Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »महाराष्ट्र का लोहागढ़ किला, जहां अपना खजाना रखा करते थे शिवाजी महाराज

महाराष्ट्र का लोहागढ़ किला, जहां अपना खजाना रखा करते थे शिवाजी महाराज

लोहागढ़ यानी लोहा + गढ़ (किला)। वो किला जो लोहे का बना हुआ है। महाराष्ट्र का लोहागढ़ किला जिसका इतिहास मराठा सम्राट शिवाजी महाराज से जुड़ा हुआ है। यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट 2024-25 की लिस्ट के लिए Maratha Military Landscape of India के नाम से प्रसिद्ध 12 किलो के नाम की सिफारिश भारत करने वाला है। इन्हीं किलो में से एक किला है ऐतिहासिक लोहागढ़ किला

lohagarh fort maharashtra

समुद्रतल से करीब 3400 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ी पर स्थित यह किला 18वीं सदी में निर्मित बताया जाता है। मराठा शासकों के अलावा लोहागढ़ के किले पर विदर्भ शासकों का भी अधिकार रहा है। वर्तमान समय में लोहागढ़ किले पर आने वाले लोगों में वैसे लोग भी शामिल होते हैं, जो ट्रेकिंग के शौकिन होते हैं और जिन्हें प्रकृति को करीब से देखना पसंद है।

आइए महाराष्ट्र के लोहागढ़ किला के बारे में कुछ खास जानकारियां देते हैं :

कई राजवंशों का रहा है अधिकार

इतिहासकारों से मिली जानकारी के अनुसार लोहागढ़ किले पर अलग-अलग समय विभिन्न राजवंशों का अधिकार रहा है, जिनमें सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव, निजाम, मराठा और मुगल शामिल है। बताया जाता है कि वर्ष 1648 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस किले पर अपना अधिकार जमाया था। लेकिन साल 1665 में जब उन्होंने पुरंदर की संधि की, तब उन्हें यह किला मुगलों को सौंपना पड़ा।

वर्ष 1670 में उन्होंने फिर से इस किले पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। लोहागढ़ का किला एक विशाल संरचना है जो विसापुर किले से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए अगर कोई पर्यटक लोहागढ़ किले में घूमने आता है, तो वह विसापुर किले का दौरा भी कर सकता है।

शिवाजी रखते थे अपना खजाना

शिवाजी महाराज के जीवन में कई किलो का काफी महत्व रहा है। इनमें से ही एक किला है लोहागढ़ का किला। कहा जाता है कि लोहागढ़ किले का इस्तेमाल शिवाजी महाराज अपना खजाना रखने के लिए किया करते थे। इतिहासकारों का कहना है कि सूरत, जो मुगलों का व्यापारिक केंद्र था, को मराठा सम्राट शिवाजी महाराज ने दो बार लुटा था।

lonavala lohagrah fort

Times Now Hindi की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1664 और 1670 में सूरत से लुटे हुए खजाने को रखने के लिए ही उन्होंने लोहागढ़ किले का इस्तेमाल किया था। कहा जाता है कि शिवाजी महाराज ने जितनी बार मुगलों को लूटा, उन्होंने मुगलों को केवल सबक सिखाने के लिए ही लूटा था। मुगल जब भी किसी गांव, कस्बे या शहर पर हमला करते थे, तब वे उसे बुरी तरह से तहस-नहस कर देते थे। प्रजा को होने वाली हानि को देखकर ही शिवाजी महाराज ने मुगलों को लुटने का फैसला किया था।

ट्रेकिंग करते हैं लोग

लोहागढ़ किले का ऐतिहासिक महत्व होने के साथ-साथ आज ट्रेकिंग और एडवेंचर पसंद करने वाले लोगों का यह पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट है। लोहागढ़ किला पुणे से लगभग 55 किमी और लोनावला से 12 किमी की दूरी पर मौजूद है। ट्रेकिंग की शुरुआत लोहागढ़ वाडी से होता है, जो इसका बेस विलेज है।

मानसून के साथ ट्रेकिंग के लिए लोहागढ़ का किला सुरक्षित और आदर्श माना जाता है। इस समय बारिश की वजह से किले के आसपास का पूरा परिवेश हरियाली से भर जाता है। सर्दियों के मौसम में भी लोग अक्सर लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के लिए जाते हैं। किले की चोटी तक पहुंचने के लिए 250 से 350 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं जिसमें 1 से 2 घंटे का समय लग सकता है।

door of lohagarh fort maharashtra

किले में क्या है खास

समय के थपेड़े झेलते हुए लोहागढ़ का किला अब काफी टूट चुका है। लेकिन इसके ऐतिहासिक महत्व में कोई कमी नहीं आयी है। किले में 4 दरवाजे हैं, जिनका नाम गणेश दरवाजा, हनुमान दरवाजा, नारायण दरवाजा और महा दरवाजा। महा दरवाजा पर कुछ पुरानी नक्काशीदार मूर्तियां आज भी दिखाई देती हैं।

किले का एक प्रसिद्ध स्थान विंचु काटा है, जो पहाड़ों की एक श्रृंखला है जो मकर जैसी दिखाई देती है। हालांकि किले में चढ़ाई के समय आप जितने ऊपर जाते रहते हैं, रास्ता उतना ही खराब मिलने लगेगा। किले के शिखर पर प्राकृतिक पानी का कुंड मिलेगा। इसके साथ ही यहां भगवान शिव का एक मंदिर और किसी पीर बाबा का मजार भी मिलेगा।

कैसे पहुंचे लोहागढ़ किला और घूमने का सही समय

यूं तो लोहागढ़ घूमने जाने के लिए मानसून और सर्दियों का समय बेस्ट होता है। लेकिन सबसे अच्छा समय सितंबर से मार्च के बीच का माना जाता है। यह किला सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। सप्ताह के सातों दिन किला खुला रहता है और इसमें प्रवेश करने के लिए कोई शुल्क नहीं लगता है। किले से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन लोनावला है, जहां से टैक्सी लेकर आप लोहागढ़ वाडी गांव आ सकते हैं।

view of lohagarh fort pune

पुणे एयरपोर्ट से लोहागढ़ वाडी गांव 60 किमी की दूरी पर है। बस या टैक्सी से यह दूरी आसानी से तय की जा सकती है। लोहागढ़ का सबसे नजदीकी बस स्टैण्ड लोनावला है, जो यहां से 12 किमी की दूरी पर है। लोहागढ़ फोर्ट की ट्रेकिंग लोहागढ़ वाडी गांव से ही शुरू करनी होती है।

More News

Read more about: pune history fort
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+