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फूल नहीं कांटों से था रतलाम के इस राजा को लगाव, बना डाला 'कैक्टस गार्डन'

गुलाब हो या फिर बबूल, भले ही कितने भी जरूरी क्यों न हो लेकिन लोगों को कांटों के मुकाबले फूलों से ही अधिक लगाव होता है। लेकिन क्या आपने किसी ऐसे राजा के बारे में सुना है जिसे कांटों से इतना लगाव था कि उसने कांटों का एक बागिचा ही बना डाला। कांटों का यह बागिचा मध्य प्रदेश के रतलाम में है, जिसे 'कैक्टस गार्डन' कहा जाता है।

इस कैक्टस गार्डन को रतलाम के महाराजा दिग्विजय सिंह ने बनवाया था। लेकिन अचानक किसी को कांटों से इतना प्यार कैसे हो सकता है कि उसने पूरा का पूरा एक कांटों का बागिचा ही बनवा डाला?

cactus garden

कहां है कैक्टस गार्डन

कैक्टस गार्डन मध्य प्रदेश रतलाम से लगभग 22 किमी दूर सैलाना में स्थित है। माना जाता है कि कैक्टस का यह गार्डन एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन है। इस गार्डन में कितनी प्रजातियों के कैक्टस लगे हुए हैं, इस बारे में किसी के पास सटिक जानकारी नहीं है।

लेकिन यहां जितनी अधिक संख्या में कैक्टस के विभिन्न प्रजातियों के पौधे देखे जा सकते हैं, उतना एशिया में और कहीं नहीं मिलते हैं। रतलाम के सेव और साड़ियों की एक अलग ही पहचान होती है लेकिन उनके बीच कांटों की यह दुनिया भी पर्यटकों को कम आकर्षित नहीं करती है।

sacculant cactus

क्यों आया कांटों का बागिचा बनाने का ख्याल

दुनिया में इतनी तरह के फूल, पत्तियों और फलों के पेड़ होने के बावजूद महाराजा दिग्विजय सिंह को कांटों का बागिचा खिलाने की क्यों जरूरत पड़ गयी? दरअसल, 1958 में महाराजा दिग्विजय सिंह जर्मनी की यात्रा पर गये थे। वहां उन्होंने कैक्टस की इतनी प्रजातियां देखी कि वह उनके दिवाने हो गये।

इसके बाद ही उन्होंने रतलाम के पास सैलाना में कैक्टस का बागिचा तैयार करने का फैसला ले लिया। इस गार्डन में 1200 से अधिक प्रजाति के कैक्टस मौजूद हैं, जिनमें कई देसी प्रजाति के कैक्टस भी शामिल हैं। वनस्पति विज्ञान के विभिन्न संस्थाओं से छात्र और वैज्ञानिक यहां शोध के लिए पहुंचते हैं। कई कैक्टस में औषधिय गुण भी मौजूद हैं।

ratlam cactus garden

सिर्फ पौधे ही नहीं मिट्टी भी आयी थी विदेशों से

महाराजा दिग्विजय सिंह ने अपने कैक्टस गार्डन के लिए दुनियाभर से कैक्टस के पौधे मंगवाये थे, जिनमें जर्मनी, अरब, टेक्सास, मैक्सिको, अमेरिका और चिली भी शामिल हैं। विदेशों से मंगाये गये कैक्टस के पौधे कहीं भारतीय मिट्टी में जिंदा नहीं रह पाएं। इसलिए मृदा विशेषज्ञों की सलाह से दिग्विजय सिंह ने उन सभी देशों की मिट्टियां भी मंगवायी थी, जहां से कैक्टस लाया गया था। यह कैक्टस गार्डन दिग्विज सिंह के जसवंत निवास पैलेस में लगाया गया है।

cactus madhya pradesh garden

कैसे पहुंचे कैक्टस गार्डन

कैक्टस गार्डन रतलाम से 22 किमी दूर सैलान में जसवंत निवास में मौजूद है। रतलाम जंक्शन पर उतरकर जसवंत निवास तक के लिए गाड़ियां बड़ी आसानी से मिल जाएंगी। यह गार्डन रतलाम-सैलान के प्राइम लोकेशन पर और एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। इसलिए यहां पहुंचने में अधिक परेशानी नहीं होती है। कैक्टस गार्डन का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर एयरपोर्ट है।

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