कभी सुना है भूतों का मेला। जी हां, किसी के बाल खींचकर तो किसी को झाड़ू मारकर...मध्य प्रदेश में लगने वाले भूतों के मेले में ऐसे ही होता है सबका इलाज। आज हम 21वीं सदी में जरूर जी रहे हैं। भारत चांद पर पहुंच चुका है...दुनिया भले ही हर क्षेत्र में भारत का लोहा मान रही है। लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां आज भी लोग अपने विश्वासों (अंधविश्वासों) के आधार पर ही जीते हैं।

ऐसा ही एक गांव है मध्य प्रदेश का मलाजपुर। यहां पूरे साल यूं तो कुछ खास हलचल नहीं होती है लेकिन माघ पूर्णिमा से लेकर अगले 1 महीने तक यह गांव सक्रिय हो उठता है।
क्या है भूतों का मेला
मलाजपुर में भूतों का जो मेला लगता है, वहां कोई भूत नहीं आता है बल्कि मान्यता है कि जिन लोगों पर भूतों का साया होता है, उन्हें ठीक किया जाता है। यह मेला मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में चिचोली ब्लॉक के मलाजपुर गांव में लगता है। हर साल इस मेले की शुरुआत माघ पूर्णिमा से होती है।
इस साल भी यह मेला 25 जनवरी से शुरू हो गया है जो अगले 1 महीने तक चलेगा। जानकारी के अनुसार पिछले 400 से अधिक सालों से इस मेले का आयोजन यहां किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में प्रेत बाधा से पीड़ित, निःसंतान दंपत्ती और सर्पदंश का इलाज करवाने मरीज आते हैं।
कैसे होता है इलाज
किसी के बाल खींचकर तो किसी को झाड़ू मारकर, किसी को डंडे से पीटकर तो किसी के सामने मंत्र फूंका धुंआ देकर भूतों के मेले में इलाज होता है। इस मेले में इलाज की जो पद्धतियां अपनायी जाती हैं, उन्हें निश्चित रूप से आज के समय में अंधविश्वास ही माना जाता है। लेकिन 'गुरु साहब देव जी महाराज' के भक्तों और उनपर विश्वास करने वालों का मानना है कि मरीज उनकी कृपा से ही ठीक होते हैं।

इलाज करवाने यहां आने वाले मरीजों को पहले गुरु साहब की समाधि की परिक्रमा करवायी जाती है और उनकी समाधि के सामने ले जाकर खड़ा किया जाता है। कहा जाता है कि इसके बाद मरीजों के शरीर में हलचल होने लगती है। यहां बैठी पुजारी महिलाएं मरीजों के बाल खींचकर उनसे पूछती हैं कि कौन सी बाधा है और गुरु साहब का जयकारा लगाती हैं। कई बार इलाज के मरीजों को झाड़ू से भी मारा जाता है जिसमें उन्हें चोट भी लग जाती है।
इसके बाद मरीजों को चरणामृत दिया जाता है और प्रसाद के रूप में भभूत दी जाती है। यहां इलाज करवाने आने वाले लोगों का विश्वास है कि ऐसा करने से सभी प्रेत बाधाएं दूर और सभी बीमारी ठीक हो जाती है।
कौन हैं गुरु साहब
स्थानीय लोगों का कहना है कि 18वीं सदी के साधु जिनका नाम देवजी महाराज था, एक बार इस गांव में आएं थे। उनके पास कुछ शक्तियां थी। कहा जाता है कि वह अपनी शक्ति के बल पर मिट्टी को गुड़ और पत्थरों को नारियल में बदल दिया करते थे। बाद में देवजी महाराज ने अपनी शक्तियों के बल पर बुरी शक्तियों पर काबू करना शुरू कर दिया।
वह दूसरों को इन बुरी शक्तियों से बचने में मदद भी पहुंचाने लगे। इसके बाद ग्रामीणों ने यहां उनका एक मंदिर बनवा दिया। इस मंदिर के पुजारी आज भी देवजी ही कहलाते हैं, जो खुद को गुरु साहब देवजी महाराज के वंश का होने का दावा करते हैं। यहीं पुजारी लोगों को बुरी आत्माओं से मुक्त करवाने का दावा करते हैं।

हर साल मध्य प्रदेश के मलाजपुर में लगने वाले इस भूतों के मेले में सिर्फ कुछ दिलेर ही जाने की हिम्मत कर सकते हैं। मेले में भूतों से मुक्ति दिलवाने के लिए महिलाओं व पुरुष मरीजों को बाल पकड़कर खींचना और उन्हें बुरी तरीके से झाड़ू से पीटना आम बात है। लेकिन यह पूरी प्रक्रिया कई बार इतनी हिंसात्मक हो जाती है कि किसी भी स्वस्थ व्यक्ति का इसे चुपचाप खड़े होकर देखना संभव नहीं होता है।
कई बार मानसिक रूप से बीमार मरीजों का इलाज भी इसी तरीके से किया जाता है और यहां इन मरीजों को लेकर आने वाले उनके परिजनों का विश्वास (अंधविश्वास) है कि ऐसा करने से उनका मरीज बिल्कुल ठीक हो जाता है। यहां रहने वाले लोगों के लिए ये दृश्य सामान्य ही होते हैं लेकिन यहां बाहर से आने वाले लोग जब पहली बार इन दृश्यों को देखते हैं तो उनकी रुह तक कांप उठती है।
कुछ लोगों का दावा है कि मलाजपुर में भूतों के मेले में आने के बाद वो पूरी तरह से ठीक हो गये हैं लेकिन विज्ञान इसे असंभव मानता है। विज्ञान के अनुसार किसी भी मानसिक रोग या किसी भी बीमारी का इलाज झाड़ू से पीटकर करना संभव नहीं है।



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