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भारत का सबसे प्रसिद्ध लक्ष्मी मंदिर जहां हर भक्त की मनोकामना होती है पूरी

दीवाली का त्योहार आने वाला है। दीवाली के दिन सभी लोग माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के मंदिरों में दर्शन करने के लिए जाते हैं। लगभग देश के सभी राज्यों में माता के मंदिर मिल जाएंगे, लेकिन आज हम आपको माता लक्ष्मी के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो देश का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में एक अलग ही रहस्य छुपा हुआ है, जिसे देख तो सभी पाते हैं लेकिन इसके बारे में आज तक कोई समझ नहीं पाया। इस मंदिर में विराजित माता की प्रतिमा भी काफी अनोखी है।

बेहद आकर्षक है महालक्ष्मी मंदिर

बेहद आकर्षक है महालक्ष्मी मंदिर

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित माता लक्ष्मी का मंदिर महालक्ष्मी मंदिर के नाम से जाना जाता है, देश के सबसे प्रमुख व प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि साल में दो बार सूर्य की किरणें मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर सीधी पड़ती है। मंदिर की दीवार आपको एक श्रीयंत्र भी बना हुआ दिखाई देगा, जो पत्थर की कटाई कर बनाया गया है। मंदिर के पश्चिमी दीवार एक खिड़की है, इसी खिड़की से सूर्य की किरणें मंदिर में प्रवेश करती है।

हीरे-जवारातों से जड़ित है मां का मुकुट

हीरे-जवारातों से जड़ित है मां का मुकुट

माता की प्रतिमा पर सजा हुआ मुकुट बेहद आकर्षक है। 40 किलो. के इस मुकुट में हीरे-जवारात जड़े हुए है। माता के चार हाथ है, जिसमें दाहिने ओर नीचे वाले हाथ में निम्बू फल व ऊपर वाले हाथ में गदा और दाहिनी ओर के नीचे वाले हाथ में पानपात्र व ऊपरी हाथ में एक ढाल सुसोभित होता है। काले पत्थर से बने माता की यह प्रतिमा काफी सुसोभित नजर आती है।

सबकी मुरादें पूरी करती हैं मां लक्ष्मी

सबकी मुरादें पूरी करती हैं मां लक्ष्मी

अधिकांश तौर पर देखा जाता है कि मंदिरों में विराजित देवी-देवता का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होता है लेकिन इस मंदिर में माता लक्ष्मी का मुख पश्चिम दिशा की ओर है, जो अपने आप में अनोखा है। कहा जाता है कि इस मंदिर में जो भी अपनी इच्छा लेकर आता है और माता से सच्चे मन से मांगता है, माता उसे अवश्य पूरा करती हैं। मंदिर में माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु भी विराजित है। इसे अम्बा माता के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

करीब 1300 साल पुराना है मंदिर

करीब 1300 साल पुराना है मंदिर

दीवाली के खास पर्व पर इस मंदिर में खास तरीके से सजावट की जाती है। बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में चालुक्य वंश के राजा कर्णदेव ने कराया था। तब मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हो सका था, जिसे 9वीं शताब्दी में पूरा किया गया। 27 हजार वर्ग फीट में फैला यह मंदिर करीब 45 फीट ऊंचा है। मंदिर में स्थापित माता की प्रतिमा करीब 4 फीट ऊंची है, जो करीब 7000 साल पुरानी बताई जाती है। माता की मूर्ति को लेकर एक किवदंती है कि माता की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी।

मंदिर में दर्शन करने का सही समय - सुबह 4:00 बजे से लेकर रात 10:30 बजे तक

महालक्ष्मी मंदिर कैसे पहुंचें

महालक्ष्मी मंदिर कैसे पहुंचें

महालक्ष्मी मंदिर जाने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट कोल्हापुर में ही स्थित है। वहीं, मंदिर तक पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन भी कोल्हापुर में ही स्थित है। इसके अलावा आप सड़क मार्ग से भी माता के मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

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