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क्या है जगन्नाथ पुरी का रत्न भंडार, जिसकी खोई चाबी को लेकर मचा हुआ है बवाल!

हाल ही में चुनावी सभा को संबोधित करने ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में गये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगन्नाथ पुरी के रत्न भंडार की खोई चाबी को लेकर सवाल उठाया। इसके बाद से ही इस चाबी को लेकर बवाल मच गया है। जगन्नाथ धाम की गिनती बड़ा चार धाम के एक प्रमुख धाम के रूप में होती है। मान्यताओं के अनुसार 12वीं सदी में इस मंदिर का निर्माण गंग राजवंश के अनंत मर्न चोड़ गंग ने करवाया था।

मंदिर के संरक्षण का कार्य आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) करती है। जगन्नाथ मंदिर की गिनती भारत के उन प्रमुख मंदिरों में होती है, जिनके पास बेशुमार खजाना मौजूद है। आइए आपको जगन्नाथ पुरी के रत्न भंडार और उसकी खोई चाबी के बारे में विस्तार से बताते हैं, जिसे लेकर इन दिनों चुनावी रैलियों का बाजार खूब गर्म है।

jagannath temple ratna bhandar

मंदिर में है दो रत्न भंडार

जानकारों के मुताबिक पुरी के जगन्नाथ मंदिर के दो रत्न भंडार हैं, पहला बाहरी और दूसरा अंदरुनी। बाहरी रत्न भंडार को अक्सर खोला जाता है। वहां से ज़ेवर आदि लेकर विभिन्न उत्सवों व मौकों पर देवताओं को सजाया जाता है। लेकिन अंदरुनी रत्न भंडार जिसकी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी, को पिछले लगभग 4 दशकों से खोला नहीं जा सका है।

इस रत्न भंडार की चाबी गुम हो गयी है। अब तक इस रत्न भंडार को मात्र 4 बार ही खोला गया है। 1905, 1926, 1978 और 1984 में। इसके बाद वर्ष 2018 में ASI ने रत्न भंडार को फिर से खोलने का प्रयास तो किया था लेकिन तब पता चला कि इसकी चाबी खो चुकी है।

रत्न भंडार खोलने का क्या नियम है?

साल 1960 के जगन्नाथ मंदिर नियम में कहा गया था कि रत्न भंडार में मौजूद आभूषणों का हर 6 महीने में ऑडिट किया जाएगा। ऑडिट कैसे होगा, आभूषणों की जिम्मेदारी किसके पास होगी, चाबियां किसके पास रहेंगी इत्यादि के बारे में इस नियम में सब कुछ निर्धारित किया जा चुका है।

ratna bhandar of puri temple

मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावों के मुताबिक नियम पुस्तिका के अनुसार आभूषणों को रत्न भंडार के अंदरुनी चेंबर में रखा जाता है, जिसे दो तालों में बंद किया जाता है। ये तालें केवल राज्य सरकार की अनुमति से ही खोले जा सकते हैं और मंदिर प्रशासन इन तालों की चाबियां सरकारी खजाने में जमा करवा देती है।

जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में क्या है?

साल 1978 में हुए एक सर्वे का हवाला देते हुए ओडिशा सरकार ने कहा था कि रत्न भंडार में 149 किलो से अधिक सोने के गहने और 258 किलो चांदी के बर्तन थे। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार उस समय ओडिशा के तत्कालिन कानून मंत्री प्रताप जेना ने बताया था कि रत्न भंडार के आंतरिक और बाहरी दोनों कक्ष खोले गये और 15 मई 1978 से 23 जुलाई 1978 के बीच वहां संग्रहीत वस्तुओं की गिनती की गयी थी जिसकी सूची मंदिर प्रशासन ने तैयार की थी।

दावे के मुताबित उस वक्त रत्न भंडार में कीमती पत्थर जड़े 12,831 भारी सोने के आभूषण, 22,153 भारी चांदी के बर्तन व अन्य कीमती वस्तुएं मौजूद थी। हालांकि इनका मूल्यांकन उस समय नहीं हो सका था। इसके अलावा 14 सोने व चांदी की वस्तुओं का वजन भी नहीं हो सका था, जिन्हें 1978 की सूची में शामिल नहीं किया गया था।

jagannath temple puri

कैसे खोई रत्न भंडार की चाबी?

मिली जानकारी के अनुसार पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबी पुरी के कलेक्टर के पास रहती थी। साल 2018 में हाई कोर्ट के आदेश पर जब ASI ने रत्न भंडार को खोलने की तैयारी शुरू की तो वह इसमें सफल नहीं हो सका था। क्योंकि उसी समय से रत्न भंडार की चाबी खो गयी है।

हालांकि ओडिशा की वर्तमान सत्तारुढ़ पार्टी ने दावा किया है कि जुलाई में रथ यात्रा के दौरान रत्न भंडार को खोला जाएगा। पार्टी की ओर से दावा किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी वर्तमान समय में मंदिर के खजाने/रत्न भंडार को फिर से खोलने पर काम कर रही है, जिसकी चाबी का पिछले 6 सालों से कोई अता-पता नहीं मिल पा रहा है।

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