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स्वतंत्रता दिवस : चंपारण, जहां गांधी ने जलाई थी अंग्रेजों के खिलाफ पहली मशाल

चंपारण में घूमने लायक स्थल । places to visit in champaran bihar

चंपारण, भारत के पूर्वी राज्य बिहार का ऐतिहासिक स्थल है, जो अब पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के नाम से जाना जाता है। भारत - नेपाल सीमा से करीब इस स्थल की भूमिका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। अगर आप इतिहास के पन्ने उठाएं तो आपको जरूर पता चलेगा कि विदेश से आने के बाद राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ अपना सबसे पहला अहिंसक मोर्चा यहीं से खोला था। इसे हम भारत का पहला किसान आदोंलन भी कह सकते हैं, जिसका प्रतिनिधित्व स्वयं बापू ने किया था।

लगान की मार झेल रहे किसानों को महात्मा गांधी ने राहत दिलाई थी। यह औपनिवेशिक भारत के दयनीय दिन थे, जब अंग्रेज भारत और भारतीयों का शोषण पूरे बल के साथ कर रहे थे। आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं, यह ऐतिहासिक स्थल आपके लिए कितना मायने रखता है।

क्या था चंपारण आदोंलन ?

क्या था चंपारण आदोंलन ?

PC- Kanu Gandhi

चंपारण औपनिवेशिक भारत का पहला किसान आंदोलन और सत्याग्रह( 1917 - 18) था, जिसका प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी ने किया था। यह भारतीय इतिहास का सबसे दयनीय काल था, जब भारतीयों पर अंग्रेजों का शोषण पूरे जोर पर था। खासकर किसानों और मजदूरों की स्थित काफी दयनीय थी। अंग्रेज दिन-प्रतिदिन शोषण के नए हथकंडे भूमिहीन और गरीब किसानों पर अपनाते। ज्यादा पैसा कमाने के त्वरित तरीको के रुप में ब्रिटिश अफसरों ने किसानों को नील की खेती करने पर वाध्य किया। किसानों पर भारी लगान भी लगाए गए थे ।

इस दौरान चंपारण में महात्मा गांधी का आगमन हुआ, और गांधी किसानों का दयनीय हाल देख का दुखी हुए। हालात का जायजा लेकर गांधी ने इसी स्थल से अंग्रेजों के खिलाफ अपनी पहली मशाल जलाई। गांधी को इस मसले को लेकर कोर्ट मेजिस्ट्रेट के सामने भी खड़ा होना पड़ा था। इस पूरे आदोंलन में गांधी ने अपने सफल नेता और समाजसेवी होने का परिचय लोगों को कराया।

इन स्थानों का करें भ्रमण : मोतिहारी

इन स्थानों का करें भ्रमण : मोतिहारी

PC- Kanu Gandhi

पटना से लगभग 170 कि.मी की दूरी पर स्थित मोतीहारी पूर्वी चंपारण के अंतर्गत एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां आप चंपारण भ्रमण के दौरान आ सकते हैं। यह प्राचीन समय में काफी महत्वपूर्ण माना जाता था। अतीत से जुड़े साक्ष्यों के अनुसार यह क्षेत्र मिथिला राज्य का एक महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। इसके अलावा स्वंतत्रता संग्राम के दौरान इस स्थल की अहम भूमिका थी।

यहां चंपारण आंदोलन के दौरान गांधी का आगमन हुआ था, और उन्होंने यहां के गरीब किसानों को जागरूक किया था। मोतिहारी आप आसानी से पहुंच सकते है, यह स्थल सड़क और रेल परिवहन से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

 केसरिया

केसरिया

PC-Ashwini Kesharwani

मोतिहारी के अलावा आप पूर्वी चंपारण के केसरिया स्थल की सैर का प्लान बना सकते हैं। जिले में गंडक नदी के पूर्वी तट पर स्थित यह एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से काफी ज्यादा मायने रखता है। माना जाता है कि पुरातात्विक उत्खनन के दौरान यहं से 104 फीट लंबा स्तूप प्राप्त किया गया था। इस विशाल स्तूप को देखने के लिए यहां रोजाना दूर-दराज से पर्यटक आते हैं।

यह स्थल बौद्ध धर्म के इतिहास में एक महत्पूर्ण स्थान प्राप्त कर चुका है। अतीत से जुड़े साक्ष्यों के अनुसार वैशाली से कुशीनगर जाने के दौरान केसरिया में भगवान बुद्ध का आगमन हुआ था और वे यहां एक रात रुके भी थे।

अरेराज

अरेराज

ऐतिहासिक स्थलों के अलावा आप चंपारण में धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कर सकते हैं। मोतीहारी से लगभग 30 किमी की दूरी पर, अरेराज नाम का गांव है, जो धार्मिक रुप से काफी ज्यादा महत्व रखता है। यहां भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर मौजूद है। यहां दर्शन के लिए दूर-दराज के श्रद्धालुओं का आगमन होता है। खासकर सावन माह के दौरान यहां शिवभक्तों का भारी जमावड़ा लगता है।

आध्यात्मिक अनुभव के लिए आप इस गांव का भ्रमण कर सकते हैं। इसके अलावा आप यहां से 2 कि.मी की दूरी पर स्थित लौरिया गांव में प्राचीन अशोकन पत्थर स्तंभ को भी देख सकते हैं। यह स्तंभ 249 ईसा पूर्व में बनाया गया था और जिसकी ऊंचाई 11.5 मीटर की है।

सीताकुंड

सीताकुंड

मोतीहारी के दक्षिणपूर्व में लगभग 22 किमी दूर आप सीताकुंड गांव की सैर का प्लान बना सकते हैं। यह एक ऐतिहासिक गांव है जो अपने प्राचीन किले अवशेषों के लिए जाना जाता है। खंडहर रूप में स्थित यह स्थल बिहार के अतीत का स्मरण कराता है। इस किले के अंदर एक पवित्र जलाशय भी मौजूद है, जिसे सीताकुंड के नाम से जाना जाता है। इस जलाशय से एक पौराणिक किवदंती भी जुड़ी है, माना जाता है कि माता सीता ने इस कुंड में कभी स्नान किया था। इसलिए यहां भारी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है।

खासकर रामनवमी के अवसर पर यहां खास मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें अत्यधिक संख्या में लोग शामिल होते हैं। किले के आसपास कई मंदिर भी बन हुए हैं, मंदिर हैं, जिनमें से सूर्य भगवान, हनुमान और भगवान विष्णु को समर्पित काफी ज्यादा प्रसिद्ध हैं।

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