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भारत की दूसरी पद्मावती, जिसका महल बना अमर प्रेम का साक्षी

By Nripendra Balmiki

मध्यप्रदेश स्थित माण्डवगढ़ या माण्डू, मालवा क्षेत्र का एक ऐतिहासिक शहर है, जो 'रानी रूपमती' और 'बादशाह बाज बहादुर' के अमर प्रेम के लिए जाना जाता है। यहां की खंडहरनुमा इमारतें, आज भी अपने अंदर माण्डू शासकों का गौरवशाली इतिहास समेटे हुए हैं। धार शहर से लगभग 38 किमी की दूरी पर स्थित माण्डू, कभी तरंगा राज्य का उपभाग हुआ करता था।

परमार राजाओं के बाद 13वीं शताब्दी में यह शहर मुस्लिम शासकों के हाथ में चला गया, जहां से माण्डू का स्वर्णकाल प्रारंभ होता है। अपनी अमर प्रेम कहानी के लिए विख्यात माण्डवगढ़, अब एक पर्यटनस्थल बन चुका है, जिसकी भव्य इमारतों, शाही हमाम, वास्तुकला देखने के लिए, देश-दुनिया से सैलानियों का आवागमन लगा रहता है।

कौन थी रानी रूपमती ?

कौन थी रानी रूपमती ?

PC- Unknown

रानी रूपमति मालवा के अंतिम शासक बादशाह बाज बहादुर की प्रेमिका थी। अपार सुंदरी रूपमती को गायन-वादन कला में ख्याति प्राप्त थी। रूपमति के इन्हीं गुणों के कारण बादशाह बाज बहादुर उनसे प्रेम करने लगा। कई इतिहासकारों ने रूपमती -बाज बहादुर की प्रेम कहानी का चित्रण किया है, पर रूपमती के निजी जीवन के बारे में कहीं, सही विवरण प्राप्त नहीं होता, किसी न उसे नर्तकी कहा, तो किसी ने उसे ब्राह्मण कन्या, तो किसी ने उसे किसान की बेटी तक कहा है। परंतु नर्मदा घाटी के आख्यानों से पता चलता है, कि रूपमती एक राजपूत कन्या थी।

अकबर के गलत इरादे

अकबर के गलत इरादे

PC- Sheerazwiki

रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी अब मालवा से निकलकर, दिल्ली सल्तनत तक पहुंच चुकी थी। जब अकबर को रूपमती की खूबियों के बारे में पता चला, तो उसने एक पत्र बाज बहादुर को भेजा, जिसमें लिखा था कि 'रानी रूपमती को दिल्ली दरबार में जल्द पेश करें'। अकबर की इस मंशा पर बाज बहादुर काफी क्रोधित हुआ। जब मालवा से अपमान भरा जवाब अकबर को मिला, तो उसने सेनापति आदम खां को मालवा पर चढ़ाई करने के लिए भेज दिया।

जिसके बाद आदम खां और बाजबहादुर के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया, परिणामस्वरूप बाज बहादुर को मालवा छोड़कर भागना पड़ा। आदम खां अब रूपमति को बंदी बनाना चाहता है, लेकिन उसके रूप से सामने वो ढेर हो गया । इसी बीच रानी रूपमती ने जहर खाकर, अपना नाम इतिहास की अमर प्रेम कहानियों में दर्ज करा लिया।

रानी रूपमती का महल

रानी रूपमती का महल

PC- Sumitsurai

माण्डू में आज भी रानी रूपमती के नाम का एक महल अपनी प्राचीन दीवारों के साथ खड़ा है। इस महल का निर्माण बादशाह बाज बहादुर ने अपनी प्रेयसी रूपमती के लिए करवाया था। इस महल का इस्तेमाल उस समय माण्डू की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए भी किया जाता था। महल में कई खूबसूरत दरवाजें, खिड़कियां , मेहराबे बनवाए गए थे, जिनपर की गई वास्तुकला, आज भी अपनी प्रारंभिक अवस्था में नजर आती हैं। कहा जाता है, रूपमती प्रात: सुबह उठकर नर्मदा दर्शन के बाद ही, भोजन ग्रहण किया करती थीं, इसलिए बाज बहादुर ने इस ऊंचे महल का निर्माण करवाया था।

हिंडोला महल

हिंडोला महल

PC- Muk.khan

माण्डू शहर में एक हिंडोला नाम का एक खूबसूरत महल है। गयासुद्दीन खिलजी द्वारा बनवाए गए इस महल की दीवारें, कुछ नीचे की ओर झुकी हुई हैं, जिसकी वजह से यह देखने पर एक हिंडोले जैसा प्रतीत होता है। (हिंडोला का अर्थ होता है झूला)। उस दौरान इस महल का इस्तेमाल एक 'सभा महल' के रूप में किया जाता था। इस महल की पश्चिम दिशा में कई और छोटे-बड़े महल मौजूद हैं। यह महल खूबसूरत वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। जिसके नजदीक, एक प्राचीन बावड़ी भी है।

जहाज महल

जहाज महल

PC- Bernard Gagnon

माण्डू के खूबसूरत महलों में जहाज महल का भी नाम आता है, जिसका निर्माण भी गयासुद्दीन खिलजी ने करवाया था। यह महल अपनी आकर्षक वास्तुकला, सुंदर महराबों, मण्डप के लिए जाना जाता है। यह महल दो तालाबों (कपूर और मुंजे ) के बीच बनाया गया है। दो तालाबों के बीच यह महल किसी जहाज सा प्रतीत होता है, इसलिए इसका नाम जहाज महल रख दिया गया। अगर आप माण्डू आएं तो इस खूबसूरत महल को देखना न भूलें।

अशर्फी महल

अशर्फी महल

PC- Zishaan

माण्डू में बनवाए गए महल अपने खास महत्व के लिए जाने जाते हैं। जामा मस्जिद के ठीक सामने होशंगशाह खिलजी के उत्तराधिकारी मोहम्मद खिजली ने एक अशर्फी महल बनवाया था। इम महल का निर्माण इस्लामिक भाषा के विद्यालय के रूप में करवाया गया था। अगर आप इस महल को अंदर से देखें तो पता चलेगा, कि यहां विद्यार्थियों के पढ़ने व रहने के लिए कई कमरों का निर्माण करवाया गया था।

बाज बहादुर का महल

बाज बहादुर का महल

PC- Bernard Gagnon

माण्डवगड़ में बादशाह बाज बहादुर का एक महल भी है। इस महल में कई खूबसूरत कक्ष बनवाए गए थे , जिसका इस्तेमाल सभा , लोगों से मिलने के लिए व खास रणनीतियां बनाने के लिए किया जाता था। महल में विशाल हॉल व आंगन भी बनवाए गए थे। यहां से आप पूरेमाण्डू का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। आप उपरोक्त महलों के अलावा माण्डू में स्थित और भी कई ऐतिहासिक स्थलों को देख सकते हैं, जिनमें रेवा कुंड, नीलकंड महल, जामा मस्जिद, आदि शामिल हैं।

कैसे पहुंचे माण्डू

कैसे पहुंचे माण्डू

PC- Abhishek727


माण्डू पहुंचने का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा इंदौर है, रेल मार्ग के लिए आप रतलाम रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं, जो भारत के अहम शहरों से जुड़ा हुआ है। आप चाहे तो सड़क मार्ग से भी माण्डू पहुंच सकते हैं, माण्डू मध्य प्रदेश के कई अहम शहरों से जुड़ा हुआ है।

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