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देवी चामुंडेश्वरी द्वारा महिषासुर के वध का प्रतीक है मैसूर दशहरा, देखें तस्वीरें

By Belal Jafri

भारत का शुमार विश्व के उन देशों में है जो जहां एक तरफ अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए विश्व मानचित्र पर अपना ख़ास मुकाम रखता है तो वहीं दूसरी तरफ अपने त्योहारों और पर्वों से देश दुनिया के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। ज्ञात हो कि जल्द ही सम्पूर्ण भारत में दशहरे की शुरुआत होने वाली है। मान्यता है कि भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।

यूं तो दशहरा पूर देश में मनाया जाता है लेकिन मैसूर में इसका विशेष महत्व है। 10 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव चामुंडेश्वरी द्वारा महिषासुर के वध का प्रतीक है। इसमें बुराई पर अच्छाई की जीत माना जाता है। इस पूरे महीने मैसूर महल को रोशनी से सजाया जाता है। इस दौरान अनेक सांस्कृतिक, धार्मिक और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

उत्सव के अंतिम दिन बैंड बाजे के साथ सजे हुए हाथी देवी की प्रतिमा को पारंपरिक विधि के अनुसार बन्नी मंटप तक पहुंचाते है। करीब 5 किमी. लंबी इस यात्रा के बाद रात को आतिशबाजी का कार्यक्रम होता है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी उत्साह के साथ निभाई जाती है। तो अब देर किस बात की आइये कुछ तस्वीरों के जरिये देखें मैसूर दशहरे की तैयारियां।

फोटो कर्टसी - https://www.facebook.com/mysorevarthe

दशहरे का मुख्य आकर्षण हाथी

दशहरे का मुख्य आकर्षण हाथी

हाथी मैसूर के दशहरे का मुख्य आकर्षण हैं। जिन्हें कुशल महावतों द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है।

हाथियों का समूह

हाथियों का समूह

अपने अपने महावतों के साथ हाथी।

दशहरे की तैयारी

दशहरे की तैयारी

दशहरे की तैयारी में व्यस्त आप जनता।

हाथियों का प्रदर्शन

हाथियों का प्रदर्शन

अपने अपने हाथियों का प्रदर्शन करते महावत।

नहाते हुए हाथी की तस्वीर

नहाते हुए हाथी की तस्वीर

आयोजन स्थल में नहाते हुए हाथी की तस्वीर।

पुरानी तोप

पुरानी तोप

मैसूर में आप दशहरे के दौरान राजा के शास्त्रों को भी देख सकते हैं।

खूबसूरत हाथी

खूबसूरत हाथी

आयोजन स्थल पर अपने हाथी के साथ एक महावत।

विशाल हाथी

विशाल हाथी

आयोजन स्थल पर अपने हाथी के साथ एक अन्य महावत ।

स्थानीय कलाकार

स्थानीय कलाकार

हाथियों और महावत के अलावा स्थानीय कलाकार भी मैसूर दशहरे के अन्य आकर्षण हैं।

लोगो

लोगो

मैसूर दशहरे के लोगो की खूबसूरत तस्वीर।

हाथियों का प्रदर्शन

हाथियों का प्रदर्शन

आयोजन स्थल पर अपने हाथी का प्रदर्शन करता एक अन्य महावत।

स्थानीय कलाकार

स्थानीय कलाकार

यहां के स्थानीय कलाकारों का संगीत ऐसा है जो किसी भी पर्यटक को मंत्र मुग्ध कर देगा।

नहाते हुए हाथी

नहाते हुए हाथी

आयोजन स्थल जाने से पूर्व नहाते हुए हाथियों की तस्वीर।

आयोजन स्थल पर जाता हाथी

आयोजन स्थल पर जाता हाथी

आयोजन स्थल पर अपने हाथी को ले जाता हुआ एक महावत।

मैसूर महल के बहार हाथी

मैसूर महल के बहार हाथी

मैसूर महल के बाहर अभ्यास करते हुए हाथी।

दशहरे की जानकारी देता पोस्टर

दशहरे की जानकारी देता पोस्टर

आयोजन स्थल की जानकारी देता एक पोस्टर।

लाखों की भीड़

लाखों की भीड़

बताया जाता है कि इस दशहरे को देखने के लिए लाखों की भीड़ जुटती है।

पंक्ति में हाथी

पंक्ति में हाथी

अपने महावत के साथ खड़ा एक अन्य हाथी।

हाथियों की फोटो खींचते लोग

हाथियों की फोटो खींचते लोग

आयोजन स्थल पर दशहरे में कुछ यूं होता है नज़ारा।

अभ्यास करते हाथी

अभ्यास करते हाथी

दशहरे के मुख्य आयोजन के लिए अभ्यास करते हाथी।

सुरक्षा के इंतेजाम

सुरक्षा के इंतेजाम

कोई दुर्घटना न घटे इसलिए आयोजन स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इन्तेजाम किये जाते हैं।

स्थानीय कलाकार

स्थानीय कलाकार

कर्नाटक के स्थानीय कलाकारों के एक समूह की तस्वीर।

सुरक्षा के प्रबंध

सुरक्षा के प्रबंध

इस पूरे आयोजन में सुरक्षा के विशेष प्रबंध किये जाते हैं।

जंगली हाथियों को प्रशिक्षित किया जाता है

जंगली हाथियों को प्रशिक्षित किया जाता है

बताया जाता है कि जंगल से हाथियों को पकड़कर उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है।

दुबारे से आते हैं हाथी

दुबारे से आते हैं हाथी

आपको बताते चलें कि मैसूर दशहरे के लिए दुबारे फॉरेस्ट कैम्प से हाथियों को लाया जाता है।

रॉयल भोजन

रॉयल भोजन

ज्ञात हो कि दशहरे के दौरान मैसूर लाये गए हाथियों और उनके महावतों को रॉयल भोजन दिया जाता है।

दूर दूर से आते हैं लोग

दूर दूर से आते हैं लोग

मैसूर के दशहरे की ख़ास बात ये है कि इसे देखने भारत के अलावा विदेश से भी पर्यटक आते हैं।

महिषासुर के वध का प्रतीक

महिषासुर के वध का प्रतीक

10 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव चामुंडेश्वरी द्वारा महिषासुर के वध का प्रतीक है।

सब अपने में अनूठा

सब अपने में अनूठा

इस दौरान अनेक सांस्कृतिक, धार्मिक और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

बैंड बाजे के साथ निकलता है जुलूस

बैंड बाजे के साथ निकलता है जुलूस

उत्सव के अंतिम दिन बैंड बाजे के साथ सजे हुए हाथी देवी की प्रतिमा को पारंपरिक विधि के अनुसार बन्नी मंटप तक पहुंचाते है।

आतिशबाजी का कार्यक्रम

आतिशबाजी का कार्यक्रम

करीब 5 किमी. लंबी इस यात्रा के बाद रात को आतिशबाजी का कार्यक्रम होता है।

रौशनी से सराबोर महल

रौशनी से सराबोर महल

इस पूरे महीने मैसूर महल को रोशनी से सजाया जाता है।

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