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In Pics- इंडोनेशिया में राम, अमेरिका में हनुमान, श्रीलंका में रावण से लेकर भारत में विभीषण मंदिर...

दशहरा यानि विजयदशमी के दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। यह कोई कहानी नहीं जो मात्र ग्रंथों और किताबों तक सीमित है। दरअसल इसके साक्ष्‍य पृथ्‍वी पर अलग-अलग रूपों में मौजूद हैं। यही कारण है कि दुनिया भर में लाखों मंदिरों में भगवान राम, लक्षमण, माता सीता, भगवान बजरंगबली को पूजा जाता है। लेकिन क्या आपको मालूम है कई मंदिर ऐसे भी हैं, जहां रावण, विभषण, कुंभकरण को भी पूजा जाता है।

Temples of Ramayana

दशहरा के उपलक्ष्‍य में हम आपको उन मंदिरों की सैर करायेंगे जो रामायण में आने वाले विभिन्न लोगों के प्रति आस्था का प्रतीक हैं। ये मंदिर केवल भारत में ही नहीं, बल्कि इंडोनेशिया, अमेरिका जैसे देशों में भी मौजूद हैं। तो चलिए एक-एक कर कदम बढ़ाते हैं और मंदिरों को प्रणाम करते हैं-

रामायण मंदिर, इंडोनेशिया

इंडोनेशिया के प्रंबनन मंदिर में संपूर्ण रामायण को पत्थरों पर उकेरा गया है। पत्थरों पर नक्काशी के माध्‍यम से पूरी रामायण का चित्रण किया गया है, जिसमें भगवान राम, हनुमान से लेकर रावण, मंदोधरी, शूर्पनखा तक को दर्शाया गया है।

राम मंदिर, अयोध्‍या

वैसे तो पूरे भारत समेत दुनिया के अलग-अलग देशों में भगवान राम के लाखों मंदिर हैं, लेकिन नवनिर्मित अयोध्‍या मंदिर का एक अलग स्थान है। क्योंकि यहीं पर राम लला का जन्म हुआ था। इस मंदिर में भगवान राम के बाल रूप को दर्शाया गया है।

Ram Temple Ayodhya

सीता मंदिर, नेपाल

राजा जनक की पुत्री सीता माता को जानकी भी कहा जाता है और उनका मंदिर नेपाल के जनकपुरधाम में है। कोइरी हिंन्दू शिल्पकला पर आधारित यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना है। करीब 1400 वर्ग मीटर क्षेत्र में बने इस मंदिर में माता सीता की पूजा करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

लक्षमण मंदिर, भरतपुर

राजस्थान के भरतपुर शहर में लक्षमण जी का यह मंदिर करीब 400 साल पुराना है। यह मंदिर लोक कल्याण के लिए भरतपुर के संस्थापक राजा बलदेव सिंह ने बनवाया था। कहा जाता है उन्‍होंने यह मंदिर नागा बाबा संत दास से प्रेरित होकर बनवाया था।

हनुमान मंदिर, टेक्सास

अमेरिका के टेक्सास शहर में बने हिन्‍दू मदिर में एक अलग मंदिर हनुमान जी का है, जहां पर 90 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा है। अमेरिका में यह तीसरी सबसे ऊंची मूर्ती है। इसके ऊंची स्टेच्‍यू ऑफ लिबर्टी और फ्लोरिडा में पेगासस एंड ड्रैगन की मूर्तियां हैं। आपको बता दें कि हनुमान जी की यह मूर्ति पूर्ण रूप से कांस्‍य की बनी है।

Hanuman Temple Texas

कौशल्या मंदिर

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के चंदखुरी गांव में माता कौशल्या का मंदिर है। शहर से 27 किलोमीटर दूर इस मंदिर में माता कौशल्या की बहुत सुंदर प्रतिमा है, जिसमें वो रामलला को गोद में लिये हुए हैं। इस मंदिर का निर्माण 8वीं सदी में किया गया था। आगे चलकर यह मंदिर तोड़ दिया गया था, लेकिन बाद में 1973 में इसे पुन: बनवाया गया।

कैकेई मंदिर

अयोध्‍या का कनक भवन कैकेई मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। दरअसल यह सुनहरे रंग का महल है, जो राम कोट की पूर्व-उत्तर दिशा में पड़ता है। कहा जाता है कि यह महल कैकेई ने भगवान राम और सीता माता को उनके विवाह के तुरंत बाद भेंट किया था।

रावण मंदिर, श्रीलंका

श्रीलंका में कोनेशवरम मंदिर है जहां पर रावण की विशाल प्रतिमा है। पत्थरों और पहाड़ों के बीच इस मंदिर में मुख्‍य रूप से भगवान शिव की पूजा की जाती है। दरअसल रावण भी भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। हालांकि भारत में भी कई शहरों में रावण मंदिर हैं।

कुंभकरण मंदिर

अनंतपुर के पेणुगोंडा में राष्‍ट्रीय राजमार्ग से करीब 1 किलोमीटर दूर स्‍थ‍ित एक थीम पार्क है, जहां पर कुंभकरण की यह विशाल मूर्ति है। इसमें आप देख सकते हैं कि कुंभकरण के पेट के अंदर एक छोटी सी गुफा है, जहां लोग अकसर पूजा करने जाते हैं।

विभीषण मंदिर, कैथून राजस्थान

राजस्थान के कैथून में देश का एक मात्र विभीषण मंदिर है। यह करीब 50000 साल पुराना मंदिर है, जहां रावण के भाई विभीषण की पूजा की जाती है। पौराण‍िक कथाओं के अनुसार जब भगवान राम का अयोध्‍या में राज्याभिषेक हुआ तब भगवान शिव ने पृथ्‍वी की सैर करने की इच्‍छा प्रकट की। इस इच्‍छा को विभीषण ने पूरा किया। वे भगवान शिव और हनुमान जी को कांवण में बिठा कर यात्रा पर निकल पड़े। लेकिन भगवान शिव की शर्त थी कि जहां भी कावण जमीन को छुएगा यात्रा वहीं संपन्न मानी जाएगी। इस भ्रमण के दौरान कैथून में कांवण जमीन को छू गया और यात्रा यहीं समाप्त हो गई। कावण का एक सिरा चौरचौमा में और दूसरा कोटा में पड़ा इसलिए एग जगह पर शिव मंदिर है तो दूसरी जगह पर हनुमान मंदिर है।

मेघनाद मंदिर

रावण के पुत्र मेघनाद का मंदिर ओड‍िशा के कोएंझार में है। यह मंदिर यहां के हरिचंदंनपुर के जंगलों के बीच में स्थि‍त है। घने जंगलों के अंदर करीब 5 किलोमीटर तक चलने पर इस मंदिर तक पहुंच पाते हैं।

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