आज हम बताएंगे भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध मुरुदेश्वर मंदिर के बारे में। यहां दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची शिव प्रतिमा है। इस प्रतिमा की ऊंचाई 123 फीट है।

मुरुदेश्वर मंदिर मुरुदेश्वर में घूमने के मुख्य स्थानों में से एक है। शहर को पहले 'मृदेश्वर' के नाम से जाना जाता था और बाद में मंदिर के निर्माण के बाद इसका नाम बदलकर मुरुदेश्वर कर दिया गया।किंवदंती के अनुसार, रावण कैलाश पर्वत से आत्म लिंग ले आया। तब भगवान गणेश ने चालाकी से रावण को लंका भेज दिया और लिंग को गोकर्ण में जमीन पर रख दिया। इससे क्रोधित होकर रावण लिंग को उखाड़ने और नष्ट करने की कोशिश करने लगा और शिवलिंग के टूटे हुए टुकड़े फेंक दिए। उस समय शिवलिंग को ढकने वाला कपड़ा कंडुका गिरि पर गिरा और यहां मुरुदेश्वर मंदिर बनाया गया।बताया जाता है की मुरुदेश्वर मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। ये मंदिर कर्नाटक के कन्नड़ जिले के भटकल ताल्लुक में स्थित है। आपको बता दें भगवान शिव की मूर्ति चांदी के रंग में कुछ इस तरह रंगी है की सूरज की किरण पड़ते ही ये और भी विशाल रूप में प्रतीत होती है। बताया जाता है की भगवान शिव की इस बड़ी प्रतिमा को बनाने में तकरीबन 2 साल का समय लगा था।

बात करें यहां के आकर्षण केंद्र की, तो मुरुगदेश्वर मंदिर के तीनों ओर अरब सागर है। यानी यह मंदिर तीनों ओर से अरब सागर से घिरा हुआ है।
भगवान शिव की मूर्ति की ऊंचाई के कारण यह धार्मिक स्थल के साथ एक पर्यटक स्थल भी है जिसके दर्शन के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु आते हैं। यह शिव प्रतिमा इतना उंचा है की दूर से देखा जा सकता है। साथ ही मूर्ति को देखने के लिए यहां लिफ्ट भी बनाई गई है।
मुरुदेश्वर मंदिर कंडुका पहाड़ी पर बनाया गया है और तीनों ओर अरब सागर से घिरे होने के कारण यह सबको मंत्रमुग्ध कर देता है।
दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह यहां भी गोपुरम बना हुआ है जिसकी ऊंचाई 249 फुट है। यह दुनिया का सबसे बड़ा गोपुरा माना जाता है।



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