भारत में द्वादश ज्योतिर्लिंग के अलावा महादेव के हजारों मंदिर हैं, जिनके साथ कोई न कोई विचित्र घटना घटती है। कहीं शिवलिंग स्वयंभू होता है तो कहीं शिवलिंग धीरे-धीरे आकार में बढ़ता जाता है। कुछ मंदिरों की स्थापना रामायण या महाभारत काल में हुई बतायी जाती है तो कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जिनका इतिहास किसी को पता नहीं है।
लेकिन आज हम जिस मंदिर के बारे में बात कर रहे हैं वह मंदिर सालभर बंद रहता है। आमतौर पर कहा जाता है कि जब भी मंदिर में भगवान की मूर्ति खंडित हो जाती है तो उस मंदिर को बंद कर दिया जाता है। लेकिन इस मंदिर में ऐसा कुछ भी नहीं है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित सोमेश्वर महादेव के दर्शन के लिए भक्तों को साल भर इंतजार करना पड़ता है।

मध्य प्रदेश के रायसेन दुर्ग में स्थित है सोमेश्वर महादेव का मंदिर। साल भर इस मंदिर के दरवाजे बंद रहते हैं। भक्त बाहर से भगवान के सामने अपना माथा टेककर वापस लौट जाते हैं। साल में सिर्फ एक दिन महाशिवरात्रि के दिन सोमेश्वर महादेव मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इस साल मंदिर के कपाट 8 मार्च को खुलेंगे। इस भक्त मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर महादेव का दर्शन और पूजा करते हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 12वीं सदी में किया गया था।
क्यों सालभर बंद रहते हैं कपाट
मिली जानकारी के अनुसार मुगल शासकों के साथ रायसेन किले को लेकर जब विवाद चल रहा था, तब इस मंदिर के दरवाजों को भी बंद कर दिया गया था। ऐसा साल 1974 तक रहा। इसके बाद शिवभक्तों ने मंदिर के दरवाजे खोलने के लिए मुहिम छेड़ी। जिसका नतीजा हुआ कि हर साल केवल महाशिवरात्रि के दिन मंदिर के कपाट खोले जाने लगे।

बताया जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इस समय के दौरान भक्तों की भीड़ मंदिर में उमड़ती है। वे भगवान का दर्शन और पूजा करते हैं। दोपहर 12 बजे के बाद फिर से मंदिर के कपाट को अगले 1 साल के लिए बंद कर दिया जाता है।
जिस समय मंदिर के कपाट बंद रहते हैं, भक्त उस समय मंदिर के बाहर से भगवान को प्रणाम कर अपनी मनोकामना का कपड़ा मंदिर के बाहर बांधकर चले जाते हैं।



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