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नागपंचमी : बस एक दिन ही है मौका, कर लें उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन, जानें कब खुलेंगे कपाट

उज्जैन का नागेश्वर मंदिर, बस एक दिन ही है मौका जब मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन कर सकते हैं। जी हां, साल में मात्र एक दिन के लिए ही खुलता है उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर। यह मंदिर सर्प देवता को समर्पित है। हर साल नागपंचमी के दिन इस मंदिर के कपाट खोले जाते हैं और अगले दिन फिर एक साल के लिए मंदिर के द्वार बंद कर दिये जाते हैं।

अगर आप उज्जैन में रहते हैं या इस वक्त घूमने या किसी काम के सिलसिले में ही उज्जैन में है, तो नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन करने का मौका बिल्कुल न चुके क्योंकि कल नागपंचमी के दिन ही मंदिर के कपाट खुलेंगे।

ujjain temple

कहां है नागेश्वर मंदिर

यह मंदिर उज्जैन में स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग मंदिर के तीसरी मंजील पर स्थित है। कल यानी नागपंचमी के दिन इस मंदिर के कपाट खुलेंगे और उसके बाद अगले 1 साल के लिए मंदिर के कपाट को फिर से बंद कर दिया जाएगा। स्थानीय मान्यता के अनुसार इस मंदिर में नागराज तक्षक विराजमान हैं।

बताया जाता है कि 11वीं शताब्दी में निर्मित यह प्रतिमा नेपाल से मंगाई गयी थी। यह दुनिया भर में अपने आप में एक अनोखा मंदिर है, क्योंकि यहां सर्प शैय्या पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के बजाए भगवान शिव और माता पार्वती विराजमान हैं।

कब खुलेगा नाग

इस नागपंचमी 9 अगस्त को मनायी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस साल नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट 8 अगस्त की रात को 12 बजे खोल दिये जाएंगे। मंदिर 9 अगस्त को पूरा दिन भक्तों के लिए खुला रहेगा। 9 अगस्त की रात को 12 बजे मंदिर के पट फिर से एक साल के बंद कर दिये जाएंगे।

यानी भक्तों के पास नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए मात्र 24 घंटों का वक्त होगा। मान्यतानुसार इस मंदिर में भगवान के दर्शन करने से सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसलिए बड़ी संख्या में दूर-दराज के इलाकों से भी भक्त उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन करने आते हैं।

nagchandreswar temple

साल में सिर्फ 1 ही दिन क्यों खुलता है मंदिर

पौराणिक मान्यता के अनुसार सर्पराज तक्षक ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी तपस्या की थी। उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने सर्पराज से उनकी इच्छा पूछी। कहा जाता है कि सर्पराज तक्षक ने सदैव महादेव के सान्निध्य में रहने का वरदान मांगा। इसके लिए महाकाल वन में उन्हें वास करना पड़ता।

लेकिन महाकाल वन में वास करने से पहले वह चाहते थे कि उनके एकांत में कोई विघ्न न डाल सकें। इसलिए सालों से यह प्रथा चली आ रही है कि नागचंद्रेश्वर मंदिर, जो हमेशा महाकाल के सान्निध्य में उसी मंदिर की तीसरी मंजील पर रहता है, के कपाट सिर्फ नागपंचमी के दिन ही खुलेंगे और साल के बाकी दिन यह मंदिर बंद रहेगा।

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