हमारे देश में जितनी जगहों पर भव्य तरीके से दशहरा मनाया जाता है, उनमें दक्षिण भारतीय शहर मैसूर का नाम प्रमुखता के साथ आता है। 3 अक्तूबर को मैसूर में 10 दिवसीय दशहरा उत्सव की शुरुआत हो चुकी है, जो अगले 12 अक्तूबर को विजयादशमी के दिन तक चलेगा। मैसूर में भी दशहरा को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतिक के रूप में ही मनाया जाता है कि वहां लंकेश रावण पर श्रीराम की जीत के रूप में नहीं बल्कि देवी चामुंडेश्वरी की राक्षश राज महिषासुर पर जीत के रूप में मनाया जाता है।
हर साल लाखों की संख्या में स्थानीय लोग व पर्यटक यहां जमा होकर मैसूर दशहरा के दौरान होने वाले कार्यक्रमों की रौनक बढ़ाते हैं।

कई कार्यक्रम लगाते हैं दशहरा उत्सव में चार चांद
मैसूर दशहरा सिर्फ देवी चामुंडेश्वरी की राक्षशराज महिषासुर पर विजय के तौर पर ही नहीं मनाया जाता है बल्कि इस दौरान मैसूर में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रम भी इस उत्सव में चार चांद लगा देते हैं। दशहरा उत्सव मूल रूप से एक शाही आयोजन होता है, जिसमें मैसूर पैलेस को शाम ढलते ही रोशनी से नहला दिया जाता है। मैसूर पैलेस की इस भव्य सजावट को देखने के लिए ही बड़ी संख्या में पर्यटक मैसूर पहुंचते हैं।
इस दौरान विभिन्न प्रकार के खेल, प्रतियोगिताएं, फिल्म फेस्टिवल और उत्सव के आखिरी दिन निकाली जाती है जम्बो सवारी, जिसमें हाथियों के पीठ पर विराजमान होती हैं देवी चामुंडेश्वरी।
इस साल प्रसिद्ध लेखक हम्पा नागाराजैया ने 3 अक्टूबर को मैसूर दशहरा का उद्घाटन 'वृश्चिक लग्न' में किया। दशहरा उत्सव का उद्घाटन समारोह चामुंडी हिल्स पर मौजूद मैसूर की अधिष्ठात्री देवी चामुंडेश्वरी के मंदिर में आयोजित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया समेत अन्य प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

सांस्कृतिक कार्यक्रम करेंगे मंत्रमुग्ध
हर साल की तरह दशहरा उत्सव के दौरान कर्नाटक के लगभग 508 समूहों के करीब 6500 कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रस्तुत करेंगे। दशहरा उत्सव का मुख्य कार्यक्रम जगमगाते अम्बाविलास पैलेस के सामने ही आयोजित होगा, जिसमें राज्य और देश भर के प्रसिद्ध कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
इसी दौरान मुख्यमंत्री राज्य संगीत विद्वान अवॉर्ड के विजेता को सम्मानित भी करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस साल मैसूर दशहरा अविस्मरणीय होने वाला है, क्योंकि संगीत जगत के दिग्गज इलियाराजा और ए.आर. रहमान भी इस साल 6 से 10 अक्तूबर के दौरान यहां अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही श्रेया घोषाल, बादशाह और रवि बसरूर के भी कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है।

सबसे भव्य होता है आखिरी दिन
मैसूर दशहरा का आखिरी दिन सबसे भव्य होता है, क्योंकि इस दिन निकाला जाता है हाथियों का जुलूस, जम्बो सवारी। देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को सोने से बने हौदे में रखकर हाथियों की पीठ पर विराजमान किया जाता है। अम्बाविलास पैलेस से यह सवारी निकाली जाती है, जो 6 किमी का रास्ता तय कर बन्नी मंटप पर पहुंचती है।
इस साल जम्बो सवारी 12 अक्तूबर को निकाली जाएगी, जिसमें मुख्यमंत्री व अन्य के शामिल होने की भी संभावना है। रास्ते भर श्रद्धालु देवी पर फूलों की बारिश करते रहते हैं। मैसूर के दशहरा उत्सव में सिर्फ हजारों स्थानीय या लाखों पर्यटक ही नहीं बल्कि शाही परिवार के सदस्य भी हिस्सा लेते हैं।

कैसे बने मैसूर दशहरा का हिस्सा :
आवेदन करें - अगर आप मैसूर दशहरा उत्सव में अपनी कला का प्रदर्शन करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको आवेदन करना होगा। यह आवेदन दशहरा कल्चरल सब-कमेटी के पास करनी होती है, जिसमें अपने परफॉर्मेंस के विषय में और अनुभव का उल्लेख करना अनिवार्य है।
डेडलाइन का रखे ख्याल - दशहरा उत्सव के शुरू होने से लगभग एक महीना पहले ही आवेदन स्वीकार करना बंद हो जाता है। इस साल 10 सितंबर को आवेदन करने की आखिरी तारीख थी। इसलिए डेडलाइन का हमेशा ध्यान रखे।
सिलेक्शन - आवेदन के बाद आपके आवेदन की जांच कर सेलेक्शन की पद्धति को पूरा किया जाता है। अगर आपका चुनाव होता है तो आपको इस बारे में जानकारी दी जाएगी।
स्थान - आमतौर पर दशहरा उत्सव के दौरान सभी कार्यक्रम मैसूर पैलेस और मैसूर शहर के ही विभिन्न जगहों पर आयोजित होते हैं।



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