदास बहादुर नामक एक जैन धर्म के अनुयायी ने करवाया था, जो खुद कला के पारखी थे। यह मंदिर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पारसनाथ को समर्पित है। मंदिर की प्रतिष्ठा श्री कल्याणसुरीश्वरजी महाराज द्वारा की गयी थी। इस मंदिर में एक नहीं बल्कि कुल 4 गर्भगृह हैं। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में जैन भगवान शीतलनाथ की प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में स्थित है।
तीन अन्य गर्भगृह में चंद्रप्रभु देव जी का मंदिर, दादाजी गारू और कुशलजी महाराज के मंदिर हैं। इसके अलावा जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर, जो महात्मा बुद्ध के समकक्ष थे, का भी एक मंदिर इस मंदिर परिसर में है। मंदिर में एक अखंड ज्योत जलती है जो इस मंदिर की स्थापना के दिन जलायी गयी थी।

आकर्षित करती है वास्तुकला
कोलकाता के पारसनाथ जैन मंदिर के ठीक सामने से होकर एक फ्लाईओवर गुजरती है। फ्लाईओवर से होकर आते-जाते हर गाड़ी और उसके सवारी की नजरें इसकी वास्तुकला पर कुछ पल के लिए जरूर ठहर जाती है। पारसनाथ जैन मंदिर सफेद रंग के संगमरमर से बना है, जो इसकी भव्यता को बढ़ा देता है। मंदिर कई बराम्दो से घिरा हुआ है। बराम्दो के खंभों पर कांच से की गयी कलाकृति इसे काफी आकर्षक बना देती है।
खिड़कियों में रंगीन कांच जड़ा हुआ है जो इस मंदिर की खुबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है। मंदिर की दीवारों पर मोजाइक और अन्य कई सजावटी काम किये हुए हैं। मुख्य मंदिर में भगवान शीतलनाथ की मूर्ति के माथे पर हीरे और कई तरह के कीमती पत्थर जड़े हुए हैं। इसके अलावा मूर्तियों के गले में सोने के हार और चांदी के कमल पर ये मूर्तियां विराजमान हैं।

छत से लटकती झुमर जिसकी 100 से अधिक लड़ियां हैं, को देखकर लोगों की आंखें चमक उठती है। मंदिर परिसर में बड़े बागिचे भी हैं, जहां तरह-तरह के फूल खिलते हैं। इस मंदिर में प्रसिद्ध चित्रकार गणेश मस्करे के पेंटिंग्स भी आपको देखने को मिलेंगी।
कैसे पहुंचे और कब खुलता है मंदिर
पारसनाथ जैन मंदिर आम लोगों के लिए सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक और शाम को 3 रात 7 बजे तक खुला रहता है। यह मंदिर उत्तर कोलकाता के प्रमुख स्थान में है जहां आप बस, मेट्रो, टैक्सी या कैब से आसानी से पहुंच सकते हैं। यह जगह बेलगछिया और श्यामबाजार के ठीक बीच में स्थित है। यहां का नजदीकी मेट्रो स्टेशन उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर का बेलगछिया मेट्रो है। मेट्रो से बाहर निकलकर कुछ मीटर आगे बढ़ते ही आपको यह मंदिर मिल जाएगा।



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