जल्द हमेशा के लिए बदलने वाला है नागपुर से गोवा के बीच के सफर का अनुभव। अब तक नागपुर से गोवा के बीच का रास्ता सड़क मार्ग से तय करने में जहां 18 से 20 घंटों का समय या कभी-कभी उससे भी ज्यादा लग जाता है, वहीं नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के खुल जाने के बाद इस रास्ते को तय करने में लगने वाला सफर घटकर रह जाएगा महज 8 से 10 घंटों का।
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास प्राधिकरण (MSRDC) द्वारा किया जा रहा है। कितनी लंबा है नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे? कौन-कौन से धार्मिक स्थलों को जोड़ने का काम कर रही है नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे?

आइए आपको शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं -
कहां से कहां तक
नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे वर्धा से सिंधुदुर्ग तक जाती है, जो रास्ते में पड़ने वाले कई प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ेगी। धार्मिक स्थलों को जोड़ने की वजह से ही इन इलाकों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह एक्सप्रेसवे वर्धा जिले में पवनार से शुरू होती है जो महाराष्ट्र-गोवा सीमा पर पत्रादेवी के पास जाकर खत्म होती है। इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 802 किमी है, जो नागपुर से गोवा के बीच के सफर को हमेशा के लिए बदल देने वाला है।
देश की सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक
नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 802 किमी है, जो नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी अधिक लंबा होगा। इस वजह से शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे की गिनती देश के सबसे अधिक लंबे एक्सप्रेसवे में होगी। नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे लगभग 701 किमी लंबा है। हालांकि शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का महत्व इसकी लंबाई से कहीं ज्यादा बतायी जा रही है। माना जा रहा है कि नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे आम लोगों और उनकी धार्मिक मान्यताओं के बीच एक सेतु की तरह काम करेगा।
कब तक पूरा होगा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का काम?
वर्ष 2023 में महाराष्ट्र के तत्कालिन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समृद्धि महामार्ग के तर्ज पर शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के निर्माण की घोषणा की थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोल्हापुर जिले में किसानों के विरोध की वजह से शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का काम रोक दिया गया है। लेकिन पिछले दिनों ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने PWD विभाग की अगले 100 दिनों की समीक्षा बैठक बुलायी थी, जिसमें इस एक्सप्रेसवे का निर्माण तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि एक्सप्रेसवे का निर्माण कब तक पूरा कर लिया जाएगा, इस बाबत अभी तक आधिकारिक रूप से कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

क्या है रूट और कौन से धार्मिक स्थलों को जोड़ेगा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे?
मिली जानकारी के अनुसार शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र के वर्धा जिले से सिंधुदुर्ग जिले के पात्रादेवी तक फैला हुआ है। इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने से हिंगोली, नांदेड़, परभणी, बीड, लातूर, धाराशिव, वर्धा, यवतमाल, सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग जिलों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। यह शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे जिन धार्मिक स्थलों को जोड़ने का काम करेगा, उनमें शामिल है -
- माहूर
- तुलजापुर
- अंबेजोगाई शक्तिपीठ
- औंढा नागनाथ और परली बैजनाथ ज्योतिर्लिंग
- नांदेड़ गुरुद्वारा
- पंढरपुर
- कारंजा लाड
- अक्कलकोट
- गाणगापुर
- नरसोबाची वाडी
- औंदूबर तीर्थ
नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र के लगभग 12 जिलों से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेसवे 6 लेन चौड़ा होगा, जिससे गाड़ियों को आवाजाही करने में कोई परेशानी नहीं होगी।



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