मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर, जो सबसे ज्यादा पूजनीय पूजा स्थलों में से एक है। कोई भी मौका हो, चाहे गणेश चतुर्थी, होली-दिवाली हो या कोई भी और त्योहार हो या जन्मदिन या बस यूं ही गणपति के दर्शन करने का मन हो, मुंबईकरों की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक सिद्धिविनायक मंदिर होता है। इसके साथ ही बॉलीवुड स्टार्स भी अक्सर फिल्मों की रिलीज से पहले भगवान गणेश का विशेष आर्शिवाद प्राप्त करने के लिए सिद्धिविनायक मंदिर में आते रहते हैं।
भले ही देश के दूसरे कई मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड लागू हो लेकिन अब तक सिद्धिविनायक मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं पर कोई ड्रेस कोड लागू नहीं था। लेकिन अब सिद्धिविनायक मंदिर में जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है।

कौन से श्रद्धालुओं को नहीं मिलेगा मंदिर में प्रवेश?
सिद्धिविनायक मंदिर में भक्तों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया गया है, जिसमें छोटे कपड़े या फटी जींस आदि पर प्रतिबंध लगाया गया है। नए नियमों के अनुसार अगर ड्रेस कोड के अनुसार श्रद्धालुओं ने परिधान धारण नहीं किया तो उन्हें मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंदिर ट्रस्ट की ओर से बताया गया है कि श्रद्धालुओं को पारंपरिक भारतीय पोशाक ही धारण करने का अनुरोध किया गया है।
कौन से पोशाक पहनकर जाएं मंदिर?
- सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट की ओर से जारी बयान के अनुसार मंदिर में दर्शन करने आने वाले सभी पुरुष और महिला श्रद्धालुओं को पारंपरिक भारतीय पोशाक पहनकर ही आना पड़ेगा। यानी ऐसे परिधान जिसमें पूरा शरीर ढंका हुआ हो।
- मंदिर में ऐसे परिधान में ही आने का अनुरोध श्रद्धालुओं से किया गया है जिसमें मंदिर की मर्यादा और पवित्रता बनी रहे। अनुचित या अंग प्रदर्शन करने वाले परिधानों में मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- फटी हुई जींस, मिनी स्कर्ट जैसे परिधान जो मंदिर जैसी पवित्र जगह पर अंग प्रदर्शन को बढ़ावा देते हैं या अभद्र दिखते हैं, उन्हें धारण करने से बचना चाहिए। भारतीय संस्कृति को प्रोत्साहित करते हुए और भारतीय संस्कृति को दर्शाते हुए कपड़े ही पहनने का अनुरोध किया गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?
मीडिया से बात करते हुए मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पवन त्रिपाठी ने बताया कि ड्रेस कोड लागू करने का फैसला श्रद्धालुओं के अनुरोध के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि हमें कुछ भक्तों के परिधानों को लेकर दूसरे भक्तों से तारीफ मिली है लेकिन कुछ भक्तों के परिधानों को लेकर शिकायत दर्ज करवायी गयी है। भक्तों ने कुछ श्रद्धालुओं के परिधानों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था जिसके बाद यह फैसला लिया गया है।
इसके साथ ही मंदिर ट्रस्ट ने प्रसाद बांटने के लिए प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल को बंद करने का फैसला लिया गया है। पायलट परियोजना के तहत मंदिर में प्रसाद पैक करने के लिए कागज की थैलियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बृहत मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।



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