» »मकर संक्रांति 2018: कर्नाटक में जलते हुए अंगारों पर चलकर मिल जाती है पापों से मुक्ति

मकर संक्रांति 2018: कर्नाटक में जलते हुए अंगारों पर चलकर मिल जाती है पापों से मुक्ति

Written By: Goldi

हर साल 14 व 15 जनवरी को मनायी जाने वाली मकर संक्राति हिंदुयों के प्रमुख पर्वों में से एक है,जिसे भारत के हर राज्य में बेहद हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है। यह भारत का एक ऐसा त्योहर है जो हमेशा एक ही तारीख पर मनाया जाता है।

मकर संक्रांति उत्तर से लेकर दक्षिण और,पूर्व से लेकर पश्चिम तक मनाया जाता है, लेकिन इन त्योहारों के नाम अलग लग होते हैं।

इसी क्रम में आज हम आपको लेख से बतायेंगे कि, दक्षिण भारत के कर्नाटक में इस त्यौहार को किस भव्यता के साथ मनाया जाता है।

उडुपी

उडुपी

पश्चिमी घाट से लेकर अरेबियन सागर से घिरा उडुपी एक बेहद ही खूबसूरत और मन को आनन्द देने वाली जगह है।यह शहर भगवान श्री कृष्ण के मंदिर के विख्यात है, जहां पूरे साल भक्तों का तांता लगा रहता है। यह एज बेहद ही सुरमय स्थान है, जहां पर्यटक कई खूबसूरत अनदेखी जगहों को निहार सकते हैं। मकर संक्राति के समय यहां तीन रत उत्सव आयोजित किया जाता है..और पूरा सजा हुआ शहर को मन को प्रफुल्लित करता है। मकर संक्रांति के उत्सव पर पर्यटक यहां आकर इस उत्सव का हिस्सा बन सकते हैं, साथ ही यहां परम्परा और संस्कृती को अच्छे से जानने और समझने का मौका मिलता है।Pc:Magiceye

श्रींरंगापटना

श्रींरंगापटना

दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण वैष्णववादी तीर्थस्थानों में से एक रंगनाथस्वामी मंदिर श्रींरंगापटना में स्थित है। मंदिर 9 वीं शताब्दी में गंगा राजवंश द्वारा बनाया गया था,हालांकि बाद में इसकी वास्तुकला को और अधिक सुंदर बना दिया गया।

मकर संक्रांति के दौरान इस मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन करने पहुँचते हैं। मकर संक्रांति के दिन यहां लक्षद्वीपोत्सव मनाया जाता है। मंदिर के परिसर में एक लाख हजार से अधिक तेल के दीपक जलाए जाते हैं। पर्यटक यहां मंदिर में भगवान से आशीर्वाद लेने के साथ साथ इस खूबसूरत वास्तुकला को भी निहार सकते हैं।

बैंगलोर

बैंगलोर

दक्षिण बैंगलोर में स्थित गवी गंगेश्वर गुफा मंदिर जिसे गविपुरम गुफा मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में मकर संक्रांति के पर्व पर इस मंदिर में श्रद्धालु भगवान के दर्शन हेतु पहुंचते हैं।

गवी गंगाधरेश्वर मंदिर भारतीय रॉक-कट वास्तुकला का एक आदर्श उदाहरण है जिसे 9 वीं शताब्दी के दौरान एक अखंड चट्टान से बनाया गया था। हर साल जनवरी में मकर संक्रांति के दिन सूर्य की किरण एक घंटे के लिए पवित्र स्थान के भीतर शिवलिंग नदी की मोरती के सींगों के बीच से होती हुई सूर्य की किरण शिवलिंग को रोशन करती है।

Pc:Pavithrah

बेलगाम

बेलगाम

कर्नाटक के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित बेलगाम, कर्नाटक के पुराने शहरों में से एक है। यह क्षेत्र संस्कृति के दिलचस्प संगम को दर्शाता है, इस शहर में यादव, खिलजी, हॉसलस, नायक, सुल्तानों, मराठों और कई अन्य राजवंशों का शासन रह चुका है। आधिकारिक बेलागवी सहित नामों के नाम पर शहर राज्य के 'शूगर बाउल' के रूप में भी लोकप्रिय है। सहयाद्री पहाड़ों की पृष्ठभूमि के उलट, बेलगाम एक सुंदर जगह है जो कि खेती के लिए लोकप्रिय है।

इस शहर में मकर संक्रांति का पर्व, फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान यहां के स्थानीय लोग अपने घरों में पकवान मिठाई आदि बनाकर आस पडोस में वितरित करते हैं।

इस दिन सभी नए कपड़े पहनते हैं और स्वामी को प्रार्थना कर समृद्ध फसल के लिए धन्यवाद करते है। पर्यटक इस पर्व के दौरान यहां की सैर कर सकते हैं।

ग्रामीण कर्णाटक

ग्रामीण कर्णाटक

कर्नाटक के विभिन्न छोटे गांवों में मकर संक्रांति का त्योहार विभिन्न रंगों में मवेशियों को चित्रित कर उनका जुलुस निकाल कर मनाया जाता है। इसके बाद शाम के समय कुछ बहादुर पुरुष जलते हुए कोयले अपर नंगे पैर चलते हैं। माना जाता है कि,ऐसा करने से इन पुरशो के पुराने पाप द्गुल जाते हैं और ये शुद्ध हो जाते हैं। इन गांवों की यात्रा के दौरान पर्यटक भी यहां के खास आयोजन में भाग ले सकते हैं। साथ ही ऐसे अयोज क्यों किया जाते हैं,उनकी लोककथायों को भी सुन सकते हैं।

Pc:istolethetv