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अलविदा! जल्द कोलकाता की सड़कों से गायब होने वाली है पीली टैक्सी, जानिए कब से? खत्म होने वाला है एक युग

पहले ट्राम और अब पीली टैक्सी...कोलकाता की दो प्रमुख पहचान सड़कों से होने वाली है गायब। जी हां, कोलकाता की सड़कों से जल्द गायब होने वाली है पीली टैक्सी (Yellow Taxi)। मीडिया रिपोर्ट में किये गये दावों को सच माने तो जल्द ही लगभग 4500 पीली टैक्सियों की सेवाओं को कोलकाता में बंद कर दिया जाएगा। यह कदम निश्चित रूप से महानगर में परिवहन सेवा को प्रभावित करने वाला है।

हावड़ा ब्रिज, विक्टोरिया मेमोरियल और पार्क स्ट्रीट की तरह ही पीली टैक्सियां कोलकाता की पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी थी। लेकिन अब जल्द ही इन टैक्सियों को अलविदा कहने का वक्त आने वाला है।

kolkata yellow taxi

कोलकाता में 15 साल से अधिक पुरानी गाड़ियों को चलाने पर साल 2008 से कलकत्ता हाईकोर्ट ने पाबंदी लगा रखी थी। मिली जानकारी के अनुसार साल 2024 के शुरुआत में कोलकाता की सड़कों पर करीब 7000 मीटर वाली पीली टैक्सियां चला करती थी। इनमें से 64% वाहन यानी 4,493 टैक्सियों के 15 साल से अधिक पुराने हो जाने की वजह से सड़कों से हटा दिया गया था।

बाकी बची पीली टैक्सियों में लगभग 2500 टैक्सियां, जो मुख्य रूप से पुरानी D और E श्रृंखला की एम्बेस्डर गाड़ियां हैं, उन्हें भी अगले साल तक हटा दिया जाएगा। ऐसा करने के बाद पीली टैक्सियों की कुल संख्या पूरे शहर में घटकर 3000 से भी कम रह जाएगी। इस बात की पुष्टि टैक्सी ऑपरेटर्स ने की है।

क्या है इसका इतिहास?

किसी जमाने में कोलकाता की सड़कों पर मुंबई की तरह ही काली पीली टैक्सियां राज किया करती थी। यह साल 2015 में लॉन्च हुई कैब से भी पहले का जमाना हुआ करता था। साल 1962 में कलकत्ता टैक्सी एसोसिएशन ने सबसे पहले इस तरह की टैक्सियों को लॉन्च किया था। लॉन्च होने के तुरंत बाद ही टैक्सियां कोलकाता में लोकप्रिय हो गयी। इन्हें 'सड़कों का राजा' कहा जाता है।

बाद में इन्हें एक नयी पहचान के लिए लॉन्च किया गया और रंग मिला सिर्फ पीला। साल 2020 में कोविड-युग से पहले हुए एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ था कि कोलकाता में टैक्सियों की संख्या घटकर 18000 पर पहुंच गयी। टैक्सियों की संख्या घटने की मुख्य वजह गाड़ियों का पुराना होना था। पुरानी टैक्सियों को अपडेट करने का खर्चा काफी ज्यादा होता था, जिस वजह से इन गाड़ियों को बंद कर दिया जाता है।

yellow taxi kolkata

मीडिया से बात करते हुए बंगाल टैक्सी एसोसिएशन के संयुक्त सचिव संजीव रॉय का कहना है कि डिफॉल्ट दर ज्यादा होने के कारण कैब चालकों के लिए कर्ज लेना काफी कठिन हो जाता है, जिससे वे अपना काम जारी नहीं रख पाते। 1908 में कोलकाता में शुरू हुआ टैक्सी उद्योग, तब 8 आना प्रति मील की दर से आगे बढ़ता था लेकिन अब इसका भविष्य अंधकारमय ही दिखाई दे रहा है।

अगर नयी पीली टैक्सियों को लॉन्च नहीं किया गया तो संभव है कि इस साल के अंत तक कोलकाता की सड़कों पीली टैक्सियां पूरी तरह से गायब ही हो जाएंगी। भले ही कैब की उपस्थिति से मध्यम वर्गीय या शहरी लोगों को अधिक समस्या न हो लेकिन सड़कों से पीली टैक्सियों के गायब होने का सबसे बड़ा असर टैक्सी चालकों के हजारों परिवारों और उन लोगों पर पड़ेगा जो ग्रामीण इलाकों से कोलकाता आते है।

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