Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »सबसे खतरनाक ट्रेकिंग में शामिल है लद्दाख के इस मठ तक पहुंचने का रास्ता

सबसे खतरनाक ट्रेकिंग में शामिल है लद्दाख के इस मठ तक पहुंचने का रास्ता

लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों में बने फुग्ताल मठ का इतिहास 2550 साल से भी ज्यादा पुराना है। दूर से दिखने पर यह मठ बिल्कुल किसी शहद के छत्ते जैसा दिखता है। इस मठ तक पहुंचने का रास्ता लद्दाख के सबसे खतरनाक ट्रेकिंग में एक माना जाता है।

Phuktal monastery

इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि फुग्ताल मठ के ठीक सामने इतनी गहरी खाई है कि जरा सी लापरवाही किसी की जान पर आफत का कारण बन सकती है।

आइए लद्दाख के फुग्ताल मठ और इसकी खतरनाक ट्रेकिंग के बारे में बताते हैं :

लद्दाख का सबसे खास ऑफबीट डेस्टिनेशन

लद्दाख में कई घूमने की जगहें हैं, लेकिन अगर आपको ऑफबीट जगहें ज्यादा पसंद है, तो आपको फुग्ताल मठ जरूर आना चाहिए। यह मठ समुद्रतल से करीब 4800 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। महज 3 घंटे की ट्रेकिंग के बाद आप यहां पहुंच सकते हैं और रास्ते में बहती नदी का स्वच्छ नीला पानी आपके आंखों को सुकून से भर देता है।

gate of phuktal monastery

इस मठ तक पहुंचने के लिए नदी पर बने सस्पेंशन पुल का इस्तेमाल करना पड़ता है। यह लंगनाक घाटी का एकलौता मठ है, जहां पैदल ट्रेक कर पहुंचा जा सकता है। हैंगिंग गुफाओं में बना यह मठ दूर से देखने पर शहद के छत्ते जैसा दिखाई देता है।

कदम रखना जरा संभल कर

फुग्ताल मठ की चढ़ाई खंगसार गांव से शुरू होती है। यह चढ़ाई तो एक दिन में ही पूरी हो सकती है लेकिन यह चढ़ाई काफी खतरनाक मानी जाती है। फुग्ताल मठ के ठीक सामने गहरी खाई होती है। मठ के सामने से होकर ज़न्सकर नदी बहती है।

phugtal trekking

रास्ते उबड़-खाबड़ होते हैं, इसलिए यहां हर कदम को काफी संभलकर रखने की सलाह दी जाती है। इस मठ में करीब 200 बौद्ध भिक्षु रहते हैं। उनके लिए मठ में ढेर सारे कमरे और लाइब्रेरी भी है। मठ तक सभी सामानों को घोड़े और खच्चरों के माध्यम से ही पहुंचाया जाता है।

फुग्ताल मठ का इतिहास

फुग्ताल मठ के बारे में कहा जाता है कि भगवान गौतम बुद्ध के प्रमुख शिष्य 16 अर्हत यहां सबसे पहले रहा करते थे। इनकी तस्वीरें मठ की गुफाओं के दिवारों पर भी अंकित हैं। 12वीं शताब्दी में तिब्बत के महान ट्रांसलेटर जनस्कार लोतसावा फाग्पा शेराब भी यहां रह चुके हैं।

phuktal gompa

आज के समय में इस मठ में प्रार्थना कमरा, रसोई घर, क्वार्टर, लाइब्रेरी जिसमें पवित्र पुस्तकें सुरक्षित हैं, के अलावा एक पवित्र जलधारा भी है जो सुरक्षित स्थान है। माना जाता है कि इस जलधारा के पानी से मुश्किल से मुश्किल बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं।

More News

Read more about: ladakh india
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+