हमारे देश में सबसे लंबी तटरेखा गुजरात में है, जहां कई तरह के जलीय जीवों का निवास है। गुजरात के गिर नेशनल पार्क में एक ओर जहां एशियाई शेर चहलकदमी करते हैं, वहीं दूसरी ओर समुद्र में डॉल्फिन अठखेलियां करती दिखाई देती हैं। हाल ही में गुजरात के वन विभाग द्वारा डॉल्फिन गणना (Dolphin Census) की गयी थी।
14 अप्रैल को राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस (National Dolphin Day) के मौके पर हम आपको गुजरात में हुए डॉल्फिन गणना का परिणाम बताएंगे। इसके साथ ही हम आपको यह भी बताने वाले हैं कि गुजरात के कौन से समुद्रतटीय क्षेत्र में सबसे डॉल्फिन की सबसे ज्यादा संख्या पाई गयी है और कहां जाने पर डॉल्फिन दिखने की सबसे ज्यादा संभावना होगी!

गुजरात में मिले कुल 680 डॉल्फिन
Desh Gujarat की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिनों गुजरात में हुई डॉल्फिन गणना में यहां के सभी समुद्रतटीय क्षेत्रों को शामिल किया गया था। कुल मिलाकर गुजरात में लगभग 680 डॉल्फिन पाई गयी हैं।
मीडिया रिपोर्ट की माने तो गुजरात में कच्छ से भावनगर तक के समुद्री क्षेत्र को डॉल्फिन का घर कहा जाता है। इसका एक बड़ा हिस्सा समुद्री नेशनल पार्क और समुद्री अभयारण्य के तौर पर चिह्नित हैं। गुजरात के लगभग 4087 वर्ग किमी में फैले समुद्री क्षेत्र में 680 डॉल्फिन के होने की जानकारी डॉल्फिन गणना के दौरान मिली है।
कहां मिले कितने डॉल्फिन?
कच्छ की खाड़ी का दक्षिणी हिस्सा -
यह हिस्सा लगभग 1384 वर्ग किमी के समुद्री क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां सबसे ज्यादा संख्या में डॉल्फिन के होने की पुष्टि की गयी है। ओखा से नवलाखी तक फैले समुद्री क्षेत्र में लगभग 498 डॉल्फिन मिले हैं।
कच्छ की खाड़ी का उत्तरी हिस्सा -
- कच्छ सर्किल के 1821 वर्ग किमी के समुद्री क्षेत्र में 168 डॉल्फिन
- भावनगर के 494 वर्ग किमी समुद्री क्षेत्र में 10 डॉल्फिन
- मोरबी के 388 वर्ग किमी समुद्री क्षेत्र में 4 डॉल्फिन
पिछले साल (2024) गुजरात के समुद्री क्षेत्रों में मौजूद डॉल्फिन गणना के समय इनकी संख्या 678 पायी गयी थी। यानी पिछले साल के मुकाबले साल डॉल्फिन की संख्या में खास वृद्धि तो नहीं हुई लेकिन अच्छी बात यह रही कि इनकी संख्या में पिछले साल के मुकाबले कोई कमी भी नहीं आयी।
हालांकि साल 2022 के मुकाबले वर्ष 2024 में Humpback डॉल्फिन, जो गुजरात के समुद्री क्षेत्रों में पाए जाते है, की संख्या में लगभग 200% का इजाफा देखा गया था। साल 2022 में डॉल्फिन गणना के दौरान इनकी संख्या मात्र 221 दर्ज की गयी थी।
गुजरात में पाए जाने वाले डॉल्फिन की खासियत -
गुजरात के समुद्री क्षेत्र में पाए जाने वाले डॉल्फिन को भारतीय कुबड़ वाले समुद्री डॉल्फिन (Indian Ocean Humpback Dolphin) के नाम से जाना जाता है। इस प्रजाति के डॉल्फिन बड़ी संख्या में अरब सागर में पाए जाते हैं। डॉल्फिन यूं तो अपने दोस्ताना स्वभाव और इंसानों के आसपास घूमने या उनसे न डरने जैसी प्रवृतियों के लिए ही जाने जाते हैं।

समुद्र से बाहर छलांग लगाना, पानी से बाहर आकर करतब दिखाना आदि के लिए लोग इन्हें खूब पसंद भी करते हैं। एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए डॉल्फिन को एक महत्वपूर्ण जलीय जीव माना जाता है। बताया जाता है कि भोजन श्रृंखला और जलीय जीवों के जीवन, पारिस्थितिकी तंत्र में डॉल्फिन बड़ी भूमिका निभाते हैं।
क्या होती है Humpback डॉल्फिन की विशेषताएं?
- लंबाई - 2.7 मीटर तक।
- वजन - 150 से 200 किलोग्राम तक।
- भोजन - छोटी मछलियां।
बताया जाता है कि Humpback डॉल्फिन धीमी रफ्तार से तैरती हैं। ये समुद्र की सतह से लगभग 20 मीटर तक नीचे तैरती हैं और कभी-कभी पानी के ऊपर आकर भी छलांग भरती है। आमतौर पर Humpback डॉल्फिन के बच्चे गहरे सलेटी रंग के होते हैं, जिसके नीचले हिस्से में हल्का सलेटी रंग होता है। Humpback ऊंटों की तरह डॉल्फिन की पीठ पर कोई कुबड़ नहीं होता है। बल्कि यहां एक झिल्लीदार पंख होती है, जो संभवतः तैरने में उन्हें मदद करती है।
गौरतलब है कि गंगा में पाए जाने वाले डॉल्फिन (Gangetic Dolphin) भारत का राष्ट्रीय जलीय पशु भी है, जो पिछले दिनों बिहार की राजधानी पटना की गंगा में कई सालों बाद बड़ी संख्या में देखने को मिले हैं।



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