जैतुन (Olive) जैसे रंगों की वजह से लोकप्रिय ऑलिव रिडले कछुए (Olive Ridley Turtle)। हर साल ओडिशा, चेन्नई और गोवा के विभिन्न समुद्रतटों पर घोंसला देने के लिए आने वाले ये समुद्री कछुए पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र होते हैं। बड़ी संख्या में पर्यटक पहले समुद्र से बाहर आकर तट पर अपना घोंसला बनाने वाले इन कछुओं और बाद में अंडों से बाहर निकलकर समुद्र की ओर दौड़ लगाने वाले ऑलिव रिडले कछुओं के नन्हें-मुन्ने बच्चों को देखने के लिए ओडिशा समेत अन्य प्रमुख समुद्रतटों पर पहुंचते हैं।
लेकिन इस साल तो ओडिशा के समुद्रतट पर आने वाले ऑलिव रिडले कछुओं ने पिछले सारे रिकॉर्ड को तोड़ डाला है।

Times of India की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार समुद्रतटों पर इस साल करीब 6.82 लाख ओलिव रिडले कछुए अपना घोंसला बनाने के लिए पहुंच चुके हैं, जो बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। हालांकि इससे पहले इतनी बड़ी तादाद में इन कछुओं को समुद्रतट पर कभी नहीं देखा गया था। ऐसे में सवाल उठता है, आखिर इतनी भारी तादाद में कछुए क्यों समुद्रतटों पर पहुंच रहे हैं?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस साल सामूहिक घोंसला बनाने के सीजन की शुरुआत 16 फरवरी 2025 से हुई थी जो 25 फरवरी तक जारी रही। इस दौरान लाखों की संख्या में ऑलिव रिडले कछुओं ने समुद्रतटों पर अपना घोंसला बनाया और उनमें अंडे दिये, जो एक नया रिकॉर्ड है। राज्य सरकारों की तरफ से आवश्यक व्यवस्थाएं और कदम भी उठाए गये हैं, ताकि इन कछुओं की प्रजनन प्रक्रिया में कोई भी समस्या पैदा न हो। इसके साथ ही कछुओं और उनके अंडों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया जा सकें।
बता दें, ऑलिव रिडले कछुए सबसे छोटे समुद्री प्राणियों में से एक माने जाते हैं, जो बड़े समूहों में प्रजनन प्रक्रिया में हिस्सा लेते और अंडे देते हैं। मुख्य रूप से ओडिशा के रुशिकुला नदी के मुहाने, गढीमाथा समुद्रतट और देवी नदी के मुहानों पर ये कछुए अपना घोंसला बनाते हैं।
पिछले साल का रिकॉर्ड कछुओं ने तोड़ डाला
समुद्री ऑलिव रिडले कछुओं ने इस साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। इस साल 6.41 लाख से ज्यादा कछुओं ने ओडिशा के पोडम्पेटा से बटेश्वर समुद्रतटों के बीच में अपना घोंसला बनाकर अंडे दिये हैं। इस बारे में रुशिकुल्या सी टर्टल परियोजना समूह के सचिव रविन्द्रनाथ साहू का कहना है कि साल 2023 में लगभग 6.37 लाख ऑलिव रिडले कछुओं ने समुद्रतट पर अंडे दिये थे, जो अपने-आप में एक रिकॉर्ड है।
इसे इस साल आने वाले कछुओं की संख्या ने तोड़ डाला है। वहीं बहरमपुर डिविजनल वन अधिकारी सनी खोक्कर का भी कहना है कि इससे पहले सर्वाधिक संख्या में 5.50 लाख कछुए साल 2022 में देखे गये थे।

अंडों का किया जा रहा है बचाव
कछुओं को सिर्फ अपना घोंसला बनाने के लिए उचित जगह देना ही पर्याप्त नहीं होता है बल्कि लगभग 45-50 दिनों तक मांसाहारी पशुओं और इंसानों से अंडों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना और जब अंडों से ऑलिव रिडले कछुए बाहर निकलते हैं, तब उनको सुरक्षित समुद्र में वापस लौटने का रास्ता मुहैया करवाना भी बहुत जरूरी होता है। इस वजह से ओडिशा सरकार की ओर से 9 किमी लंबे स्ट्रेच में न्यू पोडम्पेटा से प्रयागी तक तार लगा दिया गया है।



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