भारत मंदिरों का देश है, ये तो सभी जानते हैं लेकिन देश में कुछ ऐसे भी मंदिर है, जिनका संबंध मुगलों से है और इन्हें मुगलों ने बनवाया था, ऐसा शायद ही कोई जानता होगा। मध्य प्रदेश के मांडू में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर भी इन्हीं में से एक है। जी हां, इस मंदिर को मुगल सम्राट अकबर ने बनवाया था। यह जिले के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।
विदेशी पर्यटक भी आते हैं सिर झुकाने
यह मंदिर देश के उन मंदिरों में से एक है, जहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं और महादेव का आशीर्वाद भी लेते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर सच्चे दिल से अगर कोई कुछ मांगता है तो भोलेनाथ उसे जरूर पूरा करते हैं। यह मंदिर मांडू के मंडवगढ़ किले में स्थित है।

शिवलिंग का होता है 24 घंटे जलाभिषेक
मांडू की सुंदर वादियों के बसा महादेव का यह मंदिर अपने आप में अनोखा है, यह उन मंदिरों में से एक है, जहां भगवान शिव का 24 घंटे जलाभिषेक होता रहता है। यह जल अभिषेक किसी व्यक्ति या पुजारी द्वारा नहीं बल्कि प्राकृतिक रूप से होता है। मंदिर में एक झरना देखने को मिलता है, जिसका जल निरंतर महादेव पर गिरता रहता है, जो मंदिर को खास बनाता है।
महल के अंदर बना है नीलकंठेश्वर महादेव का मंदिर
यह मंदिर महल के अंदर बना है, जो घाटी पर स्थित तो है लेकिन इसके लिए आपको 60 सीढ़ियां नीचे उतरने पड़ती है। रास्ते में आपको एक कुंड भी दिखाई देता है, जिसका जल काफी पवित्र माना जाता है। सीढ़ियों के पास में गणेश जी का एक मंदिर भी है। इस दौरान आपको घाटियों का विहंगम दृश्य देखने को मिलेगा, जो सुकून भरा पल देता है। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला पर यह मंदिर मानसून में और सुंदर हो जाता है और चारों तरफ हरियाली देखने को मिलती है।

नीलकंठेश्वर या नीलकंठ मंदिर का इतिहास
नीलकंठेश्वर महादेव का इतिहास से भी गहरा नाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर को मुगल सम्राट अकबर ने बनवाया था। इस मंदिर की वास्तुकला भी मुगलों से मिलती है। लाल पत्थरों को बारिकी से तराश कर बनाया गया यह मंदिर 16वीं शताब्दी में बनाया गया था। इसका निर्माण प्रमोद स्थल के रूप में किया गया था। यहां पर आपको दो शिलालेख भी देखने को मिलेंगे, जो अकबर के समय के माने जाते हैं। इतिहास की मानें तो इस महल की डिजाइन शाहबाग खान ने तैयार की थी।
जोधा को उपहार में दी थी यह मंदिर
कहा जाता है कि 1564 में इस मंदिर को बनाने के लिए अकबर ने आदेश दिया था, जिसके बाद से मंदिर बन जाने पर इसे अपनी बेगम जोधाबाई को भेंट स्वरूप समर्पित कर दी थी। कहा जाता है कि एक मांडू की यात्रा के दौरान सम्राट अकबर ने इसी मंदिर में शरण ली थी। इस पल के बारे में अकबर ने कहा था कि यह उनके जीवन के सबसे शांत व सुखद पलों में से एक है, जिसका जिक्र मंदिर में स्थित शिलालेख में मिलता है।
औरंगजेब ने बंद करवा दिया था मंदिर का रास्ता
कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब ने अपने शासनकाल में मंदिर जाने वाले रास्ते को बंद करवा दिया था। लेकिन बाद में पेशवा शासकों ने 1732 ईस्वी में इसे फिर से खोल दिया। मांडू में स्थित महादेव के इस मंदिर में प्रवेश करते ही एक अलग सा सुकून मिलता है, जो शायद आपने कभी महसूस न की होगी। ऐसे में अगर आप कभी मांडू की यात्रा प्लान करें तो नीलकंठ मंदिर जरूर जाएं।
नीलकंठ मंदिर कैसे पहुंचें?
नीलकंठ मंदिर मांडू शहर से करीब 3 किमी की दूरी पर स्थित है। मंदिर के पास पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है, ऐसे में अगर आप अपने निजी कार या टैक्सी से जाने की सोच रहे हैं तो आप आराम से जा सकते हैं। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन दोनों ही इंदौर (100 किमी) में ही है।



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