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मैसूर में खुलेगा दुनिया का पहला LED गुम्बद वाला तारामंडल, जानिए कब!

दुनिया का पहला झुके हुए LED गुम्बद वाला तारामंडल, जहां आपको होगा खुले आकाश के नीचे, तारों की छांव में बैठने का अनुभव। अगर इस शानदार तारामंडल में बैठकर तारों की दुनिया और उनके रहस्यों से रू-ब-रू होना चाहते हैं तो आपको जाना पड़ेगा मैसूर। मैसूर के चामुंडी हिल्स के पास इस तारामंडल का निर्माण किया जा रहा है।

कितनी लागत से इस शानदार और दुनिया के पहले LED तारामंडल का निर्माण किया जा रहा है और कब तक इसका निर्माण पूरा हो जाएगा? इसके साथ ही LED गुम्बद वाले तारामंडल की खासियतों के बारे में जानना चाहते हैं? अगर ये सारी जानकारियां हासिल करना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

LED dome planetarium mysore

कितनी है लागत?

इस खास तारामंडल का निर्माण इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजीक्स (IIAp) और मैसूर यूनिवर्सिटी मिलकर कर रही है। जानकारी के अनुसार इस तारामंडल के निर्माण की लागत करीब ₹91 करोड़ होने वाली है। इस तारामंडल की विशेषताओं के बारे में बताते हुए IIAp की निदेशक अन्नपुर्णी सुब्रमणियन का कहना है कि इसका निर्माण बड़ी तेजी से किया जा रहा है। IIAp ने इस LED गुम्बद वाले तारामंडल के निर्माण की जिम्मेदारी RSA कॉस्मोस को सौंपी है।

यहां सभी तक के मशीनों और स्क्रीन आदि को लगाने की जिम्मेदारी ऑर्बिट एनिमेट प्रा. लि. को दी गयी है, जो एक फ्रेंच कंपनी का भारतीय सहायक कंपनी है। सुब्रमणियन का कहना है कि यह तारामंडल कॉस्मोलॉजी की शिक्षा और शोध व प्रशिक्षण के लिए एक हाईटेक हब साबित होने वाला है। जो सिर्फ छात्रों को ही नहीं बल्कि शिक्षकों, कॉस्मोलॉजी में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए मददगार तो साबित होगा ही साथ में समाज में लोगों को जागरूक भी करेगा।

क्या होंगी झुके हुए LED गुम्बद वाले तारामंडल की खासियतें?

सुब्रमणियन ने बताया कि आमतौर पर सभी तारामंडल में प्रोजोक्टर आधारित फुलडोम सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन मैसूर में बन रहे LED डोम (गुम्बद) में LED तत्वों का ही उपयोग कर तस्वीरें बनायी जाएंगी जो एक विशाल स्पेक्ट्रम पर प्रकाश की तरह पैदा होगा। इस तारामंडल में 15 मीटर की परिधि वाला गुम्बद तैयार किया जा रहा है जो 15 डिग्री के कोण पर झुका हुआ होगा।

mysore LED dome planetarium

इससे यहां बैठने वाले दर्शकों को आकाश का नजारा उनके सामने ही दिखाई देगा, न की दूसरे तारामंडलों की तरह, जहां रिक्लाइनिंग कुर्सियों पर गर्दन को ऊंचा उठाकर देखना पड़ता है। LED गुम्बद सिस्टम तारों से भरी ऐसी दुनिया की तस्वीरें प्रस्तुत करेगी जो देखने में दूसरे तारामंडल से कहीं ज्यादा अधिक वास्तविक और ज्यादा सुन्दर दिखेगी।

कब तक बनकर होगा तैयार?

LED गुम्बद वाले इस तारामंडल में 8 हजार LED लाइट्स लगायी जाएंगी जिनको SkyExplorer एस्ट्रोनॉमिनकल सॉफ्टवेयर के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा। बकौल सुब्रमणियन इस शानदार तारामंडल का निर्माण तेजी से किया जा रहा है और इसका काम अगले साल (2025) में सितंबर तक पूरा कर खोल देने का लक्ष्य बनाया गया है।

इस तारामंडल को तैयार करने के लिए वित्तीय मदद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सांसद निधि (MPLADS), विज्ञान व तकनीकी मंत्रालय, एटोमिक एनर्जी मंत्रालय व भारत सरकार के ऑफिस ऑफ प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर से मिल रही है।

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