इन दिनों देशभर में मुंबई-अहमदाबाद रूट पर शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन की ही चर्चाएं हैं। लेकिन इस बीच मुंबई से अहमदाबाद के बीच ही एक और हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की तैयारी चल रही है, जिसकी रफ्तार बुलेट ट्रेन से भी ज्यादा होने वाली है।
बुलेट ट्रेन से अहमदाबाद और मुंबई के बीच की दूरी को तय करने में जहां लगभग 2 घंटा से थोड़ा ज्यादा वक्त लगने वाला है वहीं दूसरी हाई स्पीड कॉरिडोर यानी हाईपर लूप (Hyper Loop) मुंबई से अहमदाबाद के बीच की दूरी को 1 घंटे से भी कम समय में तय करेगी। देश की पहली हाईपर लूप ट्रेनों को चलाने के लिए विशेष रेलवे ट्रैक को IIT मद्रास में डिजाइन किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दिनों ही इस बात घोषणा की है कि भारतीय रेलवे इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास को देश के पहले हाईपर लूप टेस्ट ट्रैक बनाने के लिए 1 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त फंड मुहैया करवाने वाली है।
Times Now की मीडिया रिपोर्ट में बताया जाता है कि 422 मीटर लंबा विशेष टेस्ट ट्रैक डिजाइन किया जा रहा है, जिसका नाम 'आविष्कार' रखा गया है। बताया जाता है कि यह टेस्ट ट्रैक हाई स्पीड ट्रेनों को चलाने में सक्षम होगा, जिसपर करीब 1000 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हाई स्पीड ट्रेनों को चलाया जा सकता है।
इस वजह से ही कहा जा रहा है कि एक बार अगर इस ट्रैक को डिजाइन कर लिया गया और इन ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाता है तो मुंबई से अहमदाबाद के बीच की लगभग 525 किमी की दूरी को तय करने में 1 घंटा (60 मिनट) से भी कम का समय लगेगा।

बता दें, हाईपर लूप परिवहन का सबसे तेज रफ्तार साधन होगा, जिसमें वैक्यूम ट्यूब के माध्यम से तेज गति से विशेष रूप से डिजाइन की गयी कैप्सूल में यात्री बैठाकर यात्रा कर सकेंगे। अपने बयान में रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि 422 मीटर का पहला पॉड वास्तव में तकनीक के विकास में एक लंबा रास्ता तय करेगा। मुझे लगता है कि दो बार के 1 मिलियन डॉलर के अनुदान के बाद अब वक्त आ गया है कि IIT मद्रास को 1 मिलियन डॉलर का तीसरा अनुदान भी दे दिया जाए, ताकि हाईपर लूप परियोजना को आगे विकसित किया जा सकें।
IIT मद्रास द्वारा बनाया जा रहा टेस्ट ट्रैक हाई स्पीड ट्रेनों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जिनपर वैक्यूम कैप्सूल का संचालन किया जाएगा। इस परियोजना में ट्रेनों की रफ्तार 1000 किमी प्रति घंटा से ज्यादा होगी, जो संभवतः सामान्य विमानों की तुलना में भी ज्यादा होगी।
आविष्कार हाईपर लूप टेस्ट ट्रैक, जिसकी लंबाई लगभग 422 मीटर होगी, दुनिया की सबसे लंबी हाईपर लूप टेस्ट साइट होगी, जिसका संचालन छात्रों द्वारा किया गया है। बताया जाता है कि टेस्ट ट्यूब की मोटाई 6 मिमी और गोलाई 2 मीटर होगी। हाईपर लूप परियोजना की फंडिंग संयुक्त रूप से भारतीय रेलवे, लॉर्सेन एंड ट्यूब्रो और आर्सेलर मित्तल द्वारा की जा रही है।



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