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सिर्फ नागपंचमी के दिन खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट, दुनिया का एकलौता मंदिर जहां...

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल मंदिर में नागपंचमी पर विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही उज्जैन में स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव के मंदिर को भी खोलने की तैयारी चल रही है। साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर ही इस मंदिर को खोला जाता है और महादेव व नागदेवता की पूजा की जाती है।

Nagchandreshwar Temple

इस साल भी नागपंचमी से पहले इस मंदिर को खोला जाएगा। नागपंचमी वाले दिन यह मंदिर पूरा दिन खुला रहता है। महिला, पुरुष व बच्चे यहां पूजा-अर्चना करते हैं लेकिन नागपंचमी के ठीक अगले दिन मंदिर को फिर से बंद कर दिया जाता है जो अगले साल नागपंचमी के दिन ही खुलेगा। सिर्फ इतना ही नहीं, इस मंदिर में भगवान शिव एक खास मूर्ति भी स्थापित है, जो इस मंदिर को विश्व का एकलौता मंदिर बनाता है। क्या है इस मूर्ति की खासियत? क्यों सिर्फ नागपंचमी के दिन ही इस मंदिर को खोला जाता है?

कब है नागपंचमी और पूजा का शुभ मुहूर्त

भारत के प्रमुख त्योहारों में नागपंचमी प्रमुख है। भारत, नेपाल व हिंदू आबादी वाले अन्य देशों में इसे बड़े ही धुमधाम के साथ मनाया जाता है। हर साल श्रावण में 2 नागपंचमी होती है, कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में। इस साल 7 जुलाई को कृष्णपक्ष का नागपंचमी मनाया गया जो मुख्य रूप से बिहार, राजस्थान व झारखंड में मनाया जाता है। 21 अगस्त (सोमवार) को शुक्लपक्ष की नागपंचमी मनाया जाएगा। नागपंचमी की तिथि 20 अगस्त को रात 12.23 बजे से शुरू होगी जो 21 अगस्त की रात को 2.01 मिनट पर खत्म होगी।

कहां है नागचंद्रेश्वर महादेव का मंदिर

Mahakal temple

नागचंद्रेश्वर महादेव का मंदिर उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही स्थित है। यह मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य शिखर के तीसरे खंड में यानी तीसरी मंजील पर स्थित है। साल के 364 दिनों तक मंदिर के पट बंद रहते हैं और महाकाल मंदिर में जाने वाले भक्तों को नागचंद्रेश्वर मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है। साल में सिर्फ 1 दिन के लिए, नागपंचमी के दिन इस मंदिर के पट को खोला जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में स्वयं नागराज तक्षक निवास करते हैं। इतना ही नहीं, इस मंदिर में भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ स्थापित हैं। लेकिन मंदिर में भगवान शिव की बड़ी ही अनोखी प्रतिमा है जो विश्व में और कहीं नहीं है।

क्या है इस प्रतिमा की खासियत

नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ निवास करते हैं, लेकिन यह मूर्ति दूसरे मंदिरों में स्थापित मूर्तियों से काफी अलग है। दरअसल, इस मंदिर में भगवान शिव सपरिवार नागों की शैय्या पर विराजमान हैं। ठीक वैसे ही, जैसे हर मंदिर या तस्वीर में भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ शेषनाग की शैय्या पर विराजमान होते हैं। यहीं इस मूर्ति की खासियत है, जो इसे दूसरी मूर्तियों से अलग बनाती है। बताया जाता है कि इस मंदिर में भगवान शिव की यह मूर्ति नेपाल से लायी गयी थी। मूर्ति 11वीं शताब्दी में बनी हुई बतायी जाती है। नागचंद्रेश्वर महादेव के मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और पुत्र कार्तिकेय-गणेश के साथ 10 फनों वाले नाग की शैय्या पर विराज कर रहे हैं।

Lord shiva ujjain

कब हुआ था मंदिर का निर्माण

महाकाल मंदिर तीन खंडे में विभक्त है। इसके पहले खंड में महाकालेश्वर मंदिर, दूसरे खंड में ओमकारेश्वर मंदिर और तीसरे खंड में नागचंद्रेश्वर महादेव का मंदिर स्थापित है। कहा जाता है कि नागचंद्रेश्वर महादेव के मंदिर में दर्शन करने से भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती का भी आर्शिवाद मिलता है। मिली जानकारी के अनुसार नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण राजा भोज ने 1050 ई. के आसपास करवाया था। 1732 में जब मंदिर काफी जीर्ण हो गया था, तब सिंधिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया ने महाकाल मंदिर के साथ-साथ इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार करवाया था।

क्यों सिर्फ नागपंचमी को खुलते हैं मंदिर के पट

नागचंद्रेश्वर महादेव के मंदिर के पट हर साल सिर्फ नागपंचमी के दिन ही खोले जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया था। इसके बाद से ही तक्षक भगवान शिव के सान्निध्य में निवास करने लगे थे। जब तक्षक महाकाल वन (वर्तमान उज्जैन) में निवास करने आए तो वह चाहते थे कि उनके एकांत में कोई विध्न ना आए। इसलिए उनकी इच्छा के अनुसार ही हर साल सिर्फ नागपंचमी के दिन उनके मंदिर को खोला जाता है।

कब होगी नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में पूजा

उज्जैन के नागचंद्रेश्वर महादेव के मंदिर में त्रिकाल पूजा की परंपरा है। यानी तीन प्रहरों या समय में पूजा का प्रावधान है। पहली पूजा आधीरात को महानिर्वाणी होगी, दूसरी पूजा नागपंचमी के दिन दोपहर में और तीसरी पूजा नागपंचमी की शाम को महाकाल की पूजा के बाद होती है। इस साल महानिर्वाणी पूजा 20/21 अगस्त की रात को 12 बजे होगी और 21/22 अगस्त की रात को नागचंद्रेश्वर मंदिर को फिर से 1 साल के लिए बंद कर दिया जाएगा।

ujjain

कैसे पहुंचे नागचंद्रेश्वर महादेव के मंदिर

नागचंद्रेश्वर महादेव के मंदिर जाना और उज्जैन के महाकाल मंदिर जाना एक ही समान है। यह मंदिर इंदौर एयरपोर्ट से करीब 60 किमी की दूरी पर है। इस मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उज्जैन स्टेशन है जो मंदिर से महज 2-3 किमी की दूरी पर ही है। सड़क मार्ग से यह मंदिर व उज्जैन शहर सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। इस वजह से नागचंद्रेश्वर महादेव का मंदिर जाना काफी आसान है।

FAQs
कौन सा मंदिर साल में सिर्फ 1 बार खुलता है?

उज्जैन का नागचंद्रेश्वर महादेव का मंदिर और उत्तराखंड का वंशी नारायण मंदिर साल में सिर्फ एक दिन के लिए खुलता है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

उज्जैन के महाकाल मंदिर के सबसे ऊपरी शिखर पर स्थापित नागचंद्रेश्वर मंदिर में सपरिवार भगवान शिव व नागदेवता की पूजा होती है। यह मंदिर अपने आप में अद्वितीय है, जो साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी के दिन खुलता है।

इस साल नागचंद्रेश्वर मंदिर कब खुलेगा?

नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ 1 दिन के लिए खुलता है। इस साल यह मंदिर 20 अगस्त की रात को 12 बजे खुलेगा और 21 अगस्त की रात को 12 बजे मंदिर को फिर एक साल के लिए बंद कर दिया जाएगा।

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