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अमरकंटक में है ऋषि दुर्वासा का आश्रम, पास में ही नर्मदा व सोन नदी का उद्गम स्थल

मध्य प्रदेश की हरि-भरी वादियों में स्थित अमरकंटक में घूमने लायक कई स्थान है। इनमें सबसे प्रसिद्ध ऋषि दुर्वासा का आश्रम, नर्मदा व सोन नदी का उद्गम स्थल, श्री यंत्र मंदिर, कपिल धारा जैसी जगहें शामिल है।

मध्य प्रदेश ने जितना इतिहास अपने अंदर समेटा हुआ है, उतनी ही पौराणिक कथाएं और धार्मिकता भी इस प्रदेश से जुड़ी हुई है और इसका मुख्य कारण है मध्य भारत में इसका होना। प्राकृतिक विरासत की बात की जाए या ऐतिहासिक धरोहरों की, आपको यहां सब कुछ देखने को मिल जाएगा। एमपी एक ऐसा राज्य है, जहां आपको ये सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि घूमने कहां जाएं?

आज हम बात करेंगे मध्य प्रदेश के उस खूबसूरत हिल स्टेशन के बारे में जिसके बारे में सुनते ही आप शायद अपना बैग पैक कर लें। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा कौन सा हिल स्टेशन या पर्यटन स्थल है, जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं। हम अमरकंटक की बात कर रहे हैं, जो मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले का एक खूबसूरत सा स्थान है। इस स्थान पर जितना प्राकृतिक खूबसूरती आपको देखने को मिलेगी, उतनी ही पौराणिक कथाएं भी यहां से जुड़ी हुई है। यहां के जंगलों में आपको कई औषधिय वनस्पतियां भी देखने को मिलेगी।

नर्मदा और सोन नदी का उद्गम स्थल

इस खूबसूरत स्थान से तीन नदियों का उद्गम होता है, जिसे आप यहां आने के बाद देख सकते हैं। इन नदियों के नाम है- नर्मदा नदी, सोन नदी और जोहिला नदी। ऐसे में अगर नर्मदा नदी के बारे में बात की जाए तो नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की सबसे पवित्र नदियों में से एक और सबसे बड़ी नदी है। नर्मदा उद्गम स्थल पर ही नर्मदा मंदिर है, जो काफी प्रसिद्ध मंदिर और हिंदू तीर्थस्थल है। उद्गम कुण्ड के चारों तरफ कई मंदिरों का समूह है। यहां पास में ही सोनमुडा पहाड़ी है, जहां सोन नदी का उद्गम स्थल है। इस स्थान सैलानियों की काफी आवाजाही होती है। इसके अलावा इस स्थान पर मैकाल, विंध्या और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं का मिलन स्थल भी है।

narmada temple

कपिल धारा

पहाड़ी व जंगली रास्तों से होकर नर्मदा नदी जब आगे बढ़ती है तो यहां आने वाले पर्यटकों को आने अपना खूबसूरत व सौम्य रूप कपिलधारा में दिखाती है, जो किसी भी पर्यटक को मन मोहने के लिए काफी है। ये स्थान नर्मदा नदी के उद्गम स्थल से 5 किमी. की दूरी पर स्थित है, जहां नर्मदा नदी अपना विशाल रूप धारण करती हुई नीचे की ओर गिरती है, ये खूबसूरत दृश्य देखने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं।

दुग्ध धारा

कपिल धारा से 200 मीटर की दूरी पर स्थित दुग्ध धारा भी बेहद शानदार जगहों में से एक है। मां नर्मदा जब कपिल धारा से आगे बढ़ती है तो एक सफेद चमकदार झरने के रूप में नीचे गिरती हैं, इसी स्थान को दुग्ध धारा के नाम से जाना जाता है। इसी स्थान पर दो पवित्र गुफाएं है, जिनमें माता नर्मदा और महादेव का मंदिर है, यहां भी भक्त काफी संख्या में हर साल पहुंचते हैं।

ऋषि दुर्वासा का आश्रम

अपने क्रोधी स्वभाव के लिए प्रसिद्ध ऋषि दुर्वासा का आश्रम भी अमरकंटक में ही स्थित है। इस स्थान पर एक गुफा भी है, जिसे ऋषि की तपोस्थली भी कही जाती है। इस गुफा को लेकर कहा जाता है कि इसी गुफा में उन्होंने तप की थी। ये पवित्र स्थान कपिलधारा के पास में ही स्थित है। गुफा में अंदर जाने पर एक शिवलिंग भी आपको दिखेगा, जिस पर हमेशा जल की बूंदे गिरती रहती हैं और महादेव का अभिषेक करती रहती हैं। अगर आप इस गुफा में प्रवेश करेंगे तो आपको संसार से परे एक शांति मिलेगी, जो न सिर्फ संसारिक शांति है बल्कि आध्यात्मिक शांति भी है।

amarkantak

श्री यंत्र मंदिर

सोनमुडा रास्ते से होते हुए जब आप आगे बढ़ेंगे तो आपको एक मंदिर दिखाई देगा, जो श्री यंत्र के आकार में बना हुआ है। इस मंदिर श्री यंत्र मंदिर है। इस भव्य मंदिर का निर्माण साल 1991 ईस्वी में शुरू किया गया है, जो आज तक निर्माणाधीन है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण गुरु पुष्य नक्षत्र में ही किया जाता है, क्योंकि इस समय को मंदिर निर्माण के लिए काफी शुभ माना जाता है। प्राचीन काल में मंदिर निर्माण में जिस तरीके का इस्तेमाल किया जाता था, उसी तरीके से इस मंदिर को बनाया जा रहा है।

सर्वोदय जैन मंदिर

यह मंदिर अपनी ऊंचाई के लिए खासा प्रसिद्ध है, जो करीब 151 फीट के आसपास है। सर्वोदय जैन मंदिर को बिना लोहे और सीमेंट की मदद से बनाया जा रहा है। इस मंदिर के मुख्य भगवान श्री आदिनाथ की 24 टन वजन बाली मूर्ती को 17 टन बजनी अष्टधातु की बनी आधार पर स्थापित किया गया है, जो इस मंदिर को और भी खास बनाती है। इस मंदिर का निर्माण साल 2006 में शुरू किया गया था।

इसके अलावा भी यहां घूमने के लिए कई स्थान है, जहां पर्यटक घूमने के लिए जा सकते हैं। धार्मिक स्थान के साथ-साथ इस प्राकृतिक स्थान पर अब भला कौन नहीं जाना चाहेगा। पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देनी वाली इस पवित्र स्थान पर आने का सबसे अच्छा समय जून से लेकर नवम्बर तक का है। क्योंकि, इन महीनों में इस स्थान की सुंदरता काफी बढ़ जाती है। आसपास का हरा-भरा मौसम और चारों तरफ नदियों की कल-कल की आवाज बेहद आकर्षित करती है।

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