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नालगोंडा के ये स्थान बनाएंगे आपकी तेलंगाना यात्रा को सुखद

छुट्टियां बिताने के लिए अगर आप विभिन्न तत्वों से युक्त किसी खास गंतव्य की तलाश में हैं तो आप दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य स्थित नालगोंडा की सैर का आनंद ले सकते हैं। नालगोंडा दक्षिण का एक ऐसा खास स्थल है जहां आप प्राकृतिक सुंदरता से लेकर ऐतिहासिक महत्व रखने वाले स्थलों का भी भ्रमण कर सकते हैं।

यह एक ऐतिहासिक स्थल है जिसका इतिहास कई साल पुराना बताया जाता है। नालगोंडा पर कई दक्षिण राजवंशों का शासन रच चुका है। आज भी यहां खड़ी इमारतों के माध्यम से आप यहां के अतीत को भली भांति समझ सकते हैं। यह शहर प्राकृतिक खजानों के साथ-साथ भव्य किलों के लिए भी जाना जाता है।

दो पहाड़ियों के बीच स्थित है यह स्थान साहसिक ट्रेकिंग के लिए सबको आमंत्रित करता है। इसके अलावा आप यहां प्राचीन मंदिरों और आध्यात्मिक स्थलों में जाकर अपार मानसिक और आत्मिक शांति का अनुभव कर सकते हैं। इस खास लेख में जानिए पर्यटन के मामले में यह स्थल आपको किस प्रकार आनंदित कर सकता है।

डेवरकोंडा किला

डेवरकोंडा किला

PC- Ssjasper2003

नालगोंडा भ्रमण की शुरूआत आप यहां के ऐतिहासिक स्थानों से कर सकते हैं। डेवरकोंडा फोर्ट यहां के सबसे प्राचीन किलों में से एक है, जहां आप शहर के अतीत के विषय में अत्यधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में यह किला अब खंडहर के रूप में स्थित है, लेकिन किले की काली पड़ती दीवारों और आसपास के माहौल का जायदा लेकर इसकी प्रारंभीक भव्यता के बारे में पता लगाया जा सकता है।

सात पहाड़ियों के बीच स्थित डेवरकोंडा किला कभी अपनी विशालता के लिए जाना जाना था। अतीत से जुड़े साक्ष्य बताते हैं कि इस किले का निर्माण 1287 ईस्वी से 1482 ईस्वी के बीच हुआ था।

भोंगीर फोर्ट

भोंगीर फोर्ट

PC- Brahmanand Reddy

डेवरकोंडा फोर्ट के बाद अगर आप चाहें तो भोंगीर फोर्ट की सैर का आनंद ले सकते हैं। लगभग 40 एकड़ जमीन में फैला भोंगिर किला एक विशाल चट्टान पर स्थित है। लगभग 500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला शहर के शानदार दृश्य पेश करने का काम करता है। यहां से आप नालगोंडा की ऐतिहासिक और प्राकृतिक खूबसूरती को निहार सकते हैं। इस किले का निर्माण त्रिभुवनमल्ला विक्रमादित्य द्वारा किया गया था, औऱ राजा के नाम पर इस किले का नाम त्रिभुवनगिरी रखा गया था।

लेकिन अब इस किले को भोंगीर फोर्ट के नाम से ही जाना जाता है। इतिहास की बेहतर समझ के लिए आप यहां की यात्रा कर सकते हैं।

राचाकोंडा किला

राचाकोंडा किला

PC- Ylnr123

उपरोक्त दो किलो के अलावा आप राचाकोंडा फोर्ट की सैर का आनंद ले सकते हैं। यह किला भी यहां के बाकी किलों की तरह खंडहर अवस्था में हैं, लेकिन इसकी मजबूती और विशालता को आज भी अनुभव किया जा सकता है। अतीत से जुड़े साक्ष्य बताते हैं कि इस किले का निर्माण 14वीं शताब्दी के आसपास किया गया होगा।

अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण यह किला बड़ी संख्या में सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह किला सिंगमा नायक द्वारा बनवाया गया था। यहां काकतीया वास्तुकला के कुछ अच्छे नमूने देखे जा सकते हैं।

मेल्लाचेरवू

मेल्लाचेरवू

PC- Naidugari Jayanna

नालगोंडा के नजदीक मेल्लाचेरवू भी एक ऐतिहासिक जगह है, जहां की यात्रा उपरोक्त स्थलों के साथ की जा सकती है। यह स्थान अपने भव्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। काकातिया राजाओं के शासनकाल के दौरान बनाए गए ये मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ शानदार वास्तुकला के लिए भी जाने जाते हैं। स्वयंभू संभुलिंगेश्वर स्वामी मंदिर यहां सबसे मुख्य आकर्षण हैं।

इस स्थान को 'दक्षिण की वाराणसी' भी कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि इस मंदिर की ऊंचाई अपने आप बढ़ती है। एक फुट बढ़ते है एक लाल रेखा अपनी आप उभर आती है।

पिल्लाइमारी

पिल्लाइमारी

PC- C.Chandra Kanth Rao

उपरोक्त स्थानों के अलावा आप यहां के प्राचीन गांव पिल्लाइमारी की सैर का आनंद ले सकते हैं। यह प्राचीन गांव काकातीय राजाओं के शासन के दौरान बनाए गए उत्कृष्ट मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। ये मंदिर समय के साथ-साथ विध्वंस होते गए और वर्तमान में ऐतिहासिक संरचनाओं के नाम से ही जाने जाते हैं।

फिर भी मंदिर को देख आप आप काकातीय वंश की गौरवशाली भवन निर्माण शैली को समझ सकते हैं। भगवान शिव को समर्पित चेन्ना केशव स्वामी मंदिर यहां के मुख्य आकर्षणों में शामिल है। मंदिर की वास्तुकला और खूबसूरत नक्काशी आश्चर्यजनक है।

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