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कोलकाता के इस 150 साल पुराने मंदिर को देखकर होगा दक्षिणेश्वर मंदिर में होने का अहसास

कोलकाता आने वाले सैलानियों की लिस्ट में दक्षिणेश्वर का भवतारिणी काली मंदिर जरूर शामिल होता है। लेकिन आज हम आपको दक्षिणेश्वर नहीं बल्कि इस मंदिर की नकल कही जा सकने वाली शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर के बारे में बता रहे हैं।

Annapurna Temple

इस मंदिर का निर्माण दक्षिणेश्वर मंदिर का निर्माण करवाने वाले जमींदार परिवार की सदस्य द्वारा ही लगभग 150 साल पहले करवाया गया था।

आइए आपको शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर के इतिहास से रु-ब-रु करवाते हैं

किसने करवाया था निर्माण

दक्षिणेश्वर काली मंदिर के तर्ज पर बने शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर का निर्माण जगदम्बा देवी द्वारा करवाया गया था। जगदम्बा देवी दक्षिणेश्वर काली मंदिर का निर्माण करवाने वाली जमींदार परिवार की बहू रानी रासमणी की छोटी बेटी थी। लगभग 55 बीघा में फैले इस मंदिर का निर्माण गंगा घाट (जिसे स्थानीय लोग रानी रासमणी घाट के नाम से जानते हैं) के ठीक सामने किया गया था।

Shiv-Shakti Annapurna Temple

मंदिर का निर्माण कार्य लगभग 1870 ई. में शुरू किया गया था। 12 अप्रैल 1875 को मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ और यहां मां अन्नपूर्णा की अष्टधातु और चांदी से बने भगवान शिव की मूर्ति स्थापित की गयी। यानी इस मंदिर की स्थापना दक्षिणेश्वर मंदिर निर्माण के लगभग 20 सालों बाद किया गया। मंदिर में भगवान की मूर्ति की स्थापना दक्षिणेश्वर मंदिर के प्रधान पुजारी व देवी काली के प्रसिद्ध भक्त रामकृष्ण परमहंस देव ने स्वयं की थी।

दक्षिणेश्वर मंदिर के तर्ज पर हुआ निर्माण

शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर का निर्माण दक्षिणेश्वर के काली मंदिर के तर्ज पर ही किया गया है। ना सिर्फ मुख्य मंदिर का प्रारुप बल्कि अन्नपूर्णा मंदिर में भी कतारबद्ध तरीके से 6 शिव मंदिर हैं, जैसा दक्षिणेश्वर काली मंदिर में कतारबद्ध तरीके से 12 शिव मंदिर हैं। इसके अलावा दक्षिणेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार की तरह अन्नपूर्णा मंदिर के मुख्य द्वार के ऊपर भी एक शेर की आकृति बनायी गयी है।

annapurna & shiva

हालांकि तत्कालिन अंग्रेजी सरकार ने अंग्रेजी हुकुमत के राजकीय निशान शेर को हिंदू मंदिर में स्थापित करने का विरोध करते हुए अंग्रेजी अदालत में केस भी दायर किया था। लेकिन जगदम्बा देवी और मंदिर प्रशासन ने अपनी दलीलों से यह केस जीत लिया था। जिस तरह दक्षिणेश्वर मंदिर का निर्माण गंगा नदी के किनारे किया गया है, उसी प्रकार अन्नपूर्णा मंदिर के किनारे भी गंगा का रानी रासमणी घाट बनाया गया है।

मंदिर स्थापना का स्थान

कहा जाता है कि अन्नपूर्णा देवी का मंदिर बनाने के लिए पहले गंगा के ठीक उस पार स्थित श्रीरामपुर शहर को चुना गया था लेकिन बाद में कोलकाता महानगर से सटे बैरकपुर के पास स्थित टीटागढ़ में इस मंदिर का निर्माण करवाने का फैसला लिया गया। श्रीरामकृष्ण परमहंस देव ना सिर्फ इस मंदिर की स्थापना के समय बल्कि जमीन का चुनाव करते समय भी मौके पर स्वयं उपस्थित थे।

Shiva Temple

इस मंदिर के पास ही उनकी साधना के लिए अलग कमरा भी बनवाया गया था जैसा दक्षिणेश्वर मंदिर परिसर में बनाया गया है। मंदिर में आप चाहे तो फोटोग्राफी कर सकते हैं लेकिन मंदिर के गर्भगृह में स्थापित देवी मां का फोटो लेना वर्जित है। सुबह के समय मंदिर 5 बजे खुलता है और भगवान को भोग चढ़ाने के बाद दोपहर 1.30 बजे बंद कर दिया जाता है। इसके बाद दर्शनार्थियों के लिए मंदिर को फिर शाम को 4 बजे खोला जाता है जिसे रात को 8 बजे बंद कर दिया जाता है।

कैसे पहुंचे शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर

शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर बैरकपुर ट्रंक रोड से पक्की सड़क से जुड़ा हुआ है। अगर आप ट्रेन से आते हैं तो आपको सियालदह-बैरकपुर रेलखंड पर सियालदह या दमदम जं. से ट्रेन लेनी होगी। इस मंदिर का सबसे नजदीकी स्टेशन बैरकपुर है। बैरकपुर स्टेशन से आपको शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर के लिए ई-रिक्शा या ऑटो आसानी से मिल जाएगी।

Main gate of temple

अगर आप बस से आना चाहते हैं तो कोलकाता के श्यामबाजार 5 प्वाएंट से आपको बैरकपुर के लिए बस लेनी होगी जो आपको गांधी घाट मोड़ के पास उतारेगी। यहां से करीब 100-150 मीटर की दूरी आपको पैदल जाने पर मंदिर मिल जाएगा। इसके अलावा कोलकाता से आप सीधे प्राइवेट गाड़ी या कैब-टैक्सी से भी मंदिर पहुंच सकते हैं।

FAQs
शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर की स्थापना किसने की?

शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर की स्थापना दक्षिणेश्वर काली मंदिर के प्रधान पुजारी रामकृष्ण परमहंस देव ने की थी। वह मां काली के भक्त थे। कहा जाता है कि रामकृष्ण देव को मां काली एक छोटी बालिका के स्वरुप में दर्शन देती थी।

अन्नपूर्णा मंदिर कैसे पहुंचे?

बैरकपुर और कोलकाता के बीच स्थित अन्नपूर्णा मंदिर सड़क मार्ग से सीधा जुड़ा हुआ है। ट्रेन से जाने पर नजदीकी स्टेशन बैरकपुर है, जहां से मंदिर तक के लिए आपको ई-रिक्शा मिल जाएगा। बस या टैक्सी से जाने पर आपको कोलकाता से सीधी बस और टैक्सी मिल जाएगी।

अन्नपूर्णा मंदिर, बैरकपुर का निर्माण किसने करवाया था?

बैरकपुर स्थित शिव-शक्ति अन्नपूर्णा मंदिर का निर्माण जमींदार परिवार की छोटी बेटी जगदम्बा देवी ने करवाया था। हालांकि मंदिर निर्माण के लिए जमीन का चुनाव उनके पति मथुर मोहन विश्वास ने ही किया था। जगदम्बा देवी रानी रासमणी की छोटी बेटी थी, जिन्होंने दक्षिणेश्वर काली मंदिर का निर्माण करवाया था।

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