महाराष्ट्र के कोंकण तट पर मौजूद है एक छोटा सा शहर, देवबाग। समुद्रतट पर मौजूद इसी छोटे से शहर के पास ही एक ऐसी जगह जिसे प्रवासी पक्षियों के लिए जन्नत माना जाता है। समुद्र के ठीक बीच में मौजूद एक छोटा सा द्वीप, जहां बड़ी तादाद में प्रवास पर भारत आने वाले ऑस्ट्रेलियन सीगल अपना अस्थायी बसेरा बनाते हैं।
बर्डवाचर्स और फोटोग्राफी के शौकिनों के लिए इससे ज्यादा हसीन कोई और जगह भला हो सकती है क्या! इस द्वीप को सीगल आइलैंड या सुनामी (Tsunami) आइलैंड के नाम से जाना जाता है।

सीगल आइलैंड हमेशा नजर आने वाला कोई आम द्वीप नहीं है। यह समुद्र के नीचे छिपा रहता है लेकिन जब अरब सागर में भाटा आता है, तो यह द्वीप बाहर नजर आने लगता है। जिस समय यह द्वीप समुद्र के पानी से बाहर निकलता है, तब इसे देखकर ऐसा लगता है मानों सफेद रंग की कालिन इसपर बिछा दी गयी हो। सीगल पक्षियों का झुंड इस आइलैंड को पूरी तरह से ढंक लेता है।
साल के कुछ खास समय में ही सुनामी आइलैंड या सीगल आइलैंड पानी से बाहर दिखाई देता है। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार अक्तूबर से मार्च के दौरान समुद्र में भाटा आने पर सीगल आइलैंड बाहर नजर आने लगता है। जिस समय आइलैंड बाहर आता है यह सीगल पक्षियों से पूरी तरह से ढंक जाता है। तब इस जगह की खुबसूरती देखने लायक होती है।
यहां पहुंचने के लिए किसी भी पर्यटक को ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं होती है। देवबाग बीच के स्थानीय मछुआरे ही आपको इस छोटे से मगर बहुत ही सुन्दर द्वीप पर पहुंचा देते हैं। कोंकण समुद्रतट से होकर इस द्वीप तक का छोटी सी नाव का सफर का अनुभव भी बेहद खास होता है। इस दौरान अगर आप गौर से देखें, तो हो सकता है कि नाव के आसपास आपको अटखेलियां करती डॉल्फिन भी दिख जाएं, क्योंकि इस समुद्रतट और आसपास पर्यटकों को अक्सर डॉल्फिन नजर आती रहती हैं।
सीगल आइलैंड या इन सुन्दर सफेद पक्षियों के अलावा देवबाग का समुद्रतट भी अपने आप में प्राकृतिक खुबसूरती को समेटे हुए है। यहां अक्सर लोग रिलैक्स करने और शांति से राहत के कुछ समय बिताने के लिए आते रहते हैं। इसके अलावा अगर आपको एडवेंचर या वाटर स्पोर्ट्स पसंद है तो यहां कायाकिंग, पैरासेलिंग, स्कूबा डाईविंग, स्नोरकेलिंग आदि कई तरह के वाटर एक्टिविटी भी करवायी जाती है।

डॉल्फिन को देखना, कोरल रिफ को अनुभव करना और समुद्रीजीवों को करीब से देखना किसे पसंद नहीं होता है। पूरे दिन की वाटर और ढेर सारी दूसरी एक्टिविटी के बाद यहां के लोकल व्यंजनों का स्वाद लिये बिना इस छोटे से ट्रिप को कैसे खत्म किया जा सकता है। देवबाग अपने फ्रेश सीफूड के लिए काफी मशहूर है। अगर आप यहां जाते हैं तो झींगा मछली फ्राई, पॉम्फ्रेट करी या फिर मालवानी मछली फ्राई को ट्राई किये बिना वापस बिल्कुल न लौटे।
कैसे पहुंचे देवबाग बीच
मुंबई से देवबाग बीच की दूरी करीब 498 किमी की है, जिसे तय करने में 10 घंटे का समय लग सकता है। मुंबई से देवबाग के लिए ट्रेन मिल जाती है, जिससे यहां तक पहुंचना आसान होता है। अगर आप सड़क मार्ग से देवबाग आने के बारे में सोच रहे हैं तो किराए पर गाड़ी लेना सबसे अच्छा होगा। इससे आप अपने हिसाब से आराम-आराम से हॉल्ट लेते हुए पूरा सफर तय भी कर लेंगे और वापसी भी अपनी सुविधानुसार ही कर पाएंगे। इसके अलावा मुंबई से देवबाग के लिए बस सेवा भी उपलब्ध है।



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