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लाइफ में एक बार जरूर लें मुंबई से तटीय शहर रत्‍नागिरि के सफर का मज़ा

Posted By: Namrata Shatsri

महाराष्‍ट्र में अरब सागर और सहसाद्रि पर्वत के बीच में स्थित रत्‍नागिरि, शहर पहाड़ों, समुद्रतट, जंगल, नदी और हॉट वॉटर स्प्रिंग और झरनों से घिरा है। पर्यटकों के लिए यहां सब कुछ है।

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रत्‍नागिरि को अल्‍फांसो आम के लिए भी जाना जाता है। इसके अलावा रत्‍नागिरि अपने स्‍वादिष्‍ट खाने के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां की फिश करी राइस और सोलकड़ी बहुत लोकप्रिय है।

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इस जगह पर स्‍वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक और वीर सावरकर का जन्‍म हुआ था। यहां शिवाजी के शासन काल में बनाए गए कई शानदार किले आज भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मुंबई से 335 किमी दूर रत्‍नागिरि में मुंबईवासी वीकेंड पर घूमने आ सकते हैं।

रत्‍नागिरि आने का सही समय

रत्‍नागिरि आने का सही समय

गर्मी के मौसम में रत्‍नागिरि का तापमान बहुत गर्म रहता है। इस दौरान तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। मॉनसून के दौरान मज़ा तो आता है.. लेकिन इस दौरान उमस के कारण पसीना आने लगता है। इसलिए सर्दी यानि नवंबर से फरवरी तक के बीच रत्‍नागिरि आना सबसे सही रहता है।PC: Apoo8338

कैसे पहुंचे रत्‍नागिरि

कैसे पहुंचे रत्‍नागिरि

रेल मार्ग : रत्‍नागिरि का अपना रेलवे स्‍टेशन है। मुंबई से रत्‍नागिरि के लिए हर रोज़ चार ट्रेनें चलती हैं। रेल से लगभग 6 घंटे का सफर तय करना होता है।

सड़क मार्ग : सड़क मार्ग से मुंबई से रत्‍नागिरि के लिए तीन रूट इस प्रकार हैं :

पहला रूट : मुंबई - नवी मुंबई - चिपलुन - पटन्सई - एनएच 66 के माध्यम से रत्नागिरी। 347 किमी लंबे इस सफर में लगभग 7 घंटे का समय लगेगा।

दूसरा रूट : मुंबई - लोनावाला - खंडाला - पिंपरी चिंचवाड़ - सातारा - बेंगलुरु-मुंबई हाइवे / मुंबई हाइवे / मुंबई-पुणे हाइवे और एनएच 48 के माध्यम से रत्नागिरी। इस रूट पर पहले रूट के मुकाबले एंक घंटे का समय ज्‍यादा लगता है। 446 किमी लंबे इस सफर में 8 घंटे का समय लगता है।

तीसरा रूट : मुंबई - लोनावाला - पिंपरी चिंचवाड़ - चिपलुन - पटांसी - बैंगलोर-मुंबई हाइवे / मुंबई हाइवे / मुंबई-पुणे हाईवे और एनएच 66 के जरिये रत्नागिरी। 439 किमी लंबे इस सफर में 9 घंटे का समय लगता है। तीनों रूटों में से ये सबसे लंबा है।

रत्‍नागिरि का सफर

रत्‍नागिरि का सफर

मुबई से रत्‍नागिरि के दूसरे रूट की सड़कें ज्‍यादा व्‍यवस्थित हैं इसलिए आपको दूसरे रूट से जाना चाहिए।

बिना कहीं रूके इस सफर में 8 घंटे का समय लगता है इसलिए सुबह जल्‍दी निकलने की कोशिश करें। मुंबई से लोनावला की दूरी 83 किमी है और यहां पहुंचने में आपको 1 घंटे 45 मिनट का समय लगेगा। लोनावला एक खूबसूरत हिल स्‍टेशन है जिसे लॉर्ड एल्फिनस्‍टोन ने 1871 में खोजा था।

टाइगर लीप एक बहुत ही खूबसूरत चट्टान है जोकि दिखने में ऐसी लगती है मानो कोई बाघ घाटी में उछल रहा हो। यहां से पश्चिमी घाट का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। इसकी ऊंचाई 650 मीटर है और टाइगर लीप पर ईको प्‍वाइंट मुख्‍य आकर्षण है। मॉनसून के दौरान लोनावला का बुशी बांध भी शानदार लगता है।

ये इंद्रायणी नदी पर बना है। मॉनसून के दौरान इस बांध की सीढियों तक पानी आ जाता है। इस नज़ारे को देखने के लिए बड़ी संख्‍या में लोग यहां आते हैं।PC: Manu Jha

लोनावला

लोनावला

लोनावला हिल स्‍टेशन को भारत में गर्मी की मार से बचने के लिए ब्रि‍टिश लॉर्ड एल्फिनस्‍टोन ने खोजा था। इस जगह को इसके मौसम और चिक्‍की के लिए जाना जाता है। यहां पर गुड़ से और मूंगफली से चिक्‍की बनाने वाली कई दुकानें हैं।PC: Jainam oswal

खंडाला

खंडाला

मुंबई वासियों का पसंदीदा हिल स्‍टेशन है खंडाला जोकि इमेजिका थीम पार्क से 24 किमी दूर है। पश्चिमी घाट पर प्राकृतिक सौंदर्य से सजी इस जगह पर कई पर्वत चोटियां, झीलें और गुफाएं हैं।

खंडाला के तीन प्रमुख व्‍यूप्‍वाइंट में से एक हैं टाइगर लीप, अमृतंजन प्‍वाइंट और ड्यूक नोज़। यहां से इस पूरे हिल स्‍टेशन का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। इसके अलावा यहां भुशी झील, करला और भजा गुफाएं भी दर्शनीय हैं।PC:Soham Banerjee

पिंपरी चिंचवाड़

पिंपरी चिंचवाड़

पुणे में स्थित पिंपर चिंचवाड़ लोनावला से 53 किमी दूर है और इस सफर में एक घंटे का समय लगता है। पिंपरी चिंचवाड़ एक इंडस्ट्रियल हब है। ये मौर्य गोसावी मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। हर साल पावना नदी में बाढ़ आने के कारण ये मंदिर पानी में डूब जाता है।

निसारगकावी बहिनबाई चौधरी जू एक स्‍नेक पार्क है जो सभी उम्र के लोगों को पसंद आता है। इसके अलावा पिंपरी चिंचवाड़ में इस्‍कॉन मंदिर, श्री महावीर जैन मंदिर, भक्‍ति शक्‍ति और दुर्गा टेकड़ी आदि मंदिर देख सकते हैं।PC:_paVan_

सतारा

सतारा

सतारा पर कई शक्‍तिशाली साम्राज्‍यों जैसे चालुक्‍य, मौर्य और मराठाओं का शासन रहा है। इस लिए इस शहर में कई खूबसूरत किले और मंदिर हैं।सतारा में अजिनक्‍यातारा किला, सज्‍जनगढ़ किला और वसोता किला जरूर देखें। अजिन्‍क्‍यातारा किले को राजा भोज द्वारा बनवाया गया था और अब सह सतारा का लैंडमार्क बन गया है। 3000 फीट की ऊंचाई पर बने इस किले से शहर का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है।

सतारा से 25 किमी दूर है कास पठार जोकि यूनेस्‍को की विश्‍व धरोहर सूची में शामिल है। इस पठार को उत्तराखंड की फूलों की घाटी की तरह सुंदर बताया जाता है।PC:Travelling Slacker

अजिंक्‍यातारा किला

अजिंक्‍यातारा किला

इस किले से पूरे दक्षिण महाराष्‍ट्र का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। सज्‍जनगढ़ को बहामानी साम्राज्‍य द्वारा बनवाया गया था। छत्रपति शिवाजी की एक मूर्ति सतारा में पवई नाका में स्थापित की गई है।

सतारा से रत्‍नागिरि 187 किमी दूर है और इसमें 3 घंटे 30 मिनट का समय लगेगा। ये बंदरगाही शहर समुद्रतटों, आमों, संस्‍कृति और खाने के लिए मशहूर है। महाराष्‍ट्र में अरब सागर और सहसाद्रि पर्वत के बीच में स्थित है रत्‍नागिरि। ये शहर पहाड़ों, समुद्रतट, जंगल, नदी और हॉट वॉटर स्प्रिंग और झरनों से घिरा है। पर्यटकों के लिए यहां सब कुछ है।

PC:Omar AV

गणपतिपुले

गणपतिपुले

इस छोटे से गांव में भगवान गणेश का स्‍वयंभू गणपति मंदिर है। प्राचीन कोंकण संग्रहालय में कोंकण क्षेत्र के लोगों के प्राचीन रहन-सहन को देखा जा सकता है। गणपतिपुले में कई सुंदर समुद्रतट जैसे आरे-वारे, गायवाड़, गणपतिपुले तट भी देख सकते हैं।PC: Own work

जयगढ़ किला

जयगढ़ किला

रत्‍नागिरि के पास ये किला प्रमुख आकर्षण है। गणपतिपुले से ये 14 किमी दूर है। ये किला एक चट्टान पर खड़ा है और शास्त्री नदी को अरब सागर में मिलते हुए यहां से देखा जा सकता है। किले के अंदर गणपति मंदिर भी है। किला तो नष्‍ट हो चुका है लेकिन इसकी बाहरी दीवारें आज भी मजबूती से खड़ी हैं।PC:Nilesh2 str

मरलेश्‍वर मंदिर

मरलेश्‍वर मंदिर

सहयाद्रि की पहाडियों से घिरा यह एक गुफा मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित मरलेश्‍वर मंदिर में भगवान को प्रसन्‍न करने के लिए भक्‍तों को थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है। दरसअल, मंदिर तक पहुंचने के लिए 400 सीढियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर के पास धारेश्वर झरना और करमबोली डोह भी है। महाशिवरात्रि पर इस मंदिर में भक्‍तों की भारी भीड़ दिखाई देती है।PC: Pranav

अंजरले तट

अंजरले तट

अंजरले एक शांत सफेद रेत का समुद्रतट है जो रत्नागिरी में स्थित है। इस समुद्र तट पर कई साहसिक खेलों जैसे पैरासेलिंग, स्नोर्कलिंग और विंड सर्फिंग का मज़ा ले सकते हैं। यहां स्‍थानीय शैली में बने स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजनों का स्‍वाद चख सकते हैं। अंजरले समुद्र तट का प्रमुख आकर्षण डॉल्फिन को देखना है। समुद्र तट के करीब कद्यावर्छा गणपति मंदिर है। इस मंदिर में गणेश जी की मूर्ति की सूंड दाहिनी तरफ है।
PC:Apoorva Karlekar

थिबॉ पैलेस

थिबॉ पैलेस

यह महल 1910 में अंग्रेजों ने बर्मा/ मार के राजा और रानी के लिए बनाया था, जिन्हें निर्वासन में रत्नागिरी भेजा गया था। थिबॉ पैलेस, बर्मा के पहले परिवार के लिए एक शाही जेल था। 1916 तक मृत्‍यु तक वे लोग इसी में बंद रहे थे। एक छोटी सी पहाड़ी के ऊपर स्थित यह महल अब एएसआई द्वारा संग्रहालय तब्‍दील कर दिया गया है।
PC:Bharat Bang

रत्‍नादुर्ग किला

रत्‍नादुर्ग किला

16वीं शताब्दी में बहामनी राजाओं द्वारा बनाया गया यह किला बाद में आदिल शाह की संपत्ति बन गया था। कई सालों बाद मराठा योद्धा शिवाजी ने इस पर अपना कब्जा कर लिया था। मुसलमानों के नियंत्रण में होने के कुछ वर्षों बाद पेशवाओं और फिर अंग्रेजों का इस पर कब्‍जा था। अंग्रेजो ने इसे मराठों से हथियाया था। यह किला घोड़े के जूता यानि 'यू' आकार में है। किले को गणपति दुर्गा का किला भी कहा जाता है, क्योंकि इसके अंदर देवी दुर्गा और गणपति का मंदिर है।PC:RameshSharma1

गुहागर तट

गुहागर तट

गुहागर में समुद्र उथला है और पानी की धाराएं बहुत ज्‍यादा तेज नहीं हैं। इसलिए यहां तैराकी और वॉटर स्‍पोर्ट्स का मज़ा लिया जा सकता है। इस समुद्र तट से सूर्य को देखना अद्भुत लगता है। इस समुद्र तट पर सफेद रेत भी है, जो इसे और भी ज्‍यादा सुन्दर और खूबसूरत बनाता है।PC:Ankur P

वेलास तट

वेलास तट

यह समुद्र तट विशेष रूप से टर्टल वॉच के लिए जाना जाता है। जनवरी या फरवरी के महीने में हर साल यहां कछुओं के उत्‍सव का आयोजन किया जाता है। ओलिव रिडले कछुए अंडे लगाने के लिए महाराष्ट्र के पश्चिमी तट में पलायन करते हैं। इनमें से लगभग 40% वेलास समुद्र तट पर आते हैं। प्रत्येक मादा कछुआ एक समय में लगभग 90-150 अंडे देती है।PC: Eli Duke

तिलक अली संग्रहालय

तिलक अली संग्रहालय

यह संग्रहालय बाल गंगाधर तिलक का पैतृक घर है और अब यह पुरातत्‍व विभाग के अधीन है। तिलक अली संग्रहालय में तिलक के जीवन और चित्रकला और फोटो के रूप में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को दर्शाया गया है। ये संग्रहालय कोंकण वास्तुकला को दर्शाता है।PC: Pradeep717

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