इस देश में अनगिनत मंदिर है और इनमें से कई ऐसे, जिनकी वास्तुकला आज भी लोगों को अचंभित करती है। जो भी पर्यटक इन्हें पहली बार देखते हैं, उनके मन में बस एक ही सवाल आता है कि आखिर कैसे? आखिर कैसे कोई इतनी सुंदर व जटिल नक्काशी कर सकता है? कई तो ऐसे मंदिर हैं, जिन पर आजतक रिसर्च किया जा रहा है। इनमें से ही एक है उड़ीसा का पापनाशिनी शिव मंदिर..।
जी हां, भगवान शिव को समर्पित को यह मंदिर उड़ीसा के भुवनेश्वर स्थित लिंगराज मंदिर के समीप स्थित है। आक्रमणकारियों के हमले व रखरखाव ठीक से न होने के चलते यह थोड़ा ढह गया है, लेकिन आज भी इसकी मूर्तियां आकर्षित करती है। आंशिक रूप से ढह जाने के बाद भी यह मंदिर आज भी आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

पापनाशिनी शिव मंदिर में स्थित तालाब
मंदिर परिसर में एक तालाब है, जो हरे-भरे पानी के साथ पक्षियों का घर भी है। ऐसी मान्यता है कि इस तालाब में डुबकी लगाने से श्रद्धालुओं को पापों से मुक्ति मिलती है। इसीलिए इस मंदिर का नाम भी पापनाशिनी शिव मंदिर पड़ गया, जो अपनी बेहतरीन वास्तुकला के लिए जानी जाती है।
पापनाशिनी शिव मंदिर का इतिहास व वास्तुकला
पापनाशिनी शिव मंदिर की वास्तुकला कलिंग शैली में बनाई गई है, जिसके आधार पर यह मंदिर 14वीं-15वीं शाताब्दी के बीच बताई जाती है। हालांकि, मंदिर को हजारों साल पुराना बताया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में आपको कोई मूर्ति नहीं देखने को मिलेगी। लेटराइट के लाल ईंटों से बना यह मंदिर एक नुकीले मीनार के आकार का दिखता है।

वहीं, मंदिर की अंदर की दीवारों पर नक्काशी कर मूर्तियों को उकेरने का काम किया गया है। वहीं, मंदिर में पीठासीन मूर्ति शिव की है। मंदिर की बाहरी सतह पर की गई कारीगरी पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करती हैं, जिसे एक बार देखने पर नजर टिक ही जाती है।
पापनाशिनी शिव मंदिर में दर्शन करने का समय - सुबह 07:00 बजे से लेकर शाम 08:00 बजे तक।
पापनाशिनी शिव मंदिर में जाने का सही समय - अक्टूबर से लेकर अप्रैल तक।
पापनाशिनी शिव मंदिर में मनाए जाने वाला त्योहार - महाशिवरात्रि, श्रावण सोमवार व डोल पूर्णिमा।
नोट - पापनाशिनी शिव मंदिर के लिए सरकार या भारतीय पुरातत्व विभाग को आगे आकर इस धरोहर की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस ढह रही प्राचीन विरासत को संरक्षित करने का काम करना चाहिए।



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