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महाराष्ट्र का यह दिलचस्प गांव, जहां के लोग आज भी करते हैं पुर्तगाली भाषा में बातचीत

भारत में कई तरह की बोलियां और भाषाएं बोली जाती हैं। हमारे देश में कई विदेशी भाषाएं जैसे अंग्रेजी और नेपाली का भी काफी प्रचलन है। लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां के लोग आज भी पुर्तगाली भाषा में बात करते हैं?

korlai fort

जी हां, ऐसा ही एक गांव महाराष्ट्र में मौजूद है। महाराष्ट्र में कोंकण क्षेत्र के कोस्टल इलाके में रायगढ़ जिले में मौजूद कोरलाई गांव ऐसी जगह है जहां के लोग आम बोलचाल के लिए भी मराठी मिश्रित पुर्तगाली भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

आइए आपको इस अनोखे गांव और इसके आसपास घूमने की जगहों के बारे में बताते हैं :

कोरलाई का पुर्तगाल कनेक्शन

पूर्तगाली सबसे पहले सन् 1505 में चौल में आए थे, जो कोरलाई गांव के पास ही स्थित है। 1520 से लेकर 1740 तक, यानी लगभग 200 सालों तक पूर्तगालियों ने इस क्षेत्र पर अपना साम्राज्य कायम किया था। बाद में चिमाजी अप्पा ने यहां से पुर्तगालियों को भगाकर इस क्षेत्र को मराठा साम्राज्य में शामिल किया।

Korlai Fort

उस समय अधिकतर पुर्तगाली सैनिक समुद्र के रास्ते भाग गये थे। सिर्फ 4-5 परिवार ही ऐसे थे, जो इस गांव में आकर बस गये। उन्हीं परिवार के सदस्यों ने पहले लैटिन और बाद में पूर्तगाली भाषा में आपस में बात करना शुरू किया। धीरे-धीरे इन परिवारों के लोगों ने मराठी भाषा सीखी और आज ये मराठी मिश्रित पूर्तगाली भाषा बोलते हैं।

अतीत की जानकारी देता है कोरलाई किला

कोरलाई गांव से कुछ ही दूरी पर मौजूद है कोरलाई किला। इस किले का निर्माण पूर्तगालियों द्वारा ही करवाया गया था। अगर आपकी दिलचस्पी अतीत के पन्नों में झांकने और ऐतिहासिक जगहों पर घूमने में है, तो एक बार कोरलाई गांव व इस किले पर जरूर आए। अरब सागर के किनारे बसे इस किले से समुद्र और उसकी ऊंची उठती लहरें बेहद सुन्दर दिखती है।

Korlai Fort

कोरलाई किले को पुर्तगालियों ने अपने हजारों सैनिकों और घोड़ों के रहने के लिए बनवाया था। कम लोकप्रिय होने की वजह से इस किले में पर्यटक काफी कम संख्या में आते हैं। इसलिए यहां आपको दूसरे किलों की तरह अत्यधिक भीड़भाड़ नहीं मिलेगी।

लगभग 500 सालों पहले किया गया था निर्माण

कोरलाई किले का निर्माण आज से लगभग 500 साल पहले सन् 1521 में किया गया था। यह किला इतना विशाल था कि किले में 7000 घोड़े व सैनिक एक बार में यह सकते थे। इस किले का निर्माण पुर्तगालियों ने अपने शासन को बचाने के लिए किया था।

Korlai Fort

इसलिए किले की दिवारों पर आज भी तोप रखी नजर आती हैं। दुनिया के बेहतरीन किलों में गिने जाने वाले कोरलाई किले के निर्माण का एक उद्देश्य रेवदंडा क्रीक के मार्ग की रक्षा करनी भी थी। रेवदंडा एक विशाल समुद्रतट है, जिसके रास्ते पुर्तगाली आवागमन किया करते थे।

कैसे पहुंचे कोरलाई गांव

कोरलाई गांव का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट मुंबई एयरपोर्ट है जो यहां से लगभग 150 किमी की दूरी पर है। अगर आप रेलमार्ग से कोरलाई आना चाहते हैं तो नजदीकी रेलवे स्टेशन पेन है जो यहां से लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है। पेन से कोरलाई पहुंचने के लिए आपको किराए पर गाड़ी लेनी होगी। इसके अलावा कोरलाई गांव देश के कई प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।

FAQs
कोलराई किला कहां है?

कोलराई किला महाराष्ट्र के रायपुर जिले में कोंकण क्षेत्र के कोस्टल इलाके में मौजूद है। अरब सागर के किनारे इस किले का निर्माण पूर्तगालियों द्वारा करवाया गया था। इस किले के पास मौजूद कोलराई गांव के लोग आज भी आम बोलचाल की भाषा में पूर्तगाली भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

कोरलाई गांव की क्या खासियत है?

कोरलाई गांव महाराष्ट्र व संभवतः भारत का एकमात्र ऐसा गांव हैं, जहां के लोग आज भी पूर्तगाली भाषा में बातचीत करते हैं। इस गांव के लोग पूर्तगाली और मराठी भाषा को मिलाकर एक विशिष्ट भाषा का इस्तेमाल आम बोलचाल की भाषा में करते हैं।

कोरलाई किला क्यों प्रसिद्ध है?

कोरलाई किला पूर्तगालियों द्वारा बनवाया गया एक विशाल किला है। यह किला इतना बड़ा है कि एक बार में इस किले में 7000 घोड़े और उतनी ही संख्या में सैनिक रह सकते थे। इस किले का निर्माण पूर्तगालियों ने अपने शासन को बचाने के लिए किया था।

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