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कैसा होगा वंदे साधारण एक्सप्रेस ट्रेन का नॉन-एसी कोच? कब से हो सकती है शुरुआत?

आम लोगों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने बजट फ्रेंडली वंदे साधारण एक्सप्रेस को शुरू करने का फैसला लिया है। वंदे भारत के तर्ज पर शुरू होने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से नॉन-एसी होगी और काफी किफायती कीमतों पर यात्री इससे यात्रा कर सकेंगे। वंदे साधारण एक्सप्रेस को लेकर समय-समय कर कई अपडेट आते रहे हैं। अब केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वंदे भारत एक्सप्रेस (स्लीपर वर्जन) के कोच की पहली झलक दिखाई है।

Vande sadharan

इसके साथ ही उन्होंने वंदे साधारण एक्सप्रेस की नॉन-एसी ट्रेन के शुरू होने की संभावित तारीख के बारे में भी बताया है।

आधुनिक सुविधाओं से होगा लैस

नीले रंग की कोच वाली पुरानी स्लीपर कोच और उसका इंटीरियर अब गुजरे जमाने की बात होने वाली है। केंद्रीय रेल मंत्री ने वंदे साधारण कोच का जो डिजाइन अपने X (ट्विटर) हैंडल पर शेयर किया है, वह देखने में काफी मॉडर्न लग रहा है।

New coach

इस ट्रेन को अभी तक आधिकारिक रूप से 'वंदे भारत (स्लीपर वर्जन)' के नाम से ही पुकारा जा रहा है। हालांकि तस्वीरों को देखने से यह किसी एसी कोच का ही मॉडल लग रहा है। इसका डिजाइन यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर ही किया गया है।

इंटीरियर में सफेद और ब्राउन रंग का इस्तेमाल

Vande bharat new coach

सामान्य तौर पर नॉन-एसी स्लीपर कोच में नीले रंग की सीट और कोच की दिवारों पर सफेद रंग का सनमाइका चढ़ा होता है। लेकिन वंदे भारत (स्लीपर वर्जन) कोच की सीचें ऑफ ह्वाइट और कोच की दिवारें चॉकलेटी ब्राउन रंग में नजर आ रही हैं। इसके साथ ही हर कुपे में सोने के लिए 3 के बजाए 2 सीटें ही दिखाई दे रही हैं। यानी मीडिल बर्थ नहीं इस ट्रेन में सिर्फ लोअर और अपर बर्थ ही होंगी। ऊपर वाली बर्थ पर चढ़ने के लिए सीढियां बनी हुई हैं, जो सामान्य स्लीपर कोच से काफी अलग और आरामदायक हैं।

बर्थ पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा चौड़ी हैं, जिससे यात्रियों को आराम और क्लास का अनुभव हो सकें। हर यात्री के लिए चार्जिंग पोर्ट और आने वाले स्टेशन से संबंधित जानकारी देने के लिए हर कुपे में डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाएगा। इसके साथ ही इस ट्रेन में पहले के मुकाबले अधिक चौड़ा और अपग्रेडेड टॉयलेट होगा।

आपातकाल में लोको पायलट से कर सकेंगे बात

वंदे साधारण या वंदे भारत (स्लीपर वर्जन) ट्रेनों को भी 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से पटरी पर दौड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। वंदे भारत की तरह ही इसके स्लीपर वर्जन में भी कई सुविधाएं जैसे ऑन-बोर्ड इनफोटेंमेंट, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और आपातकाल की स्थिति में यात्री लोको पायलट से बात कर सकें, इसकी सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

train coach

मिली जानकारी के अनुसार वंदे भारत (स्लीपर वर्जन) के एक ट्रेन में 20 से 22 कोच होंगे। बताया जाता है कि हर ट्रेन में 857 बर्थ होंगी जिसमें से 34 सीटें रेलवे के स्टाफ के लिए आरक्षित रहेंगी। यात्रियों को 823 सीटें उपलब्ध करायी जाएगी। दिव्यांग यात्रियों को लिए खास तौर पर रैंप और व्हीलचेयर की व्यवस्था रहेगी।

कब से होगी शुरुआत

वंदे भारत (स्लीपर वर्जन) ट्रेनों की शुरुआत 4 महीने यानी साल 2024 के शुरुआत में हो सकती है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने ट्वीट में कुछ ऐसा ही संकेत दिया है। इस को किन रूट्स पर चलाया जाएगा, अभी तक इस बाबत कोई फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन संभावना है कि जिन रूट्स पर मध्यम वर्गीय यात्रियों का सबसे अधिक आना-जाना होता है, जैसे बिहार, झारखंड से पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे शहरों के बीच इस ट्रेन को सबसे पहले चलाया जाएगा।

Vande sadharan sleeper version

बाद में धीरे-धीरे दूसरे शहरों के बीच भी इस ट्रेन का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। वंदे साधारण या वंदे भारत (स्लीपर वर्जन) ट्रेनों का रंग गेरुआ और स्लेटी होने की संभावना है। इस ट्रेन के कोचों का निर्माण भी चेन्नई के इंटिग्रल कोच फैक्ट्री में ही किया जा रहा है।

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