बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' का वह रोमांटिक सीन याद है जिसमें अपने डॉन पिता और थंगबली से बचकर राहुल मिठाईवाला (शाहरुख खान) के साथ मीनम्मा (दीपिका पादुकोण) भाग जाती है। दोनों केरल के एक छोटे से गांव में शादीशुदा जोड़ा बनकर छिपते हैं। अगले दिन सुबह राहुल और मीनम्मा को गांव का एक रिवाज पूरा करना होता है, जिसमें राहुल को अपनी बीवी मीनम्मा को गोद में उठाकर मंदिर की 300 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।

उस सीन की शूटिंग विट्ठामलाई मुरुगन मंदिर में की गयी थी। लेकिन क्या आप जानते हैं, असल में यह रिवाज इस मंदिर का है ही नहीं। बल्कि पत्नी को गोद में उठाकर मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने का रिवाज महाराष्ट्र के एक मंदिर में पूरी की जाती है।
कौन सा है वह अनोखा मंदिर

महाराष्ट्र में पुणे के पास स्थित खंडोबा मंदिर में सालों पुरानी परंपरा के अनुसार यहां आने वाला नवविवाहित जोड़ा इस रिवाज को पूरा करता है। मूल रूप से इस रिवाज में अपनी पत्नी को गोद में उठाकर पति को मंदिर की लगभग 450 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। कहा जाता है कि इससे पति-पत्नी का आपसी रिश्ता काफी मजबूत बनता है। यह मंदिर पुणे जिले के जेजुरी गांव में मौजूद है। हर साल अप्रैल से जून के बीच नवविवाहित जोड़े इस अनोखी परंपरा का पालन करने और महादेव का आर्शीवाद लेने के लिए खंडोबा मंदिर आते हैं। यहां आने वाले जोड़े खुशी-खुशी इस रिवाज को पूरा करने के लिए तैयार भी हो जाते हैं।

हालांकि समय के साथ अब इन रीति-रिवाजों में भी परिवर्तन हुआ है। अब पति अपनी पत्नी को गोद में उठाकर 450 सीढ़ियां नहीं बल्कि प्रतिकात्मक रूप से सिर्फ 5 सीढ़ियां ही चढ़ता है। लेकिन अगर कोई जोड़ा 450 सीढ़ियां चढ़ना चाहे तो भला उन्हें कोई क्यों रोकेगा...! हम बता दें, इस मंदिर में आने वाले हर नवविवाहित जोड़े को इस परंपरा का पालन करना अनिवार्य नहीं है। अगर कोई जोड़ा श्रद्धा के साथ इसे निभाना चाहे तो वह इस परंपरा को निभा सकता है।
दशहरे के समय होती है विचित्र प्रतियोगिता

पुणे के खंडोबा मंदिर में दशहरे के समय बड़ी ही विचित्र प्रतियोगिता भी आयोजित होती है। आसपास के इलाकों में यह प्रतियोगिता बड़ी प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि यह मंदिर 300 साल से भी अधिक पुराना है। दशहरे के समय खंडोबा मंदिर में दशहरा मेला का आयोजन किया जाता है, जिसमें एक विशाल सोने की तलवार को प्रदर्शनी के लिए रखा जाता है।
मेले में आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में श्रद्धालु लगभग 45 किलो वजनी इस भारी-भरकम तलवार को अपने दांतों से उठाते हैं। इस तरह भक्त खंडोबा के प्रति अपनी भक्ति को प्रदर्शित करते हैं। इस प्रतियोगिता में जो व्यक्ति सबसे अधिक समय तक इस भारी तलवार को पकड़े रह सकता है, वह प्रतियोगिता जीत जाता है।
विशाल दीपमालाएं करती हैं श्रद्धालुओं का स्वागत

लगभग 450 सीढ़ियां चढ़कर जब श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचते हैं, तो उन्हें सामने बड़े-बड़े दीप स्तंभ दिखाई देते हैं। ये स्तंभ सीढ़ियों के दोनों तरफ एक खास तरीके से बनाए हुए हैं। ये दीप स्तंभ पत्थरों को तराशकर बनाए गये हैं। खंडोबा मंदिर मुख्य द्वार के ठीक सामने पीतल का एक विशाल वृत्ताकार कछुआ फर्श पर बनाया हुआ है।
एक नजर डालने पर यह कछुआ पीतल की कोई उल्टी हुई थाली जैसा दिखाई देता है। स्थानीय लोगों की खंडोबा मंदिर के प्रति अपार श्रद्धा है। उनका मानना है कि इस मंदिर में दर्शन करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।
हल्दी का है खास महत्व

खंडोबा मंदिर में हल्दी का काफी अधिक महत्व है। हर साल यहां 'चंपा षष्ठी' के दिन मेला का आयोजन होता है। इस दिन भगवान खंडोबा और देवी महल्सा की शादी का समारोह मनाया जाता है। दोनों देवी-देवताओं को पालकी में बैठाकर मंदिर के चारो तरफ चक्कर लगाते हुए जुलूस निकाला जाता है। इस दौरान भक्त गुलाल की तरह हवा में हल्दी उड़ाते हैं और 'यल्कोट, यल्कोट, जय मल्हार' का नारा भी लगाते हैं। बता दें, यह नारा उनकी मल्ल और मणि राक्षस पर मिली विजय के लिए लगायी जाती है।
कैसे पहुंचे खंडोबा मंदिर
खंडोबा मंदिर मुंबई से लगभग 198 किमी की दूरी पर मौजूद है। जेजुरी में स्थिति खंडोबा मंदिर से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पुणे एयरपोर्ट है, जो इस मंदिर से लगभग 60 किमी दूर है। यहां से टैक्सी या स्थानीय गाड़ियां किराए पर लेकर आप मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं। खंडोबा मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जेजुरी है। जेजुरी के लिए आपको प्रमुख शहरों से ट्रेन आसानी से मिल जाएगी। स्टेशन से आप टैक्सी या लोकल गाड़ियां किराए पर लेकर मंदिर तक जा सकते हैं। सड़क मार्ग से जेजुरी मुंबई और पुणे से काफी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।



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