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महाराष्ट्र का नानेघाट रिवर्स वाटरफॉल झुठलाता है गुरुत्वाकर्षण के नियम, नजारा देख चकरा जाते हैं लोग

बचपन में हम सबने विज्ञान की पढ़ाई करते समय सेब के बागिचे में बैठे न्यूटन की कहानी जरूर सुनी है, जिसमें पेड़ से नीचे बैठे आइजैक न्यूटन के सिर पर जब सेब टूटकर गिरता है तो उन्होंने गुरुत्वाकर्षण की खोज कर दी। इसके बाद ही पूरी दुनिया को यह पता चल पाया कि पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति होती है, जो चीजों को नीचे के ओर खींचती है।

वहीं हिंदी का एक मुहावरा 'उल्टी धारा का बहना' भी जरूर सुना है। लेकिन क्या आपने असली में धारा को गुरुत्वाकर्ष के नियमों को तोड़ते हुए उल्टी दिशा में बहते हुए कभी देखा है? ऐसा ही होता है महाराष्ट्र के रिवर्स वाटरफॉल पर...जहां झरने का पानी ऊपर से नीचे की ओर न बहकर नीचे से ऊपर की ओर बहता है।

naneghat reverse waterfall

क्या है यहां अजीब?

जब भी कोई चीज कहीं भी फेंकी जाती है तो गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से वह नीचे जाकर गिरती है। किसी भी आम झरने या पहाड़ी से गिरते पानी के साथ भी यहीं होता है। लेकिन महाराष्ट्र के नानेघाट में स्थित रिवर्स वाटरफॉल इन नियमों के विपरित ही बहता है। पहाड़ी की ऊंचाई से गिरता पानी नीचे की ओर न आकर ऊपर की तरफ जाता है। मानसून के समय जब झरने की तीव्रता बढ़ जाती है, तब यह और भी अधिक स्पष्ट नजर आने लगता है। पर ऐसा होता क्यों है?

लोग हो जाते हैं हैरान

नानेघाट रिवर्स वाटरफॉल महाराष्ट्र का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां बड़ी संख्या में लोग घूमने आते हैं। यहां घूमने आने वाले लोग नीचे से ऊपर की ओर बहते झरने को देखकर अचंभित हो जाते हैं। पर ऐसा क्यों होता है कि गुरुत्वाकर्षण के नियमों को तोड़ता हुआ यह झरना उल्टी दिशा में बहता है?

जानकार इसके लिए हवा की गति को जिम्मेदार ठहराते हैं। दरअसल, नानेघाट में जिस जगह पर रिवर्स वाटरफॉल है, वहां हवा काफी तेज बहती है। तेज गति से बहती हवा ही वाटरफॉल के पानी को नीचे की ओर नहीं आने देती और पानी को ऊपर की तरफ ढकेलती रहती है।

reverse waterfall maharashtra

कहां है नानेघाट?

नानेघाट महाराष्ट्र के कोंकण समुद्रतट और जुन्नर नगर के बीच पुणे से लगभग 150 की दूरी पर मौजूद है। इस जगह को कुछ लोग नानेघाट तो कुछ नानाघाट के नाम से भी जानते हैं। इतिहासकारों का मानना है कि नानेघाट नगर की स्थापना सातवाहन वंश ने की थी, क्योंकि नानेघाट की गुफा में ब्राह्मी और संस्कृत भाषा में शिलालेख पाए गये थे। नानेघाट में ही मौजूद है रिवर्स वाटरफॉल, जो किसी अजूबे से कम नहीं है। मानसून के समय इसे देखने और यहां घूमने आने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा होती है। इसके अलावा यह ट्रेकिंग के लिए भी पर्यटकों का पसंदीदा जगह माना जाता है।

naneghat waterfall reverse monsoon

कैसे पहुंचे नानेघाट

नानेघाट की मुंबई से दूरी करीब 120 किमी की है। नानेघाट घाटघर के जंगल का हिस्सा है। नानेघाट ट्रेक की लंबाई करीब 4-5 किमी (एक तरफ) है। इसकी ट्रेकिंग का स्तर कठिन से मध्यम है। ट्रेकिंग को पूरा करने में लगभग 5 घंटे का समय लग जाता है। मुंबई से नानेघाट पहुंचने के लिए कल्याण बस स्टैड से जुन्नार के लिए बस पकड़ लें। इसके अलावा मुंबई, पुणे आदि से नानेघाट तक के लिए किराए पर गाड़ियां भी ले सकते हैं। कई ट्रेकिंग समूह भी मानसून के समय यहां ट्रेकिंग ट्रिप्स का आयोजन करते हैं, जिन्हें आप ऑनलाइन आसानी से ढूंढ सकते हैं।

नोट : अगर आप नानेघाट रिवर्स वाटरफॉल घूमने जा रहे हैं तो अपने साथ रेनकवर या रेनकोट लेकर जरूर जाएं।

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